गंगा


नदी की लंबाई

2525 किमी

नदी घाटी क्षेत्र

861,000 स्क्वायर किमी

नदी घाटी में आबादी

32.9 करोड़

नदी घाटी में पड़ने वाले राज्य

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल

जल का इस्तेमाल करने वाले प्रमुख शहर

नई दिल्ली (आबादी: 1.1 करोड़), कोलकाता (आबादी: 45 लाख) , इलाहाबाद (आबादी: 11 लाख)

नदी को हानि

  • जल की मात्रा में कमी : 44 प्रतिशत
  • शुष्क मौसम में सूखे का खतरा : कम
  • मानसून में बाढ़ का खतरा : बहुत अधिक
  • पेड़ों में कुल कमी : 78 प्रतिशत
  • हर मौसम में जल स्तर में बदलाव : अधिक

आर्थिक महत्व

  • गंगा का मैदानी इलाका इस धरती के सबसे उपजाऊ कृषि क्षेत्रों में से एक है। यह पांच देशों में 50 करोड़ से अधिक लोगों का पोषण करता है। भारत में इस क्षेत्र में 565,000 स्क्वायर किमी जमीन पर खेती की जाती है जो भारत के कुल कृषि क्षेत्र का लगभग एक तिहाई है।
  • गंगा नदी कभी एक महत्वपूर्ण नौपरिवहन मार्ग हुआ करती थी। पश्चिम बंगाल आज भी जूट, चाय, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों के परिवहन के लिए इस नदी का इस्तेमाल करता है।
  • भारत का एक प्रमुख बंदरगाह, कोलकाता बंदरगाह गंगा की एक शाखा हुगली पर स्थित है।
  • इसमें दो लुप्तप्राय प्राणी पाए जाते हैं, मगरमच्छ की एक प्रजाति घड़ियाल, और गंगा में पाए जाने वाले डॉल्फिन जो दुनिया में ताजे पानी के डॉल्फिन की सिर्फ 7 प्रजातियों में से एक हैं। अब सिर्फ 200 घड़ियाल और 2000 गंगा डॉल्फिन बचे हैं।

हाल ही में हुई आपदाएं

डब्ल्यू. डब्ल्यू​. ऍफ़. के अनुसार गंगा विश्व की सबसे अधिक संकट-ग्रस्त नदियों में से एक है।

लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है। मई 2016 में गंगा प्रयाग, उत्तरप्रदेश में इतनी सूखी थी कि लोग रिवर बेड पर चल रहे थे। सिर्फ तीन महीने बाद मानसून के दौरान नदी में आई बाढ़ बिहार और उत्तर प्रदेश में रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई जिससे 40 लाख लोग प्रभावित हुए और 650,000 लोग बेघर हो गए। सूखे के तुरंत बाद बाढ़ ने खेती को उजाड़ कर रख दिया।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

गंगा का अर्थ है, बहना। गंगा भारत की पहचान है और देश के आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक मूल्यों को पिरोने वाली एक मूलभूत डोर है।

भारत के सबसे पवित्र स्थान – ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयाग और काशी, गंगा के तट पर हैं। हिमालय में केदारनाथ, बद्रीनाथ और गोमुख गंगा और उसकी उपनदियों के किनारे स्थित तीर्थ स्थानों में से एक हैं।

जिन चार स्थानों पर कुंभ मेला लगता है, उनमें से दो – हरिद्वार और प्रयाग – गंगा के तट पर हैं।

गंगा की एक उपनदी सोन के तट पर, पुरातत्वविदों को 11,000 साल पुराना एक तिकोना पत्थर मिला जिसे सबसे पुराना यंत्र का प्रतिरूप माना जा रहा है। इस पत्थर पर शक्ति या देवी की आराधना के चिन्ह मिले हैं।

फ्रांसीसी फिलॉस्फर फ्रांसिस एम. वालतायर गंगा पर इतने मुग्ध हो गए कि उन्होंने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि सब कुछ, चाहे वह खगोल विद्या हो, ज्योतिष या आध्यात्मिकता, गंगा के तट से ही उत्पन्न हुआ है। यह बात बहुत मायने रखती है कि कम से कम 2500 साल पहले पायथागोरस ज्यामिति सीखने के लिए सामोस से गंगा की ओर गया।’ (फ्रांसीसी भाषा से अनुवादित)

अतीत में गंगा जल को अमृत माना जाता था। मुगल सम्राट अकबर हमेशा गंगा जल अपने साथ रखते थे। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी इंग्लैंड वापस जाते समय तीन महीने के सफर में अपने नाविकों के लिए सिर्फ गंगा जल का इस्तेमाल करती थी क्योंकि वह पूरे समय मीठा और ताजा रहता था। 1896 में एक ब्रिटिश बैक्टीरियोलॉजिस्ट ने बताया कि गंगा जल हैजा के सूक्ष्माणुओं को नष्ट करता है।

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