नोयल


नदी की लंबाई:

180 किमी

नदी घाटी क्षेत्र:

3510 स्क्वायर किमी

नदी घाटी में आबादी:

21 लाख

नदी घाटी में पड़ने वाले राज्य:

तमिलनाडु

जल का इस्तेमाल करने वाले प्रमुख शहर:

कोयंबटूर (आबादी: 11 लाख)

नदी को हानि

  • शुष्क मौसम में सूखे का खतरा : अधिक
  • मानसून में बाढ़ का खतरा : मध्यम से अधिक

आर्थिक और पर्यावरण संबंधी महत्व

  • नोयल नदी कावेरी की एक उपनदी है और वेलंगिरि पहाड़ियों से निकलती है। यह नदी कोयंबटूर और तिरुपुर शहरों से गुजरती है और करूर जिले के नोयल में कावेरी से मिलती है।
  • एक समय में कोयंबटूर से लेकर तिरुपुर तक के इलाके की पेयजल जरूरतें नोयल और शहर के आस पास की कई नहरों, टंकियों और छोटी नदियों से अच्छी तरह पूरी होती थीं। यह एक सक्षम प्रणाली थी, जो जल परिवहन और भंडारण प्रदान करती थी और स्थायी भूमिगत जल के स्तरों को कायम रखती थी। माना जाता है कि इस क्षेत्र में लगभग 32 टंकियां थीं।
  • इस क्षेत्र के शहरीकरण के साथ, यह प्रणाली उपेक्षित हो गई और काम करने वाली टंकियों की संख्या जबर्दस्त तरीके से कम हो गई। आज सिर्फ ग्यारह टंकिंयां बची हैं जिनकी स्थिति भी बिगड़ती जा रही है।
  • यह प्राचीन मगर प्रभावी जलापूर्ति प्रणाली अब काम नहीं करती और इस क्षेत्र में पानी बहुत कम रह गया है। इससे खेती पर काफी दुष्प्रभाव पड़ा है। कभी इस नदी से लगभग 350,000 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होती थी, मगर आज सिंचाई जल की कमी के कारण इस इलाके के लाखों नारियल के पेड़ सूख गए हैं और काट दिए गए हैं।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

नोयल तमिल इतिहास की एक पवित्र नदी है। इसे मूल रूप से कांची नदी के रूप में जाना जाता था और बाद में जाकर नोयल बुलाया जाने लगा, जिसका अर्थ है ‘वह जो बीमारियों से मुक्त है’।

एक समय था जब कोयंबटूर के पास पेरूर में इस नदी के तट पर कई मंदिर और कला के केंद्र पाए जाते थे। पेरूर के प्राचीन पटीश्वर मंदिर में अब भी नृत्य का एक वार्षिक उत्सव, नाट्यांजलि होता है।

नोयल नदी के स्रोत, वेलंगिरि पहाड़ियों को दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है और योगिक कथा के मुताबिक प्रथम योगी, आदियोगी ने यहां समय बिताया था।

References and Credit

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