बड़े लक्ष्य की खातिर राधे से दूर हुए कृष्ण
अकसर सवाल उठाया जाता है कि जब कृष्ण राधे और गोपियों से इतना प्रेम करते थे, तो वे उनसे दूर क्यों चले गए। कृष्ण के इस कदम के पीछे क्या वजह थी, आइए जानते हैं, सद्‌गुरु से:
 
 

अकसर सवाल उठाया जाता है कि जब कृष्ण राधे और गोपियों से इतना प्रेम करते थे, तो वे उनसे दूर क्यों चले गए। कृष्ण के इस कदम के पीछे क्या वजह थी, आइए जानते हैं, सद्‌गुरु से:

सद्‌गुरु, एक बार वृंदावन से जाने के बाद कृष्ण ने गोपियों की ओर कभी मुडक़र नहीं देखा। क्या यह ठीक था ?

सद्‌गुरु:

कृष्ण के जीवन में एक ऐसा मोड़ आया था, जब उन्हें इस बात की याद दिलाई गई कि वह असल में कौन हैं।

कृष्ण के द्वारका चले जाने के बाद क्या राधे का विवाह हुआ था ? सद्‌गुरु: देखिए, राधे कृष्ण से प्रेम करती थी, यह बात सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनका विवाह हुआ या नहीं, इसका कोई महत्व नहीं है।
इस बात का अनुभव करने के बाद उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई। अचानक उनके जीवन का एक नया उद्देश्य और मिशन बन गया और वह इसे पूरा करने में जुट गए।
लोगों ने उन्हें कई बार याद दिलाया, ’गोपियों से दूर चले आना और उनसे एक बार भी मिलने न जाना क्या सही है? नदी के उस पार ही तो वे रहती हैं। आप उनसे मिलने क्यों नहीं जाते?’

गोपियों की स्मृति का कृष्ण ही उनका जीवन था

कृष्ण ने कहा, ’मैं उस चीज को खराब नहीं करना चाहता जो उनकी नजरों में बेहद खूबसूरत है। उन्होंने मुझे नंद के पुत्र गोपाल के रूप में देखा है, वे मुझे मस्ती और आनंद से भरपूर एक किशोर के तौर पर जानती हैं। उन्होंने मेरी बांसुरी का आनंद लिया है। उन्होंने मेरे साथ मेरी ताल पर नृत्य किया है। वे सब मुझे उसी रूप में जानती हैं। अब मैं कुछ और हो चुका हूं और समाज में एक नई व्यवस्था और धर्म की स्थापना के मकसद से काम कर रहा हूं। अगर मैं उनके पास इस रूप में लौटकर गया तो उनकी यादों में बसा मेरा वह रूप नष्ट हो जाएगा, जिसके बारे में सोचकर ही वे आनंदित हो जाती हैं। आज कृष्ण को याद करने में ही उन्हें खुशी मिलती है, क्योंकि उनकी यादें ही उनके लिए जीता जागता कृष्ण हैं। वे अब भी मेरे भीतर रहती हैं और मैं उनके भीतर। मैं इस पूरे अनुभव को खराब नहीं करना चाहता। मैं उनके पास जाकर उन्हें धर्म के जटिल मसलों के बारे में नहीं बताना चाहता। वे जैसी भी हैं, ठीक हैं। उन्होंने खुद को पूरी तरह से मुझे सौंप दिया है। अपनी सादगी में उन्होंने तमाम बंधनों को पार कर लिया है। उनके पास जाकर अब मैं मसले को और ज्यादा जटिल नहीं बनाना चाहता।’
लोगों ने कृष्ण से यहां तक कहा, ’कहीं आपका प्यार बनावटी तो नहीं था? जब आप उनसे वाकई प्रेम करते थे और वे आपसे, फिर आप उनसे मिलने क्यों नहीं जाते?’ कृष्ण कहते, ’उनके पास वापस जाने का तो सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि मैंने उन्हें कभी छोड़ा ही नहीं। जिस गोपाल को वह जानती थीं, मैंने उसे उनके लिए वहीं छोड़ दिया है। यह कृष्ण उस गोपाल से बिल्कुल अलग है, इसलिए इसे वहां नहीं जाना चाहिए।’


कृष्ण के द्वारका चले जाने के बाद क्या राधे का विवाह हुआ था ?

सद्‌गुरु:

देखिए, राधे कृष्ण से प्रेम करती थी, यह बात सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनका विवाह हुआ या नहीं, इसका कोई महत्व नहीं है।

जिस गोपाल को वह जानती थीं, मैंने उसे उनके लिए वहीं छोड़ दिया है। यह कृष्ण उस गोपाल से बिल्कुल अलग है, इसलिए इसे वहां नहीं जाना चाहिए।’
क्या राधे ने खाना खाया? क्या उनके संतान हुई? हो सकता है, हुई हो, हो सकता है न भी हुई हो। इससे क्या फर्क पड़ता है? राधे का महत्व इस बात के चलते है कि उन्होंने कृष्ण से प्रेम किया। वह इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वह कृष्ण का ही एक रूप बन गई थीं, उनका मूर्त रूप हो गई थीं। इसलिए नहीं कि उन्होंने भोजन किया, विवाह किया या संतान पैदा की। ये सब काम तो हर कोई करता है। इससे जीवन में कोई अंतर नहीं पड़ता। हमारी यह जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है कि 3500 साल पहले किसी ने विवाह किया या नहीं, भोजन किया या नहीं। हां, अगर किसी ने मानवीय सीमाओं से परे जाकर कोई काम किया तो हम उसे याद रखना चाहेंगे। राधे ने इतना खूबसूरत और अनूठा काम किया था, जिसके चलते हम उन्हें कभी नहीं भूलना चाहेंगे।

आगे जारी ...

 
 
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