बाहर नहीं, अपने भीतर ढूंढ़ें प्रेम

अगर आप किसी दूसरे से प्रेम और सुख पाना चाहते हैं तो यह आपके और उस इंसान दोनों के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। आपको बस दूसरों से प्रेम चाहने के बजाय अपने भीतर झांकना है।
बाहर नहीं, अपने भीतर ढूंढ़ें प्रेम
 

प्रमांशु: हम सब प्रेम की खोज में लगे हैं। सद्गुरु, आपके हिसाब से प्रेम क्या है? आपके अगाध प्रेम का रहस्य क्या है?

सद्‌गुरु: प्रेम का संबंध किसी दूसरे इंसान से नहीं है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं- मान लेते हैं, अभी आप एक कमरे में बैठे हैं। उसी कमरे में एक और इंसान है, जिससे आप बहुत प्रेम करते हैं। अगर वह इंसान उस कमरे से बाहर खड़ा हो जाए, तो क्या तब भी आपको उससे प्रेम रहता है? आपके मन में अभी भी प्रेम हो सकता है। अगर वह इंसान दस मील दूर चला जाए, क्या तब भी आपके मन में प्रेम हो सकता है? और अगर वह सौ मील दूर चला जाए तो? अगर वह इंसान मर जाए, तो क्या तब भी प्रेम बना रहेगा? अगर वह इंसान दुनिया में नहीं है, तब भी आपके मन में प्रेम हो सकता है। तो यह प्रेम क्या उस इंसान के बारे में है या खुद आपके बारे में? यह दूसरे का नहीं, आपका गुण है। चाहे कोई आपसे प्रेम करे या नहीं, फर्क नहीं पड़ता। अगर आप दिल में प्रेम महसूस कर रहे हैं, तो यह आपको खूबसूरत इंसान बना देता है, क्योंकि आप अंदर से अच्छा महसूस कर रहे हैं। अगर आप भीतर से आनंद में हैं, तो आप अपने आसपास के लोगों को और भी ज्यादा सुखद लगेंगे। जब कभी आपको अपने भीतर बहुत सुखद एहसास हो रहा होता है, तो आप एक बहुत अच्छे इंसान बन जाते हैं। अगर आप बुरा महसूस कर रहे हैं, तो आप एक खराब इंसान बन जाते हैं।

प्रेम कोई ऐसी चीज नहीं है जो आप करते हैं। प्रेम ऐसी चीज है, जिसमें आप होते हैं।
प्रेम कोई मंजिल नहीं है, बस मंजिल की ओर एक कदम है। प्रेम जीवन का बस एक पहलू है। फिर भी प्रेम को इतना ज्यादा महत्व सिर्फ इसलिए दिया जाता है, क्योंकि लंबे समय से अधिकतर लोगों में, उनका सबसे मजबूत पहलू, उनकी भावनाएं रही हैं। बेशक आज-कल लोग खुद को बुद्धिजीवी समझने लगे हैं, फिर भी नब्बे फीसदी से ज्यादा लोगों में बुद्धि, शरीर और ऊर्जा नहीं, बल्कि भावना ही सबसे बड़ी ताकत होती है। इसलिए भावनाओं को सुखद बनाना बहुत जरूरी है। वरना यह कटुता की तरह बाहर आएगी। अगर कोई प्रेम में है, और आप उसके चेहरे को देखें तो वह फूल की तरह खिला हुआ दिखेगा। क्योंकि वह अपने भीतर खुशी को महसूस कर रहा है। आप जिससे भी प्रेम करते हैं, हो सकता है उसे इस बात का पता भी न हो, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसको इस बात का पता न होने के बावजूद भी, आपको अपने अंदर अच्छा महसूस होता है, क्योंकि आप प्रेम में हैं।

प्रेम कोई ऐसी चीज नहीं है जो आप करते हैं। प्रेम ऐसी चीज है, जिसमें आप होते हैं। तो, या तो आप खुद को प्रेममय बनाने के लिए किसी की मदद ले सकते हैं या बस यूं ही प्रेममय हो सकते हैं। अपने अंदर प्रेम जगाने के लिए दूसरे व्यक्ति का आप इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन बिना किसी की मदद के भी आप इसे अपने अंदर जगा सकते हैं। तब यह ज्यादा टिकाऊ होगा, क्योंकि इस धरती पर कोई भी सौ फीसदी भरोसेमंद नहीं होता है।

मेरा सौभाग्य ऐसा है कि मेरे जीवन का एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता, जब मुझे अपने आसपास के लोगों की आंखों में प्रेम के आंसू न दिखाई दें।
अगर आप किसी दूसरे से प्रेम और सुख पाना चाहते हैं तो यह आपके और उस इंसान दोनों के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि अकेले रहना बेहतर है। मेरा मतलब यह है कि आपको कैसा होना है, यह आपको तय करना चाहिए। अगर आप लोगों के साथ प्रेम बांटने को तैयार हैं, अगर आप लोगों के साथ आनंद बांटते हैं, तो यह बिलकुल अलग बात होगी।

आपको बस करना इतना है कि दूसरों से प्रेम चाहने के बजाय अपने भीतर झांकना है और यह देखना है कि अपने भीतर के प्रेम को आप बाहर कैसे लाएं। अगर आप प्रेममय हैं, तो आप देखेंगे कि आप जहां भी जाएंगे, जिससे भी मिलेंगे, हर कोई, चाहे आपको जानने वाला हो या अनजान, आपको प्रेममय लगेगा।

प्रेम इसलिए नहीं होता क्योंकि हम दोस्ती बनाने की या संबंध बनाने की कोशिश करते हैं। अगर हम अपने भीतरी आयामों में विकसित होते हैं तो प्रेम ही हमारे होने का एकमात्र तरीका है। अगर आप कमरे में अकेले भी हैं, तो भी आप प्रेममय हो सकते हैं। अगर कोई आता है तो अपने प्रेम को आप उसके साथ बांट सकते हैं। अगर कोई नहीं आता, तो आप बस यूं ही प्रेममय रह सकते हैं।

मुझे देखिए, मेरा सौभाग्य ऐसा है कि मेरे जीवन का एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता, जब मुझे अपने आसपास के लोगों की आंखों में प्रेम के आंसू न दिखाई दें। हर दिन मेरे आसपास लोग प्रेम के आंसू बहाते हैं। जब वे मुझे देखते हैं तो फूट-फूट कर रो पड़ते हैं। ऐसे लोगों के बीच रहने से अच्छा सौभाग्य भला और क्या हो सकता है? तो क्या यह सब बस संयोग से हुआ? नहीं, अगर हम अंदर की ओर मुड़ें और अपने भीतर इस आयाम को सक्रिय कर लें, तो आप पाएंगे कि हमारे आसपास हर कोई हमारे साथ इस तरह से जीने के लिए मजबूर होगा।

 
 
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