गोदावरी


नदी की लंबाई

1465 किमी

नदी घाटी क्षेत्र

312,812 स्क्वायर किमी

नदी घाटी में आबादी

14.2 करोड़

नदी घाटी में पड़ने वाले राज्य

महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश

जल का इस्तेमाल करने वाले प्रमुख शहर

हैदराबाद (आबादी: 68 लाख), नासिक (आबादी: 15 लाख), औरंगाबाद (आबादी: 12 लाख)

नदी को हानि

  • जल की मात्रा में कमी : 20 प्रतिशत
  • शुष्क मौसम में सूखे का खतरा : मध्यम
  • मानसून में बाढ़ का खतरा : अधिक
  • पेड़ों में कुल कमी : 88 प्रतिशत
  • हर मौसम में जल स्तर में बदलाव : बहुत अधिक

आर्थिक महत्व

  • सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी होने के कारण गोदावरी इस इलाके में खेती के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
  • गोदावरी और कृष्णा के डेल्टा एक-दूसरे के काफी करीब हैं। साथ मिलकर वे 12,700 स्क्वायर किमी के कुल क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ लोगों का पेट भरते हैं।
  • गोदावरी एक महत्वपूर्ण आंतरिक जलमार्ग भी है और उसे राष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है।

हाल ही में हुई आपदाएं

2016 में गोदावरी में एक नहीं, दो बार बाढ़ आई, पहली बार जून में, फिर जुलाई में। इस नदी के रास्ते में आने वाले तीनों राज्यों में बाढ़ आई। केवल आंध्र प्रदेश में ही बाढ़ से 543,000 लोग बेघर हो गए। इन दो महीनों से पहले गोदावरी नासिक में अपने स्रोत पर ही सूख गई थी। नासिक में कुंभ मेले के दौरान भक्तों के डुबकी लगाने के लिए भूजल को पंप करके नदी में भरा गया था।

एक साल बाद 2017 की गर्मियों में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में लगभग सूखे की स्थिति थी क्योंकि कृष्णा और गोदावरी दोनों में जलस्तर कम हो गया था। बारी-बारी से बाढ़ और सूखे की ऐसी स्थिति भारत की करीब-करीब सभी नदियों में देखी जा सकती है।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

गोदावरी का उद्गम स्थल त्रयंबकेश्वर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। त्रयंबकेश्वर उन चार जगहों में से एक है, जहां हर बारह वर्ष पर कुंभ मेला होता है।

कहा जाता है कि भारत के सबसे श्रद्धेय आध्यात्मिक गुरुओं में से एक गोरखनाथ का जन्म गोदावरी के तट पर हुआ था। इस नदी के किनारे नाथ संप्रदाय के अनगिनत आश्रम और मंदिर है।

सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने गोदावरी के तट पर नांदेड में गुरु ग्रंथ साहिब को सिख धर्म का सनातन गुरु घोषित किया।

भारत के सबसे मशहूर सरस्वती मंदिरों में से एक गोदावरी के तट पर बासर में स्थित है। विद्या की देवी का यह मंदिर इस बात का प्रतीक है कि गोदावरी ने किस तरह विद्या के कई प्राचीन केंद्रों – बासर, धर्मापुरी, कालेश्वरम, भद्रचालम और द्रक्षारमम, आदि को पोषित किया।

प्रायद्वीप के कई महान राजवंश गोदावरी के तट पर फले-फूले। दो हजार वर्ष पहले सातवाहन वंश को गोदावरी इतनी पसंद थी कि उनकी चार में से तीन राजधानियां उसके तट पर स्थित थीं। काकतीय और वेंगी चालुक्य इस नदी के पास विकसित होने वाले दूसरे राजवंश थे।

कवि संत ज्ञानेश्वर ने इस नदी के तट पर ही ज्ञानेश्वरी की रचना की।

दो हजार वर्ष पहले गुणाध्य ने लुप्त हो चुकी भाषा पैसाची में वृहत कथा लिखी, जो प्राचीन भारत की महत्वपूर्ण किताबों में से एक है।

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