सद्‌गुरुसद्‌गुरु हमें बता रहें हैं कि कामयाबी के लिए हमें अपने शरीर और मन की क्षमताओं का लाभ उठाना आना चाहिए। वे कामयाबी के एक और पहलू  - स्पष्टता के बारे में बता रहे हैं। साथ ही आप  इस ब्लॉग में एक सरल योग अभ्यास सीख सकते हैं

अंतर्दृष्टि, प्रेरणा और ईमानदारी की जरुरत है

दुनिया में कामयाब होने के लिए दो मूल गुण ये हैं कि आपको अपने मन और अपने शरीर की क्षमता का लाभ उठाना आना चाहिए। अगर आप मन का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो सबसे अहम गुण यह है कि आपके अंदर संतुलन या समभाव होना चाहिए।

अंतर्दृष्टि का मतलब है कि आप अपने आस-पास के जीवन पर इस तरह ध्यान देते हैं कि आप ऐसी चीजों को देख पाते हैं जिसे ज्यादातर लोग नहीं देख सकते।
अगर संतुलन नहीं होगा, तो मन की असंतुलित अवस्था में उसका इस्तेमाल करने की आपकी काबिलियत बहुत ही कम हो जाएगी। एक और आयाम यह है कि अपनी ऊर्जा के स्तर पर, शारीरिक तौर पर भी और अंदरूनी तौर पर भी आपको आनंदित या उल्लासित होना चाहिए। जब आपकी ऊर्जा आपके भीतर पूरी तरह उल्लासित अवस्था में होती है, तभी आपके अंदर कामयाबी की राह में आने वाली तमाम बाधाओं को पार पाने की काबिलियत आती है। जब आप संतुलित और प्रफुल्लित होते हैं, तो कामयाबी बहुत आसानी से आपके पास आ जाती है।

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लेकिन इसके आगे कामयाब होने के लिए, अंतर्दृष्टि, प्रेरणा और ईमानदारी की जरूरत है। अंतर्दृष्टि का मतलब है कि आप अपने आस-पास के जीवन पर इस तरह ध्यान देते हैं कि आप ऐसी चीजों को देख पाते हैं जिसे ज्यादातर लोग नहीं देख सकते। दूसरा आयाम है लगातार प्रेरित होना। इसलिए यह देखना बहुत अहम है कि आप जो कर रहे हैं, उसे क्यों कर रहे हैं। और ईमानदारी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जब आप इस दुनिया में काम करना चाहते हैं, तो रोजाना जिन लोगों से आपका पाला पड़ता है, उनमें आपने कितना भरोसा पैदा किया है, इससे तय होता है कि आपकी रोजाना की कोशिशें कितनी आसान या कितनी मुश्किल होगी। अगर भरोसे का माहौल होगा, तो काम करने की आपकी काबिलियत बहुत बढ़ जाएगी।

एक अभ्‍यास कामयाबी के लिए

कामयाबी का एक अहम पहलू

कामयाबी का एक अहम पहलू है, स्पष्टता। हम स्पष्टता कैसे लाते हैं?

इसके लिए आप एक प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। रोजाना कम से कम पांच मिनट तक, दिन में दो से तीन बार, जब भी आपको सुविधा हो, चलते समय अपने कदम को नापें।
अपने मन में स्पष्टता लाने का एक सरल तरीका है अपनी गतिविधियों को सटीक बनाना। अपनी शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की गतिविधियों को सटीक बनाना। आप कैसे बैठते हैं, कैसे खड़े होते हैं, किस तरह सांस लेते हैं, हरेक शब्द जिसका उच्चारण करते हैं, अपने आस-पास की रोशनी और ध्वनि, हर बारे में स्पष्ट होना। इसके लिए आप एक प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। रोजाना कम से कम पांच मिनट तक, दिन में दो से तीन बार, जब भी आपको सुविधा हो, चलते समय अपने कदम को नापें। देखिए कि एक मिनट में आप कितने कदम चलते हैं। वाकई एक, दो, तीन, चार गिने बिना बस देखिए कि एक मिनट में आप कितने कदम चलते हैं। एक मिनट में कितनी बार सांस लेते हैं और सिर्फ रोशनी का झुकाव देखते हुए सजग हों कि आप किस तरह की परछाईं बना रहे हैं। साथ ही अपने आस-पास होने वाली छोटी-बड़ी तमाम तरह की ध्वनियों पर ध्यान दीजिए।

सावधान: तनाव सफलता में बाधक हो सकता

तनाव जीवन का एक ऐसा पहलू है जो बहुत सारे लोगों की जिंदगियों में कड़वाहट पैदा कर रहा है। तनाव मुख्य रूप से अपने शरीर को संभालने में आपकी असमर्थता है, यानी आपके शरीर में सहज और सरल तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त तेल या ल्यूब्रिकेशन नहीं है, इसलिए घर्षण हाता है। तनाव किसी मशीन में रगड़ की तरह है। जीवन के हालात हर किसी के लिए होते हैं मगर हर कोई उसे अलग तरीके से संभालता है जो इस पर निर्भर करता है कि उसका तंत्र उसके अंदर कितने आराम से काम करता है। अगर आप जानते हैं कि इस इंसानी शरीर को कैसे संभालना है तो तनाव का सवाल ही नहीं उठता।

अगर आपको लगता है कि जो काम आप कर रहे हैं, वह अहम है तो सबसे पहले आपको अपने ऊपर मेहनत करनी होगी क्योंकि दुनिया में आप कितने कामयाब हैं, यह मुख्य रूप से इस पर निर्भर करता है कि यह तंत्र कितना सहज और रगड़ से मुक्त है।

आप सरल अभ्यासों से अपने शरीर को घर्षण मुक्‍त कर सकते हैं। योग विज्ञान में इसके लिए कई तरह के अभ्‍यास हैं।