सद्गुरु

मेरे लिए यह जीवन लोगों के अनुभव और उनकी दिव्यता को व्यक्त करने में मदद करने का एक प्रयास है। आप ईश्वरीय आनंद को जान सकते हैं। -Sadhguru

लिंग भैरवी को अनुभव कैसे करें?

लिंग भैरवी को अनुभव कैसे करें सद्‌गुरु एक प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं कि किस प्रकार देवी को जीवन में एक जीवित अस्तित्व के रूप में अनुभव कर सकते हैं। सद्‌गुरु: हमने जनवरी 2010 में, भैरवी प्रतिष्ठा के साथ यह सब आरंभ किया था और उसके बाद से कभी मुड़ कर नहीं देखा। यह उत्साह और रोमांच के झूले पर झूलने जैसा अनुभव रहा और देवी ने असंख्य लोगों के जीवन को छुआ है। पहले ही चार भैरवी मंदिर बन चुके हैं और कई छोटे मंदिर भी सामने आ रहे हैं, इस तरह वे अनेक स्थानों तक अपनी पहुँच बना रही हैं। लोग ध्यानलिंग की तुलना में देवी को अधिक महसूस इसलिए कर पा रहे हैं, क्योंकि वे भौतिक रूप से प्रकट हैं। ध्यानलिंग सूक्ष्म है; इसे अनुभव करने के लिए एक निश्चित स्तर की ग्रहणशीलता चाहिए। यह एक बिल्कुल ही अलग आयाम है। देवी एक भौतिक स्वरूप हैं - वे बहुत ही सुखद हैं, परंतु वे आपके मुख पर तमाचा भी जड़ सकती हैं। हो सकता है कि आपके मुख पर पचास ऊंगलियों की छाप दिखने लगे। तो क्या देवी जाग्रत हैं? वे वास्तव में हैं। क्या वे भौतिक रूप से प्रकट हैं? बिल्कुल, जहाँ तक मेरा सम्बन्ध है, मेरे लिए और बहुत से लोगों के लिए वे एक जीवित सत्ता की तरह हैं।

Download Press Kit
अनादि: एक आंसूओं से भरा समापन

सद्‌गुरु: पश्चिमी एशिया के कुछ अद्भुत दृश्यों, गंध और स्वाद से गुजरने के बाद, मैं यहाँ तीन ‘आईज़’ - ईशा इंस्टीट्यूट ऑफ़ इनर सांइसिज़ - में हूँ। यहाँ हम कुछ जबरदस्त आध्यात्मिक परिस्थितियों के बीच हैं। हम लोग ‘अनादि (द बिगनिंगलैस)’ के लिए आए हुए हैं, यह ऊंचे स्तर के साधकों के लिए नब्बे दिन का रिट्रीट(आवासीय कार्यक्रम) है। अनादि के माध्यम से लोगों को साधना और खोज के एक बिलकुल नए स्तर से परिचित करवाया जाएगा। पाँच सौ आवेदकों(एप्लीकेशन) में से हमने केवल दो सौ सहभागियों(पार्टिसिपेंट) को ही इसके लिए आमंत्रित किया है। यह शारीरिक और मानसिक तौर पर काफी गंभीर रहेगा। सबसे पहले, यह कठोर अनुशासन की माँग करता है। इस तरह की साधना और खोज, शायद संसार के इस हिस्से में अब तक नहीं हुई है - जहाँ तक मेरी जानकारी है। अमेरिकी साधक जिस उत्साह से इसे करने के लिए एकत्र हुए हैं, वह देख कर अच्छा लग रहा है; मुझे पूरा यकीन है कि उनमें से प्रत्येक को यहाँ आने के लिए, अपने जीवन में ऐसा कुछ न कुछ अवश्य छोड़ना पड़ा होगा, जिसे वे बहुत मोल देते आए हैं। आशा तो यही है कि उच्च क्षमता, चरित्र, वचनबद्धता(कमिटमेंट) तथा स्पष्टता लिए हुए आध्यात्मिक तौर पर गहन(गहरे) साधक तैयार किए जा सकें। इसके साथ ही, हम चार सौ सहभागियों के लिए सम्यमा कार्यक्रम भी करने जा रहे हैं - जिसमें पच्चीस से अधिक स्वयंसेवक अपनी सेवाएँ देंगे। इन कामों को देख कर ही लगता है कि ये सचमुच कितने दिल से किए जा रहे हैं। यह उनका सौभाग्य है कि बुद्ध पूर्णिमा सम्यमा के दौरान आ रही है - पूर्ण चंद्रमा का वह दिन, जब गौतम आत्म ज्ञान को प्राप्त हुए और एक ऐसी आध्यात्मिक तरंग का आधार बने, जिसने मानवता पर एक अमिट छाप छोड़ी।

Download Press Kit
सद्गुरु एक योगी और एक रहस्यवादी है

  एक ऐसा आदमी जिसका जुनून हर उस चीज में होता है, जिसका वह सामना करता है। भारत के 50 सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक का नाम, सद्गुरु के काम ने अपने परिवर्तनकारी कार्यक्रमों के माध्यम से दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन को छू लिया है। सद्गुरु में प्राचीन योग विज्ञान को समकालीन दिमागों के लिए एक अद्वितीय क्षमता बनाने की क्षमता है, जो जीवन के गहन आयामों के लिए एक सेतु के रूप में कार्य करता है। उनका दृष्टिकोण किसी भी विश्वास प्रणाली के लिए नहीं है, लेकिन आत्म-परिवर्तन के लिए तरीके प्रदान करता है जो सिद्ध और शक्तिशाली दोनों हैं।

Download Press Kit
 
सद्गुरु - एक जीवन से अधिक
seperator

एक पुस्तक जो आपको अपने आध्यात्मिक आत्म का पता लगाने के लिए सशक्त बनाती है और आपके जीवन को अच्छी तरह से बदल सकती है। "मोर लाइफ़ ए लाइफ" सद्गुरु की असाधारण कहानी है - एक युवा अज्ञेय, जो योगी बने, एक जंगली मोटरसाइकलिस्ट, जो रहस्यवादी हो गए, एक संदेहवादी जो आध्यात्मिक मार्गदर्शक बन गया। उनकी उस्तरा-तीक्ष्ण बुद्धि, लचर बुद्धि और आधुनिक शब्दावली के साथ, पुस्तक आपको आत्मिक खोज करने के लिए सशक्त बनाती है और आपके जीवन को अच्छी तरह से बदल सकती है। अपने शुरुआती वर्षों में, जग्गी वासुदेव (या सद्गुरु, जैसा कि वह अब जानते हैं) एक क्रॉनिक ट्रैंट, एक उद्दाम मसखरा और बाद में मोटरबाइक्स और तेज़ कारों का प्रेमी था। यह स्पष्ट है कि इस दिन के लिए उनकी आध्यात्मिक गतिविधियों में एक ही तात्कालिकता, जुनून और जीवन शक्ति गूंजती है, ऐतिहासिक ध्यानलिंग के निर्माण से - तीन जीवन काल का मिशन - एक गुरु के रूप में उनके दृष्टिकोण तक।

सद्गुरु के दृष्टिकोण में, विश्वास और तर्क, आध्यात्मिकता और विज्ञान, पवित्र और सामग्री, को आसान द्वैत में विभाजित नहीं किया जा सकता है। वह लोगों को "आध्यात्मिक प्राणियों को रिवर्स के बजाय सामग्री के साथ दबंग" के रूप में देखता है, और जीवन के हर रूप में मौलिक लालसा के रूप में मुक्ति देता है। उनके लिए सत्य एक गंतव्य, एक निष्कर्ष, या आध्यात्मिक अटकलों के बजाय एक जीवित अनुभव है। आत्म-साक्षात्कार की संभावना, वह दृढ़ता से मानता है, सभी के लिए उपलब्ध है। सद्गुरु के साथ विस्तारित वार्तालापों को आकर्षित करते हुए, ईशा सहयोगियों और साथी ध्यानियों के साथ साक्षात्कार, कवि अरुंधति सुब्रमण्यम समकालीन रहस्यवादी और गुरु का एक स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करते हैं - एक व्यक्ति जो कई जीवनकाल की तीव्रता और रोमांच को एक ही बार में पैक करता है।