प्रश्नकर्ता: अनादि काल से, पवित्र दिनों पर उपवास करने की परंपरा भारत में चली आ रही है। पर बहुत से भारतीय इसे अवैज्ञानिक एवं विसंगत मानते हैं। अब, उपवास के कारण शरीर के स्वपोषण पर किये गये काम को नोबल पुरस्कार मिला है। समय समय पर उपवास के बारे में आप का क्या कहना है?

सदगुरु: मैं इसके बारे में 40 साल से बात कर रहा हूँ, और मैंने ऐसे सैकड़ों, हज़ारों लोगों को देखा है जो हर समय, पहले से ही भरे हुए पेट में कुछ न कुछ डालने की आदत से बच कर, स्वस्थ एवं चुस्त दुरुस्त रहते हैं। ईशा योग सेंटर में हर कोई सुबह 10 बजे खाता है, और फिर शाम को 7 बजे खाता है। हम सब अपने जीवन में शारीरिक रूप से अत्यंत सक्रिय हैं। आश्रम का स्थान बहुत बड़ा है और यहाँ कोई ऑटो वाहन नहीं हैं, अतः हर व्यक्ति चलता है या साइकिलिंग करता है। भोजन कक्ष की ओर जाने के लिये भी 1 किमी चलना पड़ता है और अपनी काम की जगह जाने के लिये भी आधे से एक किमी तक चलना पड़ता है। अतः, लोग सारे समय शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं। शाम के साढ़े तीन से चार बजे तक हर किसी को बहुत भूख लग जाती है, पर हम इसके साथ रहना सीख लेते हैं क्योंकि खाली पेट रहना अच्छा है।

समय समय पर उपवास के लाभ

समय समय पर उपवास एक नया नाम है। हमने यौगिक विज्ञान में जो अनुभव से जाना है, आधुनिक विज्ञान भी आज उसे स्वीकार कर रहा है। आप का शरीर और मस्तिष्क तभी सबसे अच्छा काम करते हैं, जब आप का पेट खाली हो। हम हमेशा सुनिश्चित करते हैं कि इस तरह से खायें कि हम चाहे कितना भी खा लें, हमारा पेट दो से ढाई घंटों में खाली हो जाना चाहिये। शरीर में जो शुद्धिकरण और सुधार होना है, उसके लिये आप के पेट का खाली होना ज़रूरी है। ये बहुत महत्वपूर्ण है अन्यथा कोशिकाओं के स्तर पर शुद्धिकरण नहीं होगा। आप गलत चीजें बढ़ा लेंगे और फिर आपको समस्याएँ होने लगेंगी। पहली बात ये है कि आप के शरीर में जड़ता बढ़ेगी। जड़ता के कई स्तर हैं, पर एक चीज़ जिसे आप को ध्यान में रखना चाहिये, वह है नींद। आप जितनी नींद लेते हैं, वो जड़ता ही है।

आप का शरीर और आप का मस्तिष्क सबसे अच्छा काम तभी करते हैं, जब आप का पेट खाली हो!

सभी अमेरिकन डॉक्टर कहते हैं कि प्रतिदिन आप को कम से कम 7 से 8 घंटे सोना चाहिये। इसका अर्थ यह है कि आप के जीवन का एक तिहाई भाग आप सोने में ही बितायेंगे। अन्य 3 से 4 घंटे शौचालय, स्नान, खाने पीने आदि में निकल जाते हैं। तो आप के जीवन का लगभग 50% भाग सिर्फ रख-रखाव में ही निकल जाता है। मान लीजिये, आप के पास एक मोटरसाइकिल या कार है। अगर महीने में एक दिन ये रखरखाव के लिये गैरेज जाती है तो इसे रखना ठीक है। पर अगर ये महीने में 15 दिन गैरेज में रहे तो आप के लिये ये बस एक झंझट है, है कि नहीं? अधिकतर लोगों ने अपनी शारीरिक व्यवस्था को बस एक झंझट बना लिया है। उनके जीवन में उनका शरीर ही सबसे बड़ी बाधा है। उनका शरीर उन्हें वो नहीं करने देता जो वे करना चाहते हैं।

Subscribe

Get weekly updates on the latest blogs via newsletters right in your mailbox.
No Spam. Cancel Anytime.

इसके कई पहलू हैं पर एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लोगों को जितना खाना चाहिये, उससे वे बहुत ज्यादा खा रहे हैं, बस इसलिये कि उन्हें यह बताया गया है, "तुम्हें ज्यादा खाना चाहिये नहीं तो तुम कमज़ोर हो जाओगे"! आजकल, हर कोई ऐसी कार चाहता है जो ईंधन के मामले में कुशल हो। इसका अर्थ ये है कि अगर मशीन सही ढंग से चल रही है तो वह कम ईंधन पर चलेगी। अगर आप यहाँ बैठे हैं और आराम से हैं तो आप को कम ईंधन लगेगा, आप कम खायेंगे। यदि आप आराम में नहीं हैं तो फिर आप का शरीर ज्यादा ईंधन उपयोग में लेगा, ये आप को ज्यादा खाने के लिये कहेगा और आप मजबूरीवश खाएँगे।

समय समय पर उपवास योजना

यदि आप 30 साल के हैं तो दिन में दो बार अच्छा भोजन आप के लिये काफी है - एक सुबह में और एक शाम को। शाम के खाने के बाद, सोने के समय तक, तीन घंटे का अंतराल होना चाहिये। अगर इसमें 20 से 30 मिनिट की हल्की शारीरिक गतिविधि हो - जैसे बस चलना - तो आप का शरीर अधिकतर स्वस्थ रहेगा।

आप के शरीर में हरेक कोशिका इस तरह से बनायी गयी है, जिससे आप का स्वास्थ्य अच्छा बने। वे सभी आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिये कड़ी मेहनत करती हैं, आप के सिवा।

योग में एक भोजन और दूसरे के बीच कम से कम 8 घंटे का अंतर रखने की सलाह दी जाती है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप की स्वास्थ्य संबंधी समस्यायें 6 सप्ताहों के अंदर, कम से कम 50% दूर हो जायेंगी। अगर आप कुछ यौगिक क्रियायें भी करें - जैसे ध्यानस्थ होना - तो आप देखेंगे कि आप की 90% समस्यायें चली जायेंगी। यदि 10% रह जाती हैं तो हम उनका इलाज कर सकते हैं।

आप को देखना चाहिये कि अमेरिका में लोग हमारे कार्यक्रमों में कैसे आते हैं! हमारे कार्यक्रम 10 से 12 घंटे चलते हैं तो वे अपने साथ कुछ बिस्किट या अन्य वस्तुएं ले आते हैं। वे कहते हैं, "मुझे शुगर की समस्या है, मेरे लिये खाना ज़रूरी है"। मैं उनसे कहता हूँ, "आप बस यहाँ रहिये, आप मर नहीं जायेंगे"। मैं यह सुनिश्चित करता हूँ कि मेरे कारण, मेरे यहाँ, किसी की मौत नहीं होनी चाहिये। पहले दिन वे कहते हैं, "नहीं, नहीं, मुझे खाना ही होगा"। तीसरे दिन तक वे सब कुछ छोड़ देते हैं और बिना भोजन के 12 घंटे बैठते हैं फिर भी वे बिल्कुल अच्छे रहते हैं।

स्वास्थ्य कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आप बाहर से कर सकते हैं। स्वास्थ्य वह चीज़ है, जो आप को अंदर से लाना चाहिये। अगर कुछ गड़बड़ हो जाये तो आप बाहर से मदद ले सकते हैं पर यदि हर समय आप के साथ कुछ गलत हो रहा है, तो इसका अर्थ यही है कि आप एक गड़बड़ मशीन हैं। अब स्वास्थ्य व्यवस्थायें ऐसी हो गयी हैं - विशेष रुप से जहाँ बड़ी बड़ी बीमा पॉलिसियाँ हैं - लोग हर तरह की कचरा चीजें खा रहे हैं और फिर वे डॉक्टर के पास जाते हैं और कहते हैं, "मुझे ठीक करो"! ये बस ऐसे ही चल रहा है। आप के शरीर में हरेक कोशिका इस तरह से बनायी गयी है जिससे आप का स्वास्थ्य अच्छा बने। वे सभी आप के अच्छे स्वास्थ्य के लिये कड़ी मेहनत करती हैं, आप के सिवा।

Editor’s Note: Click here to read about the usefulness of Amla or Indian gooseberry while fasting.