अनादि: एक आंसूओं से भरा समापन

2010 की गर्मियों में सद्‌गुरु ने अमेरिका के ईशा इंस्टीट्यूट ऑफ इनर साइंसेज में करीब 200 प्रतिभागियों के लिए 3 महीने का कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का नाम अनादि रखा गया, जिसका अर्थ है, आरंभ से रहित।
 
 

सद्‌गुरु: पश्चिमी एशिया के कुछ अद्भुत दृश्यों, गंध और स्वाद से गुजरने के बाद, मैं यहाँ तीन ‘आईज़’ - ईशा इंस्टीट्यूट ऑफ़ इनर सांइसिज़ - में हूँ। यहाँ हम कुछ जबरदस्त आध्यात्मिक परिस्थितियों के बीच हैं। हम लोग ‘अनादि (द बिगनिंगलैस)’ के लिए आए हुए हैं, यह ऊंचे स्तर के साधकों के लिए नब्बे दिन का रिट्रीट(आवासीय कार्यक्रम) है। अनादि के माध्यम से लोगों को साधना और खोज के एक बिलकुल नए स्तर से परिचित करवाया जाएगा। पाँच सौ आवेदकों(एप्लीकेशन) में से हमने केवल दो सौ सहभागियों(पार्टिसिपेंट) को ही इसके लिए आमंत्रित किया है।

यह शारीरिक और मानसिक तौर पर काफी गंभीर रहेगा। सबसे पहले, यह कठोर अनुशासन की माँग करता है। इस तरह की साधना और खोज, शायद संसार के इस हिस्से में अब तक नहीं हुई है - जहाँ तक मेरी जानकारी है। अमेरिकी साधक जिस उत्साह से इसे करने के लिए एकत्र हुए हैं, वह देख कर अच्छा लग रहा है; मुझे पूरा यकीन है कि उनमें से प्रत्येक को यहाँ आने के लिए, अपने जीवन में ऐसा कुछ न कुछ अवश्य छोड़ना पड़ा होगा, जिसे वे बहुत मोल देते आए हैं। आशा तो यही है कि उच्च क्षमता, चरित्र, वचनबद्धता(कमिटमेंट) तथा स्पष्टता लिए हुए आध्यात्मिक तौर पर गहन(गहरे) साधक तैयार किए जा सकें। इसके साथ ही, हम चार सौ सहभागियों के लिए सम्यमा कार्यक्रम भी करने जा रहे हैं - जिसमें पच्चीस से अधिक स्वयंसेवक अपनी सेवाएँ देंगे। इन कामों को देख कर ही लगता है कि ये सचमुच कितने दिल से किए जा रहे हैं।

यह उनका सौभाग्य है कि बुद्ध पूर्णिमा सम्यमा के दौरान आ रही है - पूर्ण चंद्रमा का वह दिन, जब गौतम आत्म ज्ञान को प्राप्त हुए और एक ऐसी आध्यात्मिक तरंग का आधार बने, जिसने मानवता पर एक अमिट छाप छोड़ी।