गोपाल : कृष्ण के ग्वाला होने के मर्म को समझिये

सद्‌गुरु गोपाला मंत्र जाप के अर्थ को समझाते हुए श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न आयामों को गहराई से स्पष्ट कर रहे हैं - उनका सौंदर्य, उनकी निडरता, और कैसे उन्होंने जीवन के रस का आनंद लिया।
गोपाल : कृष्ण के ग्वाला होने के मर्म को समझिये
 

गोपाला, गोपाला, गोपी वल्लभ गोपाला।
गोविंदा, गोविंदा, रास लीला गोविंदा।।

गोपाला, गोपाला, गोपी वल्लभ गोपाला ।
गोविंदा, गोविंदा, यदुकुल शूर गोविंदा।।

गोपाला, गोपाला, गोपी वल्लभ गोपाला।
गोविंदा, गोविंदा, मुरली लोला गोविंदा।।

गोपाला, गोपाला, गोपी वल्लभ गोपाला।
गोविंदा, गोविंदा, राधे मोहन गोविंदा।।

गोपाला, गोपाला, गोपी वल्लभ गोपाला।
गोविंदा, गोविंदा, श्याम सुंदर गोविंदा।।

बहुत से लोगों ने उनका उपहास किया, "अरे, वह तो मात्र एक ग्वाला है"। लेकिन उनकी यही बात अन्य लोगों के लिये एक उल्लासपूर्ण उत्सव बन गयी, "आहा, वह एक ग्वाला है"।

सदगुरु:गोपाल क्या होता है ? इसका क्या अर्थ है ? गो का अर्थ है गाय, पाल का अर्थ है वो जो गायों को संभालता है, उनकी सेवा करता है। कृष्ण को एक ग्वाले के रूप में देखा जाता है। सामान्य रूप से महान, तपस्वी योगियों को ही दिव्य माना गया है, या फिर राजाओं को, लेकिन यहाँ एक चरवाहा है..... जो सामाजिक रूप से एकदम निचले स्तर पर है। यही गोपाल हैं। वे बस एक चरवाहा हैं - लेकिन आप उन्हें अनदेखा नहीं कर सकते। पहले ही दिन से उनकी सुंदरता, बुद्धिमत्ता, शक्ति, वीरता को अनदेखा नहीं किया जा सका। एकदम छोटे शिशु के रूप में भी लोग उन्हें अनदेखा नहीं कर सके। बहुत से लोगों ने उनका उपहास किया, "अरे, वह तो मात्र एक ग्वाला है"। लेकिन उनकी यही बात अन्य लोगों के लिये एक उल्लासपूर्ण उत्सव बन गयी, "आहा, वह एक ग्वाला है"। हम जब उन्हें गोपाल कहते हैं तो हम उनको प्यार से, दुलार से संबोधित कर रहे हैं। जब हम उन्हें गोविंद कहते हैं तब हम उनकी दिव्यता के आगे नतमस्तक हो रहे हैं। एक क्षण में वे भगवान हैं, दूसरे ही क्षण में बालक हैं तो अगले क्षण में पुरुष - वे एक ही समय पर बहुत सारी चीजें हैं।

लीला का अर्थ है खेल। जीवन के गहन आयाम, अस्तित्व की परम प्रकृति खेल की भावना से भरपूर होकर अभिव्यक्त की जा सकती है। हम कह सकते हैं कि रस जीवन की मधुरता, उसका मधुर सार है। इसको अंग्रेज़ी में शायद सटीक तरीके से अनुवादित नहीं किया जा सकता। तो जब हम 'रास लीला गोविंदा' कहते हैं तो हम कह रहे हैं कि ये वो थे जो जीवन के रस के साथ खेले। उनके समुदायों के बीच वे महीने के कुछ विशेष दिनों में, या सांझ में दिन के सब कामकाज पूरे हो जाने के बाद, नृत्य के सत्र करते थे तो इन्हें रासलीला कहा जाता था। उसका अर्थ था - जीवन के रस के साथ खेलना। धीरे धीरे इसका अर्थ हो गया ऐसा स्थान जहाँ कोई क्रोध नहीं है, कोई इच्छा नहीं है, बस जीवन है। जीवन का रस चारों ओर बहता था क्योंकि वहाँ कोई क्रोध नहीं था, कोई इच्छा नहीं थी। तो ये नृत्य केवल नृत्य नहीं था, यह जीवन से परे जाने का एक अलग ही आयाम बन गया।

इस बात को कई प्रकार से समझाया गया है। देश के अलग अलग भागों में कृष्ण सम्बंधित परंपरायें कई अलग अलग प्रकारों से पनपी, क्योंकि भारत एक ऐसी भूमि है जहाँ कई प्रकार की संस्कृतियों का एक साथ अस्तित्व है। तमिलनाडु में वे इस तरह गाते हैं, "आसेयम कोपमम इल्ला नगरम" अर्थात ऐसा स्थान जहाँ कोई इच्छा या क्रोध नहीं है। जब क्रोध और इच्छा नहीं होते तो मनुष्य का कोई स्वार्थ नहीं रह जाता और वह प्रेम एवं आनंद से परिपूर्ण हो जाता है।

'राधे मोहना', अर्थात “जो राधा को प्यार करते थे”, या “वह जो राधा को मंत्रमुग्ध कर देते थे”। यह बात दोनों तरफ से कही जा सकती है - वह जो राधा से सम्मोहित है अथवा जो राधा को सम्मोहित कर देता है।

फिर हम कह रहे हैं, 'यदुकुल शूर'। कृष्ण यादवों के कुल अर्थात यदुकुल से हैं। ये राजाओं का कुल है। कुछ राजवंश सूर्य वंश के होते थे तो कुछ चंद्रवंश के। यदुकुल चंद्रवंशी थे। शूर का अर्थ है बहादुर, साहसी व्यक्ति लेकिन साथ ही ये उस जाति या वंश का नाम भी है जिसमें उनका जन्म हुआ था। उनके पिता वसुदेव शूर थे। ये दोनों तरह से प्रयुक्त हुआ है।

अगली बात जो हम कह रहे हैं वह है 'मुरली लोला', अर्थात वो जो अपनी बाँसुरी बजाना बहुत पसंद करता है। मुरली का अर्थ है “बाँसुरी”। जो अपने बाँसुरी वादन से लोगों को मुग्ध कर दे उसे मुरली लोला कहते हैं। इसके बाद है - 'राधे मोहना', अर्थात “जो राधा को प्यार करते थे”, या “वह जो राधा को मंत्रमुग्ध कर देते थे”। यह बात दोनों तरफ से है - वह जो राधा से सम्मोहित है अथवा जो राधा को सम्मोहित कर देता है।

अंतिम पंक्ति में आता है 'श्याम सुंदरा'। सुंदर का अर्थ है दिखने में अच्छा, सौन्दर्यवान। श्याम का अर्थ है “शाम”। उनकी त्वचा के रंग के कारण, कृष्ण को सांवला सुंदर भी कहते थे। वे शाम की तरह थे। जब सूर्य डूब रहा होता है तब दिन के हल्के नीले आकाश की जगह एक गहरा नीला-काला रंग ले लेता है-ऐसा उनका रंग था। तो लोग उन्हें श्याम सुंदर कहते थे।

 
 
 
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