वो जो मृत्यु को जीते हैं

इस नवीनतम लेख में सदगुरु नव वर्ष का स्वागत करते हुए हमें पुनः स्मरण करा रहे हैं कि हमें मृत्यु के साथ, जो जीवन की एकमात्र निश्चित घटना है, कुछ ज्यादा ही निकट का संबंध रखना चाहिये। बड़े होते होते, हम मृत्यु को एक खराब चीज़ के रूप में देखते आये हैं पर सदगुरु यहाँ समझा रहे हैं कि साँस लेने और छोड़ने की तरह, हमें जीवन और मृत्यु, दोनों को ही गले लगाना चाहिये। यहाँ वे आप का मार्गदर्शन कर रहे हैं कि कैसे आप सही विकल्प चुनें और कैसे अपने अस्तित्व में चमकें ? जीवित मृत्यु के मूर्तरूप में होने से आप एक अलग संभावना की रचना करते हैं कि इस पृथ्वी पर कैसे आप अपना समय बितायें ?
 
वो जो मृत्यु को जीते हैं
 
 
 

सदगुरु : मेरी शुभकामना है कि यह नया वर्ष आप के लिये अदभुत हो!

समय का अर्थ कई लोगों के लिये कई प्रकार का होता है। कुछ लोग समय को एक बोझ की तरह ले कर घूमते हैं। एक बच्चे में और एक वयस्क में जो अंतर है - बच्चा एक भरा पूरा, उत्साही जीवन है तो वयस्क एक गंभीर जीवन है - वो अंतर समय के बोझ का ही है। समय बोझ इसलिये बन जाता है क्योंकि हम ये जानते ही नहीं कि अपनी यादों को, अपनी स्मृतियों को किस तरह रखें ? एक और वर्ष, 2019, बीत गया है - कुछ लोग इसे एक और साल की तरह देखेंगे, जिसे उन्हें अपनी पीठ पर बोझ की तरह ढोना है। पर एक साल क्या है, बस समय का एक माप ही तो है और वास्तविकता यही है कि साल पर साल बीते जा रहे हैं। एक साल बीत गया है, इसका अर्थ ये है कि अब आप को एक साल कम ढोना है। तो क्या ये आप को कुछ और हल्का नहीं बना देता है? आप नये वर्ष का उत्सव मना सकते हैं अथवा आप इस बात का उत्सव भी मना सकते हैं कि एक साल खत्म हो गया है और अपने जीवन में अब आप को एक साल कम संभालना है।

महत्वपूर्ण बात ये है कि आप यहाँ ऐसे रहें कि आप जीवन और मृत्यु का अनुभव एक ही समय पर कर रहे हैं।

मैं चाहूंगा कि आप अपने जीवन को भागीदारी की तीव्रता के संदर्भ में मापें। क्या 2019, जीवन के साथ शामिल होने का वर्ष था? अथवा, क्या ये उलझनों, जटिलताओं, झंझटों का साल था ? यही है जो आप को मापना है, क्योंकि मूल रूप से आप सिर्फ जीवन और मृत्यु, इन दो बातों से ही सम्बद्ध हैं, आप को सिर्फ इनकी ही चिंता होनी चाहिये। बाकी सब आकस्मिक है।

अंग्रेज़ी शब्द 'डेथ'(मृत्यु) एक बहुत ही नकारात्मक शब्द बन गया है। लोग समझते हैं कि मृत्यु खराब या भयंकर चीज़ है। आप जिस चीज़ को भयानक या खराब समझते हैं, उसे आप गले से नहीं लगा सकते, है कि नहीं ? आप को अपने मन में ये संदर्भ बदल देना चाहिये। आप को सही संदर्भ में जानना चाहिये कि मृत्यु क्या है ? ये कोई जीवन का विलोम, विपरीत नहीं है। जीवन जो हो रहा है, वो मृत्यु के कारण ही हो रहा है। अगर आप सही संदर्भ समझ लें तो आप दोनों को गले लगा सकते हैं।

केवल वे ही लोग जियेंगे, जो मरेंगे

इस सृष्टि के अथवा इस पृथ्वी ग्रह के इतिहास में आप बहुत कम समय के लिये जीवित होते हैं। बाकी के समय में आप मृत ही हैं। चूंकि आप बहुत लंबे समय तक मृत रहे हैं, इसीलिये आप अभी चमक रहे हैं और ये चमक इसीलिये सम्भव है क्योंकि आप पुनः एक लंबे समय के लिये मृत हो जायेंगे। 'एक बनाम दूसरा' का विचार मूर्खतापूर्ण है । मूल रूप से जीवन के सभी स्तरों पर - चाहे वो पुरुष और स्त्री हों, जीवन और मृत्यु हों, अंधकार एवं प्रकाश हों या ध्वनि तथा मौन हों - एक के बिना दूसरा सम्भव नहीं है। वे एक दूसरे के पूरक हैं, विपरीत नहीं हैं।

आप अभी थोड़े समय के लिये जीवित हैं और आप बस, इस थोड़े से समय को ही गले लगाना चाहते हैं, बाकी के समय को नहीं - ये इस तरह से काम नहीं करता। क्योंकि ये सब एक ही है। ये वो मृत्यु है जो जीवित है। महत्वपूर्ण बात ये है कि आप यहाँ ऐसे रहें कि आप जीवन और मृत्यु, दोनों का अनुभव एक ही समय पर कर रहे हैं। यही अर्थ है जीवित मृत्यु का ! आप के जीवन का मूल्य इसीलिये है क्योंकि आप मरने वाले हैं। अगर आप कभी मरने वाले न हों तो क्या आप इस जीवन की ओर ध्यान देंगे? जियेंगे सिर्फ वही जो मरने वाले हैं।

अगर मौका लगे तो किसी के अंतिम संस्कार में शामिल हों। भारत में यह संस्कृति है, परंपरा है कि अगर आप किसी मृत शरीर को अंतिम संस्कार के लिये ले जाते हुए देखें तो उस के साथ कम से कम तीन कदम चलें, जिसका प्रतीकात्मक अर्थ है, "मैं आप के साथ हूँ"। ये मृत व्यक्ति के सम्मान के लिये है और उन लोगों के साथ होने के लिये जो उस मृत व्यक्ति के निकट के हैं और जीवित हैं।

योग का अर्थ है मिलन, एक होना – कि आप में जीवन और मृत्यु एक हो गये हैं

मृत्यु का कोई विकल्प नहीं है - ये एक अवश्यम्भावी घटना है, जो हो कर ही रहेगी। ये सृष्टि की इच्छा ही है ! जीवन हमारा चयन है। अगर आप इस चयन का अच्छी तरह अनुभव करना चाहते हैं तो ये बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आप जीवन के सभी आयामों को एक ही रूप में लें। आप यदि सिर्फ इस चमक को स्वीकार करते हैं और उसको नहीं जिसने आप को बनाया, जो आप का मूल है, तो फिर आप के पास कोई विकल्प, कोई चयन नहीं है। आप एक मजबूरी वश, अनिवार्यता के रूप में काम करने वाली शक्ति बन कर रह जायेंगे। फिर आप जीवन को भी मृत्यु की तरह से जियेंगे- एक टाली न जा सकने वाली रीति से, जागरूकता के साथ नहीं, कोई चयन करते हुए नहीं। तो अपने विकल्पों का सही चुनाव कर सकने के लिये आप को सर्व समावेशी होना होगा - जैसे आप ज़िंदगी को गले लगाते हैं वैसे ही मृत्यु को भी गले लगाना होगा। आप को सभी चीज़ों को गले लगाना होगा योग का यही लक्ष्य है, यही उद्देश्य है - हर समय, जीवन और मृत्यु का एक ही साँस में होना। योग का अर्थ है मिलन, एक होना - कि जीवन और मृत्यु आप में एक हो गये हैं।

जब आप एक जीवित मृत्यु हो जाते हैं तो इसका परिणाम एक अद्भुत जीवन होता है। क्या मिट्टी की उपेक्षा कर के कोई वृक्ष विकसित हो सकता है?

अगर आप वास्तव में जीवित रहना चाहते हैं, उस प्रकार से जीवित रहना जो आप तय करें कि वो आप के अस्तित्व का मूल स्वभाव है, तो ये महत्वपूर्ण हो जाता है कि आप एक जीवित मृत्यु हों, कि आपने सारे जीवन को पूर्ण रूप में लिया है। अगर आप उन्हें अलग अलग कर देते हैं तो आप के पास विकल्पों का चयन करने की कोई शक्ति नहीं है क्योंकि आप के पास खड़े होने के लिये कोई मंच नहीं है। चिरमृत्यु के मंच के बिना, आप के रूप में ये जो जीवन की चमक है, उसकी कोई संभावना ही नहीं है।

सिर्फ जागरूकतापूर्वक मृत्यु को गले लगाने से आप के जीवित होने का ढंग अतुल्य, अनमोल होगा और आप के जीवन को भव्य अस्तित्व बनायेगा, इसलिये नहीं कि आप क्या काम करते हैं बल्कि इसलिये कि आप के रहने का तरीका अद्भुत है। जिस तरीके से आप अपने आप में रहते हैं, वह ही भव्य हो सकता है।

मेरी शुभकामना है कि ये नया वर्ष 2020 आप सभी के लिये एक भव्य अनुभव बने।

प्रेम एवं आशीर्वाद!!

Love & Grace