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तनाव जीवन की परिस्थितियों की वजह से नहीं होता। यह इसलिए होता है क्योंकि आप खुद को मैनेज करना नहीं जानते।
जब आपके भीतर मौजूद जीवन का स्रोत ही आपकी सर्वोच्च सत्ता बन जाता है, तब आपके आस-पास के लोगों की राय और उनके निष्कर्ष मायने नहीं रखते।
जिसने अपने भीतर की निश्चलता को स्पर्श नहीं किया है, वह बाहर की हलचल में खो जाएगा।
आस्तिक और नास्तिक दोनों एक ही नाव में सवार हैं। एक सकारात्मक रूप से मानता है, तो दूसरा नकारात्मक रूप से। दोनों ही यह स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि वे नहीं जानते।
आपके विचार और भावनाएं आपके अपने बनाए भूत हैं। आप उन्हें बनाते हैं, फिर वे नियंत्रण से बाहर होकर आपको ही डराते हैं। यह एक खराब तरीके से निर्देशित हॉरर मूवी जैसा है।
जानकारी हासिल की जा सकती है। 'जानना' एक बोध है। लेकिन बुद्धिमानी आपको कमानी पड़ती है, और इसमें पूरा जीवन लग जाता है।
आपके विचार केवल पुरानी जानकारी का ही दोहराव हैं। वहां वास्तव में कभी कुछ नया नहीं घट सकता।
अगर आपको लगता है कि आपका काम महत्वपूर्ण है, तो यह बहुत जरूरी है कि आप स्वयं पर काम करें।
आजादी का अर्थ है अपने जीवन को स्वयं गढ़ने का सामर्थ्य होना, न कि इसे किसी और चीज के द्वारा तय होने देना।
जीवन तब सुंदर बनता है जब आप इसमें अपना सब कुछ झोंक देते हैं और इस बात की परवाह नहीं करते कि आपको क्या मिलता है और क्या नहीं। जीवन का आनंद खुद को अभिव्यक्त करने में है, भीख माँगने में नहीं।
कठिनाई एक परिस्थिति है जिससे हम गुजरते हैं। लेकिन दुख एक मानसिक स्थिति है जिसे हम खुद पैदा करते हैं।
जो कुछ भी मैं जानता हूं, जो मेरे गुरु जानते थे, और जो पूरी आध्यात्मिक परंपरा जानती थी, वो सब ध्यानलिंग में ऊर्जा के रूप में समाहित है। मैं तो बस उसका एक परिणाम हूं।