नर्मदा


नदी की लंबाई

1312 किमी

नदी घाटी क्षेत्र

98,796 स्क्वायर किमी

नदी घाटी में आबादी

4.8 करोड़

नदी घाटी में पड़ने वाले राज्य

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात

अहमदाबाद (आबादी: 55 लाख), भोपाल (आबादी: 17 लाख), वडोदरा (आबादी: 17 लाख)

नदी को हानि

  • जल की मात्रा में कमी : 58 प्रतिशत
  • शुष्क मौसम में सूखे का खतरा : कम
  • मानसून में बाढ़ का खतरा : बहुत ज्यादा
  • पेड़ों में कुल कमी : 94 प्रतिशत
  • हर मौसम में जल स्तर में बदलाव : बहुत अधिक

आर्थिक महत्व

  • नर्मदा मध्य प्रदेश और गुजतरात के लिए पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत की एक प्रमुख स्रोत है।
  • भरूच शहर, जहां नर्मदा समुद्र से मिलती है, गुजरात के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है। यह शहर प्राचीन समय में भी एक मुख्य व्यापार केंद्र था। ग्रीक इसे बेरिगाजा के नाम से जानते थे और नर्मदा को नमाडस बुलाते थे। ग्रीक, रोमन, चीनी, मलय और अफ्रीकी व्यापारी यहां से व्यापार करते थे।

हाल ही में हुई आपदाएं

नर्मदा की 101 सहायक नदियों में से 60 सहायक नदियाँ या तो मौसमी बन गई हैं, या सूख गई हैं। नर्मदा के कई साल समुद्र न पहुँचने के कारण, समुद्र आगे की और बढ़ रहा है, जिससे खारापन बढ़ा है, मिट्टी का क्षरण हुआ है, और उद्योगों को नुक्सान हुआ है।

गुजरात के कई हिस्से सिर्फ तीन दिन में सूखे से बाढ़ की चपेट में आ गए, जब नर्मदा और बाकी नदियों का जल स्तर बढ़ गया। 141 बाढ़ प्रभावित गांवों से करीब 20,000 लोगों को बचाया गया। विडंबना यह है कि जब राज्य के कुछ हिस्से बाढ़ में डूबे हुए थे, उस समय उसका लगभग चालीस फीसदी हिस्सा बारिश की कमी से जूझ रहा था।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

आदि शंकराचार्य ने नर्मदा के तट पर ही ओंकारेश्वर में संन्यास लिया था। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के अलावा नर्मदा के तट पर स्थित महेश्वर मंदिर भी प्रसिद्ध है।

हर साल भक्त नर्मदा की परिक्रमा करते हैं जो नर्मदा के स्रोत से लेकर समुद्र के उसके मुहाने तक और फिर वापस 2600 किलोमीटर की तीर्थयात्रा है।

दुनिया के कुछ सबसे पुराने गुफा चित्र, जो करीब 30,000 वर्ष पुराने हैं, नर्मदा के तट के निकट भीमबेटका गुफाओं में पाए जाते हैं।

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