विवाह को लेकर अकसर दो तरह के विचार सामने आते हैं- कुछ लोग तो प्रेम विवाह को ज्यादा सफल और उचित मानते हैं, वहीं कुछ लोग तयशुदा शादियों को अधिक सफल मानते हैं। आइए जानते हैं सद्‌गुरु की राय:

सद्‌गुरु:

सवाल ये नहीं है कि आप किस तरह से शादी करते हैं। सवाल यह है कि आप अपनी शादी-शुदा जिंदगी को चलाते कैसे हैं और कितनी अच्छी तरह से अपने जीवन-साथी के साथ रहते हैं। और ये बात इस पर निर्भर नहीं करता कि आप कैसे या कहां शादी करते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि शादी के बंधन में बंधने वाले दो लोग कितनी समझदारी से रहते हैं।

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शादी के बारे में अधिक परवाह किए बिना, हमें सदा यह चिंता करनी चाहिए कि अपने आप को एक खूबसूरत इंसान में कैसे बदलें जिससे कि अपने सामने आने वाली हर स्थिति को हम खूबसूरत बना सकें।

आपको यह कहा गया होगा कि शादियां स्वर्ग में तय होती हैं। आपको इसलिए ऐसा कहा गया क्योंकि अधिकतर लोग अपनी शादी को नर्क बना देते थे। आपको यह समझना चाहिए कि अगर आप स्वर्ग हैं, तो आप अपनी शादी सहित जो कुछ भी करते हैं, वह स्वर्ग होगा। अगर आप नर्क हैं, तो अपनी शादी सहित जो कुछ भी करते हैं, वह नर्क होगा। इसलिए शादी के बारे में अधिक परवाह किए बिना, हमें सदा यह चिंता करनी चाहिए कि अपने आप को एक खूबसूरत इंसान में कैसे बदलें जिससे कि अपने सामने आने वाली हर स्थिति को हम खूबसूरत बना सकें।

हम जीवन के जड़ पर ध्यान न देकर हमेशा छोटी-छोटी डालियों पर ध्यान देते हैं। हम सिर्फ फल के अंदर रसायनों का इंजेक्शधन लगाकर उसे तेजी से बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वह अधिक समय तक नहीं टिकेगा। वह भले ही आज एक फल दे दे, लेकिन कल वह फलहीन होगा। लेकिन अगर आप जड़ का पोषण करें, तो उसमें पूरी जिंदगी फल लगेंगे।