योग अभ्यास से पहले रखें 5 बातों का ध्यान

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सद्‌गुरुसद्‌गुरु बताते हैं कि योग अभ्यास करने से पहले किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि हमें अधिक से अधिक लाभ मिले :

योग अभ्यास करने पर आप अपने भीतर और अपने आस-पास की दुनिया के साथ तालमेल की एक गहरी भावना का अनुभव कर सकते हैं। हालांकि इसे शुरू करने से पहले यह जरूरी है कि आपके अंदर और बाहर सही माहौल हो। अपने योग अभ्यास का अधिकतम लाभ उठाने के लिए आपको ये 5 बातें याद रखनी चाहिए:

1. आपका पेट खाली और साफ हो

योग सिर्फ कसरत नहीं, बल्कि मानव ऊर्जा प्रणाली को बेहतर करने का एक तरीका है। जैसा कि सद्‌गुरु समझाते हैं, ‘अगर आप अपनी ऊर्जा को ऊपर की ओर बढ़ाना चाहते हैं तो जो चीज शरीर नहीं है, उसे शरीर से बाहर होना चाहिए।’ इसलिए यह ध्यान रखें कि योग अभ्यास हमेशा खाने से पहले (सुबह नाश्ते से पहले करना सबसे बेहतर है) और पेट साफ करने के बाद करें। साथ ही, योग अभ्यास के दौरान भी आपको भोजन-पानी नहीं लेना चाहिए।

2. स्नान करें

स्नान करना सिर्फ बदन को साफ करने के लिए नहीं होता। जब जल आपके शरीर के संपर्क में आता है, तो आपका भीतरी आयाम भी धुल जाता है। सद्‌गुरु ठंडे या गुनगुने जल से स्नान की सलाह देते हैं क्योंकि ‘त्वचा कोशिकाओं के बीच के पोर खुल जाते हैं, जो योग अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि शरीर का सेल-स्ट्रक्चर(कोशिकाओं की बनावट) ऊर्जा के एक अलग आयाम से चार्ज हो जाए।’

3. ढीले आरामदेह कपड़े पहनें

जैसा कि हमने देखा, योग व्यक्ति की ऊर्जा प्रणाली पर काम करता है, ढीले-ढाले कपड़े पहनने से इस प्रक्रिया में मदद मिलती है। सद्‌गुरु कहते हैं, ‘जब आपकी ऊर्जा आपके अंदर फैलती है, तो आप देखेंगे कि तंग कपड़े आपके शरीर को आराम नहीं देंगे। स्वाभाविक रूप से आप बहुत ढीले कपड़े पहनना पसंद करेंगे।’

4. योग अभ्यास से पहले नीम और हल्दी का सेवन

‘हल्के शहद मिले गुनगुने पानी के साथ नीम और हल्दी का सेवन करने से सेल-स्ट्रक्चर(कोशिकाओं की बनावट) की सफाई हो जाती है। साथ ही कोशिकाओं के बीच फैलाव हो जाता है जिससे वे ऊर्जा को सोख पाते हैं। जब आप साधना करते हैं, तो यह फैलाव मांसपेशियों में लचीलापन लाता है। यह लचीलापन धीरे-धीरे आपके शरीर को एक अधिक शक्तिशाली संभावना में बदलने में मदद करता है।’ – सद्‌गुरु

5. आह्वान या प्रार्थना के साथ शुरू करें

आह्वान योग अभ्यास से पहले आपको सबसे अच्छी भीतरी स्थिति में लाने का तरीका है। योगिक संस्कृति में आह्वान आम तौर पर संस्कृत में होते हैं। यह एक प्राचीन भाषा है जिसमें ध्वनियाँ सीधे आकारों से जुड़ी होती हैं। मानव प्रणाली को जाग्रत करने के लिए ध्वनियों का इस्तेमाल नाद योग का आधार है। आह्वान नाद योग का बहुत सरल रूप है। आप इस आह्वान के साथ शुरुआत कर सकते हैं:

असतो मा सदगमय
तमसो मा ज्योर्तिगमय
मृत्योर्मा अमृतमगमय

यानी मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो
मुझे अंधकार (अज्ञानता) से प्रकाश (ज्ञान) की ओर ले चलो
मुझे मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलो


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