Letter from Japan

Sadhguru on stage
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Venomous Intent

 

O’ Serpent king

You took my life when needed

But your venom brought me back

To life in a way, few would know

Whenever you appear my life turns a page

Now what do you have for me

That you have come

And it is time for the winds of change

I can still feel the venom

In my blood

Will I succeed in sieving

The chaff from the grain

The mortal from the Immortal

 

***

 

My life has always been arranging itself into 12 year cycles, and at the beginning of a new cycle, there is always the presence of the cobra in various forms. Many times this has happened, and in such strange ways that there is no way to logically articulate the significance of its presence as a mere coincidence. It is quite beyond logical articulation; it falls perfectly into place in the overall scheme of life.

Many a time, I have made an error of judgement through seemingly perfect logic. But always, such erroneous actions are scuttled by him, and he invariably puts me back on track. The advantage of having him as my partner, and above all, the freedom to be at reckless ease, is only because of the assurance that his presence are the rails upon which my life run. Cannot go wrong or fail, you see. Life or death I shall gracefully accept, as it is only his will.

The ashram exploded on 3rd Sept with a few thousand people who had come from all over. Their eagerness and love are absolutely overwhelming. Next to Shiva’s grace, this is the greatest blessing in my life – the outpouring of love from people.

Now in Japan for the India-Japan Global Partnership Summit. A wonderful event full of possibilities for both nations, but can be particularly so for India. The Japanese participation was at its highest level with their Prime Minister and four former Prime Ministers participating. Cannot say the same for the Indian leadership, though a few Indian states did well to pitch for tremendous cooperation and lucrative collaborations. There was almost negligible participation from the southern states.

This summit is a significant event that can bring about a great change in the way India does business. There are a few ambitious and game changing proposals. If the needed political will and deft handling happens, Indian people could benefit greatly.

The relationship between the people of India and Japan is not limited to mere trade and commerce. I can proudly say that the earliest Indian export to Japan was Buddha’s teachings, which are still much valued. Kalari, the mother of all martial arts, has had an enduring presence in Japan through its various manifestations.

The very gentle people of Japan could be the best partners for India, not to mention the technological benefits and the work culture of absolute devotion that they have to offer. The tremendous calamity that this nation faced in the recent past, and the courage, resilience and dignity with which they handled that situation, is commendable. It could have shaken any nation to its core. The stoic silence that you feel in the presence of Japanese people speaks of a very different kind of strength. May the people of India and Japan mingle in ways that are beneficial to both the nations.

….as I finish, can feel a mild tremor of earth quaking. That is Japan for you.

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जहरीला उद्देश्य

 

ओ सर्पराज

जब जरूरत थी तो तुमने मेरा जीवन ले लिया

पर तुम्हारा विष मुझे जीवन में

कुछ यूं वापस लाया, कि कुछ ही जान पाएंगे

जब भी तुम्‍हारा दीदार होता है, मेरा जीवन एक पृष्ठ पलटता है

अब मेरे लिए तुमने क्या संजोया है

कि तुम आए हो

और यह समय है परिवर्तन की बयार के लिए

मैं अभी भी महसूस कर सकता हूं वह विष

अपने रक्त में

क्या मैं सफल हो पाउंगा मथने में

अनाज से भूसा

और अनश्‍वर से नश्‍वर को

 

***

 

मेरा जीवन हमेशा से बारह वर्षीय चक्रों में स्वयं को व्यवस्थित करता रहा है, और हर नये चक्र के प्रारंभ में, कई रूपों में नाग की उपस्थिति हमेशा ही होती है। कई बार ऐसा हुआ है, और इतने अजीब तरीकों से कि उसकी उपस्थिति के महत्त्व को तार्किक अभिव्‍यक्‍ति के रूप में मात्र संयोग नहीं कहा जा सकता। यह होना तार्किक अभिव्‍यक्‍ति के काफी परे है, यह जीवन की समग्र योजना में बिलकुल ठीक बैठता है।

कई बार, बिलकुल सटीक दिखाई देने वाले तर्कों से मैंने निर्णय लेने की गलती की है। लेकिन हमेशा ही, ऐसे गलत कृत्य उसके द्वारा विफल कर दिए गए हैं, और वह मुझे हमेशा ही रास्ते पर वापस ले आया है। उसे अपने पर्टनर (साथी) के रूप में पाने का लाभ और सबसे अधिक, बेफिक्र सहज भाव में होने की स्वतंत्रता, केवल उस आश्वासन के कारण है कि उसकी उपस्थिति वह पटरियां हैं जिन पर मेरा जीवन दौड़ता है। कुछ गलत या असफल नहीं हो सकता, आप देखेंगे। जीवन हो या मृत्यु, मैं गरिमा से स्वीकार कर लूंगा, क्योकि यह उसकी ही इच्छा है।

3 सितंबर को हजारों लोगों से आश्रम झूम उठा जो हर जगह से आए थे। उनका उत्साह और प्रेम बिलकुल अबाध है। शिव की कृपा के बाद, यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी आशीष है—लोगों के प्रेम का उद्गार।

अब इडिया-जापान ग्लोबल पार्टनरशिप समिट के लिए जापान में हूं। दोनों देशों के लिए, और खासकर भारत के लिए संभावनाओं से भरा एक कार्यक्रम।

जापानी सहभागिता अपने उच्चतम स्तर पर थी–उनके प्रधानमंत्री और चार पूर्व प्रधानमंत्री हिस्सा ले रहे थे। भारतीय नेतृत्व के बारे में ऐसा नहीं कह सकता, जबकि कुछ भारतीय राज्यों ने अथाह सहयोग और लाभप्रद साझेदारियों की अच्छी पेशकश की। दक्षिणी राज्यों की सहभागिता लगभग नगण्य थी।

यह शिखरवार्ता एक महत्त्वपूर्ण घटना थी जो कि भारत के व्यापार करने के तरीके में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। कुछ बड़े और परिवर्तनशाली प्रस्ताव रखे गए। यदि आवश्‍यक राजनैतिक इच्छा हो और निपुण संचालन हो जाता है, तो भारतीय लोग बहुत लाभ उठा सकते हैं।

भारत और जापान के लोगों का परस्पर संबंध केवल व्यापार और विनिमय तक ही सीमित नहीं है। मैं गर्व से कह सकता हूं कि जापान के लिए सबसे पहला भारतीय निर्यात था: बुद्ध की शिक्षा, जो अभी भी बहुत सम्मानित हैं। कलरी, मार्शियल आर्टस् (युद्ध कला) की जननी, की भी अपने कई रूपों में एक चिरस्थाई उपस्थिति जापान में रही है।

जापान के अति संभ्रात लोग भारत के लिए सबसे अच्छे पार्टनर हो सकते हैं, और यह उल्लेखनीय है कि उनके पास देने के लिए तकनीकी उपलब्धियां और पूरे समर्पण के साथ कार्य करने की संस्कृति है। अभी हाल ही में जिस बड़ी विपदा का सामना इस देश को करना पड़ा, और जिस साहस लचीलेपन और गरिमा से उन्होंने स्थिति को संभाला वह प्रशंसनीय है। ऐसी विपदा किसी भी देश को भीतर तक हिला गई होती। जापानी लोगों में आप जिस संयमी मौन की मौजूदगी महसूस करते हैं वह किसी और ही ताकत का बयान करती है। आशा है कि भारत और जापान के लोग इस तरह से घुले-मिलें कि दोनों देशों के लिए लाभदायी हो।

…जैसे मैं यह पूरा कर रहा हूं, पृथ्वी के हिलने का हलका सा कंपन महसूस कर सकता हूं। यह है जापान।

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அன்பும் அருளும்,

Sadhguru
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