बढ़ती उम्र में बच्चों को कहां ध्यान देना चाहिए?
बढ़ती उम्र में बच्चों को किस और ध्यान देना चाहिए? अक्सर बच्चे डॉक्टर इंजीनियर या फिर कुछ और बनने की इच्छा जताते हैं। जानते हैं कि क्यों ऐसे किसी लक्ष्य की जरुरत नहीं है।
 
बढ़ती उम्र में बच्चों को कहां ध्यान देना चाहिए?
 

किसी फोकस की जरुरत नहीं है

बढ़ती उम्र में बच्चे के ध्यान का केंद्र क्या होना चाहिए - कुछ भी नहीं। माता-पिता तो बिल्कुल भी नहीं। किसी भी चीज पर फोकस करने की जरूरत नहीं, उन्हें बस बढऩा चाहिए, यही जरूरी है। विकास सिर्फ शरीर से जुड़ा हुआ नहीं होता, उन्हें सभी स्तरों पर विकसित होना चाहिए। सभी स्तरों पर बढऩे का मतलब सामाजिक तौर पर हमने यह समझा है कि ‘आपको बड़े होकर एक अच्छा इंसान बनना चाहिए।’ यह जरूरी नहीं है कि आप एक अच्छे इंसान बनने के लिए विकास करें। अगर आपका दिमाग, आपका मन, आपकी भावनाएं और आपकी ऊर्जा अपनी पूर्ण क्षमता तक विकसित होते हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से एक आनंदपूर्ण इंसान के रूप में विकसित होंगे।

जीवन का बीज हमेशा अच्छा होता है

माता-पिता को लगता है कि ‘शायद बीज ही अच्छा नहीं है?’ इसीलिए उन्हें संदेह होता है। इसीलिए वे लगातार उपदेश देते रहते हैं, ‘अच्छे बनो, अच्छे बनो।’

 ‘मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं’, ‘मैं पायलट बनना चाहता हूं’, ‘मैं पुलिस या इंजीनियर बनना चाहता हूं...’ यह सब 5 साल की उम्र में जरूरी नहीं है।
वे खुद आशंकित होते हैं। ये जान लीजिए कि जीवन आपके बीज से नहीं मिला। आपके बीज से सिर्फ शरीर मिला है, जीवन का बीज हमेशा अच्छा होता है। शरीर का बीज हमेशा वैसा ही रहेगा, आप जितना खिलाएंगे, वह उतना ही बेहतर विकसित होगा। बच्चे के लिए सिर्फ ‘विकास’ मुद्दा होना चाहिए। विकास- शरीर, मन, भावना और ऊर्जा के स्तर पर। ‘मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं’, ‘मैं पायलट बनना चाहता हूं’, ‘मैं पुलिस या इंजीनियर बनना चाहता हूं...’ यह सब 5 साल की उम्र में जरूरी नहीं है। उन्हें बस बढ़ना चाहिए। अगर आपका शरीर, आपका मन, आपकी भावना पूरी क्षमता तक विकसित होते हैं, तो आप इस दुनिया में कोई महत्वपूर्ण काम ही करेंगे, ऐसा-वैसा काम नहीं। अगर हमारा दिमाग पूरी तरह विकसित है, तो हम जो करेंगे, उसे बेहतरीन ढंग से करेंगे।

ईशा के ईशा संस्कृति स्कूल का उद्देश्य

अब हमने इसी फोकस के साथ इन ‘ईशा संस्कृति’ स्कूल को शुरू किया है, इन लोगों का ध्यान डॉक्टर, इंजीनियर बनने, पैसे कमाने, यह बनने या वह बनने पर नहीं है।

हम सभी राजे महाराजाओं को तो भूल गए हैं लेकिन तानसेन को लोग अब भी याद करते हैं, क्यों? क्योंकि उसने गाया ही कुछ इस तरह से। 
 यहां सिर्फ शरीर-मन-भावना-ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। जब आप विकसित हो रहे हों, तो एकमात्र ध्यान विकास पर होना चाहिए। किसी और फोकस के साथ आप कैसे विकसित हो सकते हैं? इसलिए बच्चों को किसी फोकस या केंद्रबिंदु की जरूरत नहीं है। खुद प्रकृति भी पूरा ध्यान विकास पर देती है। जो जरूरत है, बस उसे पूरा कर दीजिए। अगर आप उसे पूरा करते हैं, तो हम दुनिया में जो भी करेंगे, वह हमारी बेहतरीन क्षमता के साथ होगा। चाहे वह कोई भी काम हो, वह उस काम में चोटी पर पहुंच सकता है। बहुत समय पहले किसी ने गाना शुरु किया, तब लोगों ने सोचा होगा ‘गाने में क्या है, सिर्फ आ..आ..आ..’ ही तो करना है, लेकिन किसी ने ऐसा गीत गाया कि हम सभी राजे महाराजाओं को तो भूल गए हैं लेकिन तानसेन को लोग अब भी याद करते हैं, क्यों? क्योंकि उसने गाया ही कुछ इस तरह से। आप कोई साधारण सा राग शुरू करके उसे भी उसी अवस्था तक पहुंचा सकते हैं। जीवन पूरी ऊंचाई तक तभी पहुंचता है, जब वह पूरी तरह विकसित होता है। कोई खाना बना रहा था, तो लोगों को लगा कि खाना पकाने में क्या है..  लेकिन पांच या दस हजार साल बाद भी लोग नल और उसकी पाक-कला को नहीं भूले हैं। हमने उसका भोजन नहीं खाया, हमें नहीं पता कि वह कैसे खाना खिलाते थे, लेकिन उनका नाम पीढ़ी दर पीढ़ी लिया जाता है। क्यों? क्योंकि वह पाक-कला (खाना बनाने की कला) को उस अवस्था तक ले कर गए।

पूरी क्षमता पर पहुँचने पर कोई भी काम करना आसान है

एक बार जब कोई व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता तक विकसित हो जाए, तो चाहे आप उसे कुछ भी दें, चाहे आप उसे कोई छोटी सी चीज दें, वह उससे चमत्कार कर देगा। यही जीवन की खूबसूरती है। जीवन की खूबसूरती कोई ऐसा काम करने में नहीं है, जिसे हम बड़ा मानते हैं। चाहे हम जो भी करें, वह चमत्कार हो जाना चाहिए। हमारे छूने भर से एक चमत्कार हो जाएगा, यही जीवन की खूबसूरती है। समाज जिसे बड़ा काम मानता है, उसे करना खूबसूरती नहीं है। चाहे आप बस किसी घास को छू लें, वह चमत्कार होना चाहिए, तब आपको पता चलेगा कि वह मनुष्य अपनी अधिकतम क्षमता तक विकसित हो गया है। तो बड़े होते समय फोकस क्या होना चाहिए? सिर्फ विकास, किसी और फोकस की जरूरत नहीं है।

 
 
 
 
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