कावेरी


नदी की लंबाई

802 किमी

नदी घाटी क्षेत्र

88,000 स्क्वायर किमी

नदी घाटी में आबादी

7.3 करोड़

नदी घाटी में पड़ने वाले राज्य

कर्नाटक, तमिलनाडु

जल का इस्तेमाल करने वाले प्रमुख शहर

चेन्नई (आबादी: 70 लाख), बेंगलुरु (आबादी: 84 लाख)

नदी को हानि

  • जल की मात्रा में कमी : 39 प्रतिशत
  • शुष्क मौसम में सूखे का खतरा : कम से मध्यम
  • मानसून में बाढ़ का खतरा : अधिक
  • पेड़ों में कुल कमी : 87 प्रतिशत
  • हर मौसम में जल स्तर में बदलाव : मध्यम

आर्थिक महत्व

  • ‘कावेरी’ नाम ही इस नदी के महत्व को दर्शाता है। का और विरी को जोड़कर ‘कावेरी’ बना है, जिसका अर्थ है ‘जो अपने बहने की जगह पर समृद्धि लाती है’।
  • कावेरी डेल्टा को ‘तमिलनाडु का फूड बास्केट’ माना जाता है क्योंकि राज्य का दो तिहाई अनाज वहीं उपजता है।
  • तमिलनाडु में 39 फीसदी और कर्नाटक में 11 फीसदी सिंचित क्षेत्र कावेरी से पानी लेते हैं।
  • एशिया का पहला जलविद्युत बांध कावेरी पर शिवनासमुद्रा में बना था। इस बांध से बेंगलुरु को बिजली मिलती है।

हाल ही में हुई आपदाएं

साल 2016 , कावेरी बारिश में 40-70 फीसदी कमी के कारण कावेरी अपने स्रोत पर सूख गई। विडंबना ये है कि तमिलनाडु को 2015 में भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा था, जिसमें पांच सौ लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे थे। अनुमानों के अनुसार लगभग 20,000 से लेकर 160,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। मुश्किल से एक साल बाद गर्मियों में उसे भयानक सूखे की मार झेलनी पड़ी, जो पिछले 140 सालों में सबसे भीषण सूखा था।

बारी-बारी से बाढ़ और सूखे के चक्रों की यह बढ़ती प्रवृत्ति भारत की लगभग सभी प्रमुख नदियों में देखने को मिल रही है।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

कावेरी का स्रोत अगस्त्यमुनि से बहुत करीब से जुड़ा है, जो कई रूपों में पूरे दक्षिण भारत में आध्यात्मिक प्रक्रिया के मूलदाता रहे हैं।

दक्षिण भारत के कई पवित्र स्थान कावेरी के तट पर हैं। जल के लिए पंच भूत स्थल तिरुवनईकवल इसके तट पर ही है। यहां मौजूद लिंग हमेशा आंशिक तौर पर कावेरी के जल में डूबा रहता है।

कावेरी को एक देवी के रूप में देखा गया है। पश्चिमी घाट के मूल निवासियों में से एक कोडागु, कावेरी को अपनी कुलदेवी मानते हैं।

कावेरी पर लगभग 2000 साल पहले बना कल्लानै बांध दुनिया के सबसे पुराने बांधों में से एक है जिसे चोल राजा कारिकाल ने बनवाया था।

जिस जगह पर कावेरी समुद्र से मिलती है, वहां स्थित एक नगर पूम्पुहार प्राचीन विश्व के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों में से एक था। इसे कावेरीपूम्पट्टनम के नाम से जाना जाता था। व्यापारी यहां से व्यापार करने रोम, ग्रीस, चीन और सुदूर पूर्व जाते थे।

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