नदियों को बचाने का तरीका

यह कोई धरना या विरोध प्रदर्शन नहीं है, यह अभियान इस जागरुकता को फैलाने के लिए है, कि हमारी नदियां सूख रही हैं। हर वो इंसान जो पानी पीता है उसे इस नदी अभियान में अपना सहयोग देना होगा। - सद्‌गुरु

नदी के दोनों ओर कम-से-कम एक किलोमीटर की चौड़ाई में बड़ी संख्या में पेड़ लगाने से पर्यावरण बेहतर होगा, साथ ही देश तथा समाज को सामाजिक और आर्थिक लाभ होंगे।

  • स्वस्थ नदी प्रणालियां मौजूदा और भावी पीढ़ियों के लिए जल तथा भोजन को सुरक्षित करती हैं।
  • व्यक्तिगत खुशहाली और भारत के उद्योगों तथा वाणिज्य के लिए सुरक्षित जल संसाधन बहुत जरूरी हैं।
  • फसलों की जगह जैविक फलों की खेती करने पर किसानों की आय कम से कम तीन से चार गुना बढ़ जाती है।
  • किसान भारत की कार्यशक्ति का सबसे बड़ा हिस्सा हैं मगर उनकी कमाई सबसे कम है। उनकी आय बढ़ने से काफी सकारात्मक असर पड़ेगा।
  • यह भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगा और उसमें विविधता भी लाएगा।

इतने बड़े पैमाने पर और दीर्घकालीन कार्रवाई को सिर्फ सरकारी नीति से ही स्थायी बनाया जा सकता है। इस राष्ट्रीय मुद्दे के बारे में जागरूकता पैदा करने और कार्रवाई को प्रेरित करने के लिए सद्गुरु ने ‘नदी अभियान’ का विचार दिया, जिसमें वह खुद कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक ड्राइव करेंगे।

पेड़ किस तरह हमारी नदियों को बचा सकते हैं?

भारत की नदियां मुख्य रूप से वर्षा जल से पोषित होती हैं। तो वे साल भर, यहां तक कि सूखे मौसमों में भी कैसे बहती हैं? वनों के कारण। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद भी बारहमासी नदियां बहती रहें, इसमें पेड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

स्रोत: wri.org

पेड़ की जड़ें मिट्टी को छेददार बना देती हैं जिससे वह बारिश के समय पानी सोख लेती है और उसे थाम कर रखती है। मिट्टी में मौजूद यह जल साल भर धीरे-धीरे नदी में मिलता रहता है।
अगर पेड़ नहीं होंगे, तो बाढ़ तथा सूखे का विनाशकारी चक्र चलता रहेगा। मानसून के दौरान अधिक पानी सतह पर आ जाएगा और बाढ़ लाएगा क्योंकि मिट्टी बारिश के पानी को नहीं सोखेगी। मानसून के समाप्त होने के बाद नदियां सूख जाएंगी क्योंकि उन्हें पोषित करने के लिए मिट्टी में नमी नहीं होगी। इसीलिए नदियों के दोनों ओर पेड़ों का होना बहुत जरुरी है।
वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक नदियों के तटों पर पेड़ लगाने के बहुत से फायदे हैं

  • नदियां बारहमासी रहती हैं
  • बाढ़ की घटनाएं कम होती हैं
  • सूखे से लड़ने में मदद मिलती है
  • भूजल फिर से भरने लगता है
  • वर्षा सामान्य होती है
  • जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव कम होते हैं
  • मिट्टी का कटाव रुकता है
  • जल की गुणवत्ता में सुधार होता है
  • मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है
  • जैव-विविधता की सुरक्षा
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