तंत्र एक योग है – सेक्स या शराब नहीं

Sadhguruएक अरसे से तंत्र की बड़ी गलत व्याख्या की जा रही है, खास तौर से पश्चिमी देशों में, और इसे उन्मुक्त सेक्स के रूप में पेश किया जा रहा है। सद्‌गुरु स्पष्ट कर रहे हैं कि तंत्र वास्तव में क्या है और क्या नहीं। 

 सद्‌गुरु:
दुर्भाग्य से पश्चिमी देशों में तंत्र को इस प्रकार पेश किया जा रहा है कि इसका अर्थ उन्मुक्त सेक्स है। इसका बहुत गलत मतलब निकाला गया है। ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि तंत्र के बारे में ज्यादातर पुस्तकें उन लोगों ने लिखी हैं, जिनका मकसद बस किताबें बेचना है। वे किसी भी अर्थ में तांत्रिक नहीं हैं। तंत्र का शाब्दिक अर्थ होता है तकनीक या टेक्नालाजी। यह इंसान की अंदरूनी टेक्नालाजी है। तंत्र की विधियां व्यक्तिपरक (सब्जेक्टीव) होती हैं, विषयपरक (ऑब्जेक्टीव) नहीं। लेकिन आज-कल समाज में यह समझा जा रहा है कि तंत्र शब्द का अर्थ है परंपरा के विरुद्ध या समाज को मंजूर ना होने वाली विधियां। मगर बात बस इतनी है कि तंत्र में कुछ खास पहलुओं का खास तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है। यह योग से कतई अलग नहीं है। दरअसल योग के एक छोटे-से अंग को तंत्र-योग कहा जाता है।

लोगों की यह सोच कि “मेरे लिए सेक्‍स जरूरी है, इसलिए मैं तांत्रिक रास्ता अपनाऊंगा”, बिलकुल बेवकूफी भरा है। ऐसा नहीं है कि तंत्र में आगे बढ़ने के लिए लोग सिर्फ सेक्स का उपयोग करते हैं। 

तंत्र और सेक्स

लोगों की यह सोच कि “मेरे लिए सेक्‍स जरूरी है, इसलिए मैं तांत्रिक रास्ता अपनाऊंगा”, बिलकुल बेवकूफी भरा है। ऐसा नहीं है कि तंत्र में आगे बढ़ने के लिए लोग सिर्फ सेक्स का उपयोग करते हैं। वे आगे बढ़ने के लिए हर पहलू का उपयोग करते हैं। दुर्भाग्य से कुछ लोग ऐसे हैं, जो इस रास्ते की ओर गलत मकसद से आकर्षित होते हैं। वे इस रास्ते पर इसलिए आते हैं, क्योंकि वे अपनी सेक्स की भूख को आध्यात्मिक जामा पहनाना चाहते हैं। आप अघ्‍यात्‍म के नाम पर खुद के साथ ऐसी बेहूदी चीजें क्‍यों कर रहे हैं? अपनी बायोलाजी को बायोलाजी की तरह ही लें, उसको दूसरा नाम देने की जरूरत नहीं!

तंत्र

तंत्र विद्या

तंत्र-योग का सरल सिद्धांत यह है कि जो कुछ आपको नीचे गिरा सकता है, वह आपको ऊपर भी उठा सकता है। कोई इंसान आम तौर पर जिन कारणों से अपनी जिंदगी में डूबा रहता है, वह है- भोजन, शराब और सेक्स। तंत्र-योग इंसान को ऊपर उठाने के लिए इन्हीं तीन साधनों का उपयोग करता है। लेकिन एक बार कुछ विशेष पदार्थों का सेवन शुरू कर लेने के बाद लोगों को एक विशेष अवस्था में होना होता है, वरना इनकी लत लगते देर नहीं लगती। इसके लिए कड़ा अनुशासन चाहिए, इतना कड़ा अनुशासन कि ज्यादातर लोगों के लिए इसकी कोशिश करना तक मुमकिन नहीं होता। लोग जब ऐसा रास्ता अपनाते हैं, तो अपनाने वाले 100 में से 99 लोग पियक्कड़ बन जाते हैं।

बहरहाल, इसको लेफ्ट-हैंड तंत्र कहा जाता है, जोकि एक अपरिपक्व टेक्नालाजी है जिसमें अनेक कर्मकांड होते हैं। एक राइट-हैंड तंत्र भी होता है, जो अत्यंत परिष्कृत टेक्नालाजी है। इन दोनों की प्रकृति बिलकुल अलग है। राइट-हैंड तंत्र ज्यादा आंतरिक और ऊर्जा आधरित होता है, यह पूरी तरह से आपके बारे में है। इससे कोई विधि या बाहरी काम नहीं जुड़ा होता। क्या यह तंत्र है? एक तरह से है, लेकिन योग शब्द में ये सब एक साथ शामिल हैं। जब हम योग कहते हैं, तो किसी भी संभावना को नहीं छोड़ते – इसके अंदर सब कुछ है। बस इतना है कि कुछ विकृत लोगों ने एक खास तरह का तंत्र अपनाया है, जो विशुद्ध रूप से लेफ्ट-हैंड तंत्र है और जिसमें शरीर का एक विशेष उपयोग होता है। उन्होंने बस इस हिस्से को ले कर उसे बढ़ा-चढ़ा दिया और उसमें तरह-तरह की अजीबोगरीब सेक्स क्रियाएं जोड़ कर किताबें लिख डालीं और कहा, “यही तंत्र है।” नहीं, यह तंत्र नहीं है।

 तो तंत्र कोई उटपटांग अजूबा नहीं है। तंत्र एक खास तरह की काबिलियत है। उसके बिना कोई संभावना नहीं हो सकती।

तंत्र साधना का महत्त्व

तंत्र का मतलब होता है कि आप कामों को अंजाम देने के लिए अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप अपने दिमाग को इतना धारदार बना लें कि वह हर चीज को आरपार देख-समझ सके, तो यह भी एक प्रकार का तंत्र है। अगर आप सबसे प्रेम करने योग्य बनने की खातिर अपनी ऊर्जा को अपने दिल पर असर करने दें और आपमें इतना प्यार उमड़ सके कि आप हर किसी को उसमें सराबोर कर दें, तो वह भी तंत्र है। अगर आप अपने भौतिक शरीर को कमाल के करतब करने की खातिर तीव्र शक्तिशाली बना लें, तो यह भी तंत्र है। या अगर आप अपनी ऊर्जा को इस काबिल बना लें कि शरीर, मन या भावना का उपयोग किए बिना ये खुद काम कर सके, तो यह भी तंत्र है।

तो तंत्र कोई उटपटांग अजूबा नहीं है। तंत्र एक खास तरह की काबिलियत है। उसके बिना कोई संभावना नहीं हो सकती। इसलिए सवाल यह है कि आपका तंत्र कितना परिष्कृत है? अगर आप अपनी ऊर्जा को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो आपको या तो दस हजार कर्मकांड करने पड़ेंगे या आप यहीं बैठे ऐसा कर सकते हैं। सबसे बड़ा अंतर यही है। सवाल सिर्फ हल्की या ऊंची टेक्नालॉजी का है, लेकिन तंत्र वह विज्ञान है, जिसके बिना कोई आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं हो सकती।


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