हठ योग का विज्ञान

सद्गुरु बता रहे हैं कि पारंपरिक हठ योग के बुनियादी तत्व क्या हैं और वह कैसे व्यक्ति की ऊर्जा को एक खास तरह से संचालित करने का तरीका है।
 
 

सद्‌गुरु: दुर्भाग्यवश दुनिया के पश्चिमी भाग में ‘योग’ शब्द का मतलब है कि आप खुद को रबर बैंड की तरह तोड़े-मरोड़ें या सिर के बल खड़े हो जाएं। योग कोई कसरत नहीं है। योग शब्द का अर्थ है, मेल। आज आधुनिक विज्ञान ने भी यह प्रमाणित कर दिया है कि सारा अस्तित्व सिर्फ एक ऊर्जा है। तो अगर यह सब एक ऊर्जा है, तो आप इसका अनुभव उस तरह क्यों नहीं कर पा रहे? अगर आप अलग होने के भ्रम की सीमाओं को तोड़ पाएं और पूरे अस्तित्व के एक होने का अनुभव कर सकें, तो यही योग है। दुनिया भर के धर्म हमेशा ईश्वर के सर्वव्यापी होने की बात करते रहे हैं। चाहे आप कहें कि ईश्वर हर कहीं है या यह कहें कि सब कुछ एक ऊर्जा है, क्या दोनों में कोई फर्क है? यह एक ही हकीकत है। जब इसका गणितीय आकलन किया जाता है, तो हम इसे विज्ञान कहते हैं। जब आप इस पर विश्वास करते हैं, तो इसे धर्म कहा जाता है। जब आप वहां तक पहुंचने का एक तरीका खोज लेते हैं, तो हम इसे योग कहते हैं। तो योग क्या है और क्या नहीं है? ऐसी कोई चीज नहीं है।

जब आप अपनी सीमाओं से परे जाने के लिए जीवन की किसी भी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं, तो यह योग है। आप जिस तरह सांस लेते हैं, बैठते, खड़े होते, खाते, चलते और काम करते हैं, यह सब कुछ योग हो सकता है।

हठ योग: अपनी ऊर्जा को दिशा देना

योग यानी मेल और असीमितता के अनुभव की ओर आपको ले जाने के लिए हम ऊर्जा के साथ हेर-फेर करते हैं और शरीर को एक खास तरह से संचालित करते हैं। इसका एक पहलू हैं, शारीरिक आसन। शरीर की क्रियाप्रणाली को समझना, एक खास माहौल तैयार करना और फिर आपकी ऊर्जा को किसी खास दिशा में ले जाने के लिए शरीर या शारीरिक आसनों का इस्तेमाल करना ही हठ योग या योगासन हैं। हठ योग कोई कसरत नहीं है। आसन का अर्थ है, मुद्रा। अगर मैं एक तरह से बैठता हूं, तो यह एक आसन है। अगर मैं दूसरी तरह से बैठता हूं, तो यह एक दूसरा आसन है। इसलिए आसन अनगिनत हो सकते हैं। शरीर जिन अनगिनत आसनों को अपना सकता है, उनमें से चौरासी मूल आसनों को योगासन के रूप में पहचाना गया है।

हठ योग: तैयारी की प्रक्रिया

हठ योग, योग की तैयारी की प्रक्रिया है। ‘ह’ का अर्थ है सूर्य, ‘ठ’ का अर्थ है चंद्रमा। ‘हठ’ का मतलब है, आपके भीतर स्थित सूर्य और चंद्रमा या पिंगला और इड़ा में संतुलन लाने का योग। आप हठ योग को कुछ सीमाओं के परे ले जाने के लिए भी कर सकते हैं, मगर मूलभूत रूप से यह एक शारीरिक तैयारी है, जो शरीर को एक उच्चतर संभावना के लिए तैयार करता है।

जब हम क्रिया योग करना चाहते हैं, तो लोगों को तैयार करने के लिए हम हमेशा हठ योग का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि तैयारी के बिना शरीर का ऊर्जा के उच्चतर आयामों तक पहुंचना संभव नहीं होगा। शरीर टूट जाएगा। यह ऐसा ही है, मानो आपका पाइप तैयार नहीं है और आप उसमें बहुत ज्यादा ताकत से हवा भर दें, तो कहीं न कहीं वह फूट ही जाएगा। इसलिए हठ योग को पाइप मजबूत करने के रूप में समझा जा सकता है।

इसके दूसरे आयाम भी हैं, मगर सबसे सरल रूप में कहें तो सिर्फ किसी के बैठने के तरीके को देखते हुए आप करीब-करीब जान सकते हैं कि उसके अंदर क्या घटित हो रहा है। अगर आपने खुद पर ध्यान दिया होगा, तो आपने पाया होगा कि जब आप गुस्से में होते हैं, आप एक तरीके से बैठते हैं, जब आप खुश होते हैं, आप दूसरे तरीके से बैठते हैं। जब आप निराश होते हैं तो आप किसी और तरीके से बैठते हैं। चेतनता के अलग-अलग स्तरों या आपके मानसिक और भावनात्मक हालात के मुताबिक आपका शरीर स्वाभाविक रूप से किसी खास मुद्रा को अपना लेता है। आसनों का विज्ञान इसके विपरीत होता है। अगर आप जान-बूझकर, पूरी चेतनता में अपने शरीर को किसी खास मुद्रा में ले जाते हैं, तो आप अपनी चेतनता को ऊंचा उठा सकते हैं।

ज्यादातर जगहों पर जो हठ योग किया जा रहा है, वो प्रक्रियाएं सिर्फ शारीरिक आयाम तक ही सीमित हैं।

आपको हठ योग में जान फूंकनी होगी, वरना वह जीवित नहीं हो पाएगा। इसीलिए पारंपरिक रूप से एक प्रत्यक्ष गुरु पर इतना जोर दिया जाता है, ताकि हठ योग को जीवंत बनाया जा सके।

पारंपरिक हठ योग

पश्चिम में योग के प्रवेश और उसे लोकप्रिय हुए बीस साल हो चुके हैं। कभी-कभार उसे सिखाने के तरीकों में कई कमियां होती हैं, मगर फिर भी इसके स्वास्थ्य संबंधी लाभों से इंकार नहीं किया जा सकता, चाहे आप कहीं भी रहते हों या कुछ भी करते हों। फिलहाल योग का अभ्यास करने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसकी वजह यह भी हो सकती है कि वैज्ञानिक समाज धीरे-धीरे इसकी गहराई और आयामों को मान्यता देने लगा है। लेकिन अगर योग का गलत और विकृत रूप फैलता है, तो पंद्रह सालों के अंदर निश्चित तौर पर वैज्ञानिक अध्ययन आपको बताएंगे कि वह इंसान के लिए कितना नुकसानदेह है। यह योग का पतन होगा।

इसलिए योग को उसके पारंपरिक रूप में वापस लाना महत्वपूर्ण है। अगर इसे विनम्रता और पूरी प्रक्रिया को लेकर समावेश की एक भावना के साथ उचित माहौल में सिखाया जाए, तो यह अपने शरीर को एक ऐसे शानदार पात्र के रूप में ढालने की शानदार प्रक्रिया है, जो चैतन्य को ग्रहण करने का एक उम्दा उपकरण बन जाए।

इसके कुछ खास आयाम हैं, जो आज दुनिया से करीब-करीब गायब हो चुके हैं। कुछ जगहों पर वह मौजूद हैं, मगर आम तौर पर जानी-पहचानी जगहों पर यह गायब होता है। मैं उन आयामों को वापस लाना चाहता हूं।

यह जीने का बहुत शक्तिशाली तरीका है। यह शक्ति किसी और को दबाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को पूर्ण रूप से जानने के लिए है।