जीवन डगर को कैसे बनाएं आसान?

जहां तक हो सके हम रेगमाल सरीखे लोगों से बचते हैं, लेकिन कभी-कभी हमें उनके साथ भी काम करना पड़ता है। इसके लिए आपको तरकीब की जरूरत होती है।
 
 

निमित्त: सद्‌गुरु, मैं जो भी काम करता हूं, उसमें मुझे बहुत सारे विरोध का सामना करना पड़ता है, जबकि मेरे आसपास के लोग उसी स्थिति में बड़ी सहजता से आगे निकल जाते हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं?

सद्‌गुरु: मैं बड़े पैमाने पर रोज दुनिया में यह होते हुए देख रहा हूं। हमारे आश्रम के लोगों और बहुत सारे दूसरों लोगों के साथ ऐसा होता है कि वे करते कुछ हैं, जबकि करना कुछ और होता है। और फिर वह काम नहीं हो पाता। ऐसा थोड़े बहुत लोगों के साथ नहीं, बल्कि एक बड़ी संख्या में लोगों के साथ होता है। अब काम पूरा नहीं हुआ तो इंसान की शुरुआती प्रवृत्ति होती है - ‘उसके कारण ऐसा नहीं हुआ’ या ‘इसकी वजह से ऐसा नहीं हुआ।’ हालांकि हमने बड़े पैमाने पर अपने लोगों में यह सुधार किया है कि कुछ गलत होने पर वे किसी दूसरे पर उंगली न उठाएं। आप देखेंगे कि बहुत सारे लोग काम न होने पर अब परालौकिक कारणों को जिम्मेदार ठहराते हैं। कई बार वह मुझ पर आरोप लगाते हैं, ‘सद्‌गुरु आपकी कृपा काम नहीं कर रही।’

 

सरल चीज़ों को जटिल न बनाएँ

यह समझना चाहिए कि अगर कोई चीज काम नहीं कर रही तो जाहिर सी बात है कि उस काम को ठीक ढंग से नहीं किया गया होगा। हो सकता है कि उस काम के ठीक से न हो पाने की वजह फिलहाल आप नहीं समझ पा रहे हों - यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। लेकिन लोग काम न होने पर इसके लिए गूढ़ शक्तियों की तरफ देखने लगते हैं। बहुत सारे लोगों के लिए मिस्टिसिज़म यानी रहस्यवाद का मतलब है - अपने जीवन की सरल और सहज चीजों को जटिल बना देना। जबकि वास्तव में रहस्यवाद का मतलब है कि ऐसी सारी रहस्यवादी चीजें, जिन्हें आप अपनी पांचों इंद्रियों के जरिए महसूस नहीं कर सकते या फिर आप अपने बुनियादी तर्क से उन तक नहीं पहुंच सकते, उन्हें ठीक-ठाक तार्किक तरीके से उपलब्ध कराना ही रहस्यवाद है। सरल चीजों को और गूढ़ बना देना किसी भी तरह का रहस्यवाद नहीं है। तो आपको यह जानने की जरूरत है कि अगर आप जो भी काम करते हैं, उसमें समस्या आती है, तो जाहिर सी बात है कि आप एक सैंडपेपर यानी रेगमाल की तरह हैं। आप जानते हैं न कि सैंडपेपर क्या होता है?

मान लीजिए कि आपके बदन पर त्वचा नहीं है तो फिर आप कैसे चलेंगे? इतना संभल कर चलेंगे कि किसी पक्षी का एक छोटा सा पंख भी आपको न छू दे, क्योंकि तब आपको हर चीज चोट पहुंचाएगी।

जब भी आपका किसी से टकराव हो, आप सैंडपेपर से अपनी त्वचा को कहीं घिस लें। ऐसे में अगर आप जल्दी ही अपने को नहीं सुधारते, तो फिर एक समय के बाद आपके शरीर में कहीं त्वचा बचेगी ही नहीं। जब आपके बदन पर त्वचा नहीं रहेगी, तो फिर आप किसी चीज से नहीं उलझेंगे। मान लीजिए कि आपके बदन पर त्वचा नहीं है तो फिर आप कैसे चलेंगे? इतना संभल कर चलेंगे कि किसी पक्षी का एक छोटा सा पंख भी आपको न छू दे, क्योंकि तब आपको हर चीज चोट पहुंचाएगी।

 

बिना किसी घर्षण के जियें

घर्षण को कम करने के लिए एक आसान सी चीज आप कर सकते हैं, जो मैं कई बार पहले भी बता चुका हूं, लेकिन आप लोग इस पर ध्यान नहीं देते। यह आसान सी चीज है कि आप पूरे एक दिन में, एक घंटे में या एक मिनट में जो कुछ भी बोलते हैं, उसे पचास प्रतिशत तक कम कर दें। आप देखेंगे आपकी समस्याएं कम हो जाएंगी। उसकी वजह सिर्फ इतनी है कि अब आप उतनी बक-बक नहीं करते। और हम लोग लगातार आपको समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि आप जो कुछ भी देखें, चाहे स्त्री हो या पुरुष, गाय हो या गधा आप हर एक को नमस्कार करें। आप अपने भीतर यह बदलाव सिर्फ दिखाने के लिए न लाएं, बल्कि सही मायने में एक गधे के सामने भी झुकना सीखें।

घर्षण को कम करने के लिए एक आसान सी चीज आप कर सकते हैं। यह आसान सी चीज है कि आप पूरे एक दिन में, एक घंटे में या एक मिनट में जो कुछ भी बोलते हैं, उसे पचास प्रतिशत तक कम कर दें। आप देखेंगे आपकी समस्याएं कम हो जाएंगी।

घर्षण भी दो तरह के होते हैं। एक घर्षण तो हमारे भीतर होता है, जबकि बाहरी घर्षण उस भीतरी घर्षण का नतीजा है। इनर इंजीनियरिंग की सारी प्रक्रिया इसी बारे में है कि अगर आप कहीं बैठें तो आपका वह बैठना बिना किसी घर्षण के हो। अगर आप सहज भाव से बिना किसी घर्षण के बैठ सकते हैं, तो धीरे-धीरे बाहरी घर्षण भी कम होने लगेंगे। लेकिन जब आप का सामना किसी सैंडपेपर से होता है तो वहां घर्षण होना स्वाभाविक है। इसलिए आमतौर पर जहां तक हो सके हम सैंडपेपर सरीखे लोगों से बचते हैं, लेकिन कभी-कभी हमें उनके साथ भी काम करना पड़ता है।

 

 

जब आपको सैंडपेपर जैसे लोगों के साथ काम करना पड़ता है तो इसके लिए आपको तरकीब की जरूरत होती है। तरकीब ऐसी चीज है, जिसे आपको सीखना पड़ता है, यह अपने आप नहीं आती। तरकीब कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसका कोई आध्यात्मिक पहलू हो, यह तरकीब समाज में सीखने को मिलती है। कभी-कभी यह काम नहीं भी करती, लेकिन तरकीब का मामला कौशल से जुड़ा होता है। जो लोग किसी भी तरह से आध्यात्मिकता से नहीं जुड़े हुए हैं, वे लोग सैंडपेपर जैसे लोगों से निबटना काफी अच्छी तरह से जानते हैं। आप ऐसे लोगों को सरकारी या राजनैतिक गलियारे में देख सकते हैं। ये लोग बेहद मीठे स्वभाव के होते हैं। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाला कितना रूखे स्वभाव का है, ये लोग अपने कौशल से अपना काम निकालते हैं और चलते बनते हैं। इसलिए सैंडपेपर जैसे लोगों के साथ काम करने में थोड़े-बहुत कौशल और अनुभव की जरूरत होती है।

 

 
 
 
 
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