नमस्ते या नमस्कार: क्या है इसके पीछे का विज्ञान?

नमस्ते का मतलब क्या होता है? सद्‌गुरु इस ब्लॉग में हमें हाथ जोड़कर नमस्ते करने का विज्ञान समझा रहे हैं। नमस्ते योग का सबसे सरल रूप है।
नमस्कार का अर्थ क्या है?
 

नमस्ते का मकसद

सद्गुरु: आप जब किसी को देखते हैं, चाहे वो आपके कामकाज की जगह में हो, गली -रास्ते में हो, घर में हो या और कहीं भी हो, मनुष्य की बुद्धिमत्ता का स्वभाव ही ऐसा है कि जैसे ही वो कुछ देखती है, तो एक फैसला कर लेती है -"उसमें ये ठीक है, उसमें ये ठीक नहीं है, वो अच्छा है, वो अच्छा नहीं है, वो सुंदर है, वो बदसूरत है" - ऐसी सभी तरह की बातें! आपको इसके बारे में जागरूक हो कर सोचना भी नहीं पड़ता। एक पल में ही, ये आकलन और फैसले हो जाते हैं और आपके फैसले पूरी तरह से गलत भी हो सकते हैं क्योंकि वे आपके जीवन के पिछले अनुभवों के आधार पर हैं। वे आपको किसी चीज़ का या किसी व्यक्ति का अनुभव उस आधार पर नहीं लेने देंगे जैसे वे अभी हैं, और जो वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है।

आप जैसे ही झुक कर अभिवादन करते हैं तो आपकी पसंद और नापसंद कमज़ोर पड़ जाती है, वो असरकारक नहीं रहती क्योंकि आप उसके अंदर के सृष्टिकर्ता को पहचान लेते हैं, स्वीकार कर लेते हैं।

अगर आप किसी भी क्षेत्र में असरदार ढंग से काम करना चाहते हैं, तो एक बात है और वो ये कि जब भी कोई आपके सामने आता है तो जैसे वो अभी है, वैसे ही उसको समझना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। वो कल कैसा था, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इस पल में वो कैसा है, यही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। तो पहली चीज़ जो आपको करनी है, वो ये है कि आप सिर झुकायें। आप जैसे ही झुक कर अभिवादन करते हैं तो आपकी पसंद और नापसंद कमज़ोर पड़ जाती है, वो असरकारक नहीं रहती क्योंकि आप उसके अंदर के सृष्टिकर्ता को पहचान लेते हैं, स्वीकार कर लेते हैं। नमस्कार या नमस्ते करने का यही मकसद है।

सृष्टिकर्ता का हाथ

सृष्टि का ऐसा कोई भी कण नहीं है जो सृष्टिकर्ता की मर्जी के बिना, उसका हाथ लगे बिना, चल सके। हर परमाणु और कोशिका में सृष्टि का स्रोत काम कर रहा है। इसीलिये, भारतीय संस्कृति में, अगर आप ऊपर, आकाश की ओर देखते हैं तो आपको संस्कृति ने सिखाया है कि आप झुक कर नमन करें। जब आप नीचे, पृथ्वी को देखते हैं तो भी आप झुकते हैं। आप किसी आदमी, स्त्री, बच्चे, गाय, पेड़, या किसी भी चीज़ को देखते हैं तो आप झुकते हैं। और, ये आपको हर समय याद दिलाने का काम करता है कि सृष्टि का स्रोत आपके अंदर भी है। अगर आप इस बात को पहचानते हैं, मानते हैं तो हर समय, जब आप इस अहसास के साथ नमस्कार करते हैं तब आप अपने आखरी, मूल स्वभाव की ओर जाने का रास्ता बना रहे होते हैं।

अपने आपको एक भेंट बनाईये

इसका एक और पहलू भी है। आपकी बहुत सारी तंत्रिकाओं के सिरे आपकी हथेलियों में होते हैं - और इस बात को अब मेडिकल विज्ञान ने भी जान लिया है। सही बात तो ये है कि आपकी जीभ और आवाज़ से भी ज्यादा, आपके हाथ बोलते हैं। योग में मुद्राओं का एक पूरा विज्ञान है। अपने हाथों को कुछ खास, अलग अलग तरहों से रख कर, आप अपनी पूरी शारीरिक प्रणाली को कुछ अलग ही ढंग से काम करा सकते हैं। जैसे ही आप अपने हाथ एक साथ लाते हैं, हथेलियों को जोड़ते हैं, आपके द्वंद्व, आपकी पसंद नापसंद, आपकी लालसायें - विरक्तियाँ, ये सब चीजें एक प्रमाण में आ जाती हैं। आप जो भी हैं, उसकी अभिव्यक्ति में, एक खास एकरूपता आ जाती है, सभी उर्जायें एक हो कर काम करने लगती हैं।

नमस्कार या नमस्ते सिर्फ एक सांस्कृतिक पहलू नहीं है, इसके पीछे एक पूरा विज्ञान है। आप अगर अपनी साधना कर रहे हैं, हर समय जब आप अपनी हथेलियाँ साथ-साथ लाते हैं तो ऊर्जा बनती है, कुछ जबर्दस्त होता है। आपकी जीवन ऊर्जा के स्तर पर आप कुछ दे रहे हैं, या आप अपने आपको दूसरे व्यक्ति को भेंट कर रहे हैं। उस अर्पण में, आप दूसरे जीव को ऐसे जीवन में बदल देंगे, जो आपसे सहयोग करेगा। सिर्फ अगर आप अर्पण की, देने की अवस्था में हैं, तो चीजें आपके लिये अच्छी होंगीं। ये हर जीवन के लिये ऐसा ही है। अपने आसपास के हर जीवन का सहयोग अगर इसे मिलता है तो ये बढ़ती, फूलती है।

 

नमस्कार, योग का सबसे ज्यादा सरल रूप है। ये सारा भौतिक संसार दो ध्रुवों के मिलने से ही बनता है। यहाँ पुरुषत्व है और स्त्रीत्व है, यिन और यांग है, शिव और शक्ति है, आप इसे जो भी कहना चाहें। अपने दोनों हाथों को जोड़ कर एक साथ लायें और किसी व्यक्ति या किसी चीज़ को देखें जो आपके लिये मायने रखती हो - आपकी पत्नी, आपके पति, आपका बच्चा, आपकी माँ, आपके पिता, कोई पेड़, चट्टान, बादल, सूर्य, चंद्र - आपको जो भी पसंद हो। उनकी ओर तीन से पाँच मिनट तक प्रेमपूर्वक, ध्यान दे कर देखते रहें और आप पायेंगे कि आपकी पूरी शारीरिक प्रणाली अद्भुत ढंग से शांतिपूर्ण हो जायेगी। 

 

[सम्पादकीय टिप्पणी] जैसे इस लेख में सद्‌गुरु ने समझाया है, नमस्कार यौगिक संस्कृति का मूल भाग है और इसके साथ एक गहरा विज्ञान जुड़ा हुआ है। नमस्कार से जुड़े हुए कुछ ऐसे पहलू यहाँ बताये जा रहे हैं जो आपको अच्छे, रुचिकर लगेंगे :--

सूर्य नमस्कार के लाभ

सबसे ज्यादा जानी जाने वाली और प्रसिद्ध यौगिक प्रक्रिया सूर्य नमस्कार ही है। इसमें 12 आसनों की एक श्रृंखला है और ये कोई महज संयोग नहीं है कि पहला और आखरी आसन नमस्कार मुद्रा ही है। तो,इस लेख में सदगुरु से सूर्य नमस्कार का महत्व और उसके फायदे सीखिये

नमस्कार के साथ जीवन के सामने अपना हृदय खोलिये

क्या आप जानते हैं कि नमस्कार करते समय दोनों हाथ साथ में रखे जाते हैं और दोनों अंगूठे हमारे शरीर में जहाँ पसलियाँ मिलती हैं , उसके ठीक नीचे के कोमल बिंदु पर, अनाहत में दबाये जाते हैं। इस लेख में, आप सदगुरु द्वारा समझायी गयी अनाहत की बातें जान सकते हैं।

कोई यौगिक प्रक्रिया शुरू करें

पारंपरिक रूप से, हर रोज की यौगिक साधना हमेशा नमस्कार और प्रार्थना के साथ शुरू होती है। ऐसा महान गुरुओं के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिये किया जाता है, जिन्होंने यह ज्ञान एक के बाद एक, आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया है। साधक को प्रक्रिया का लाभ अच्छी तरह मिल सके, इसके लिये भी यह एक आसान तरीका है।

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भारतीय सांस्कृतिक मूल्य :

कई हज़ार सालों से भारतीय उपमहाद्वीप यौगिक संस्कृति में डूबा हुआ है, और इसी वजह से भारतीय संस्कृति के बहुत से पहलुओं पर आध्यात्मिक प्रक्रिया का गहरा असर है। नमस्कार से हर किसी का अभिवादन करना ये भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न भाग है।

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