‘अंगमर्दन’ शब्द का अर्थ अपने हाथ-पैरों या शरीर के अंगों पर नियंत्रण होना है। आप इस दुनिया में जो भी काम करना चाहते हैं, वह आप कितनी अच्छी तरह करेंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका अपने अंगों पर कितना नियंत्रण है।
अंगमर्दन योग की एक अनूठी प्रणाली है जो आजकल लगभग पूरी तरह लुप्त हो चुकी है। क्लासिकल यानी शास्त्रीय योग में पारंपरिक तौर पर अंगमर्दन हमेशा से रहा है। वह आसनों की तरह नहीं है, वह बहुत कठोर अभ्यास है जहां आपको किसी साधन की जरूरत नहीं पड़ती। आप बस अपने शरीर का इस्तेमाल करके अपने अंदर शारीरिक बल तथा दृढ़ता का एक बिल्कुल अलग स्तर पैदा कर सकते हैं।

अंगमर्दन में आप मांसपेशियों का लचीलापन बढ़ाने के लिए अपने शारीरिक भार और बल का इस्तेमाल करते हैं। यह सिर्फ पच्चीस मिनट की प्रक्रिया होती है, जो आजकल हम सिखाते हैं। यह स्वास्थ्य और खुशहाली पर बहुत चमत्कारी असर करता है। यह एक अद्भुत प्रक्रिया है और अपने आप में संपूर्ण है। आपको सिर्फ एक छह गुना छह की जगह चाहिए, और बस आपका शरीर ही सब कुछ है। इसलिए आप जहां भी हों, वहां इसे कर सकते हैं। यह किसी भी वेट ट्रेनिंग की तरह प्रभावशाली ढंग से शरीर को पुष्ट बनाता है और शरीर पर कोई अनावश्यक जोर नहीं डालता।

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इसका उद्देश्य खुद को ऐसी स्थिति तक पहुंचाना है जहां आपके शरीर की प्रणाली पूरी तरह काम कर रही होती है क्योंकि केवल तभी आपके बोध के स्तर को ऊपर उठाया जा सकता है। आधे-अधूरे शरीर या आधे-अधूरे जीवन को अनुभव के पूर्ण स्तर तक नहीं ले जाया जा सकता।
अगर आप इसे सिर्फ एक कसरत के रूप में भी देखें तो भी अंगमर्दन निश्चित रूप से कसौटी पर खरा उतरेगा। लेकिन मांसपेशियों को मजबूत बनाना और मोटापा कम करना इसके सिर्फ छोटे-मोटे फायदे हैं। आप जो भी साधना कर रहे हों, चाहे वह अंगमर्दन हो या कुछ और, उसके बारे में सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि हम ऊर्जा प्रणाली को बढ़ाते हुए उसे एक खास स्तर तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, जहां उसकी अखंडता बनी रहे। इसका उद्देश्य खुद को ऐसी स्थिति तक पहुंचाना है जहां आपके शरीर की प्रणाली पूरी तरह काम कर रही होती है क्योंकि केवल तभी आपके बोध के स्तर को ऊपर उठाया जा सकता है। आधे-अधूरे शरीर या आधे-अधूरे जीवन को अनुभव के पूर्ण स्तर तक नहीं ले जाया जा सकता।

‘अंगमर्दन’ शब्द का अर्थ अपने हाथ-पैरों या शरीर के अंगों पर नियंत्रण होना है। आप इस दुनिया में जो भी काम करना चाहते हैं, वह आप कितनी अच्छी तरह करेंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका अपने अंगों पर कितना नियंत्रण है। मैं किसी स्पोर्ट्स टीम में शामिल होने या ऐसे किसी काम की बात नहीं कर रहा हूं। आप अपने  गुजर-बसर के लिए जो काम करते हैं और अपनी मुक्ति के लिए जो काम करते हैं, इन दोनों में फर्क है। अगर आप अपनी मुक्ति के लिए, या अपने आस-पास हर किसी की मुक्ति के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो आपको अपने अंगों पर कुछ नियंत्रण होना चाहिए। हाथ-पैरों पर नियंत्रण होने का मतलब यह नहीं है कि आप हृष्ट-पुष्ट हो जाएंगे या आप पहाड़ पर चढ़ सकते हैं। यह भी हो सकता है लेकिन मूल रूप से यह शरीर की ऊर्जा संरचना को मजबूत करने के लिए होता है।

बहुत से लोग बड़े-बड़े अनुभव पाना चाहते हैं, लेकिन वे अपने शरीर को उस रूप में ढालने को तैयार नहीं जो उन अनुभवों को संभाल पाने में समर्थ हो। योग में, आप किसी अनुभव के पीछे नहीं भागते, आप सिर्फ तैयारी करते हैं।
उदाहरण के रूप में, अगर कोई आदमी बगल से गुजरता है, तो आप उसके चलने के तरीके से ही साफ-साफ पता लगा सकते हैं कि उसका बदन कसरती है या नहीं। अगर आप किसी इंसान का चेहरा देखें, तो आपको पता चल सकता है कि उसका मन स्वस्थ है या नहीं। इसी तरह, अगर किसी को आप काफी करीब से देखें, तो आपको स्पष्ट रूप से पता चल सकता है कि उस व्यक्ति की ऊर्जा जागृत है या नहीं। वे क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते, यह इसी से तय होता है। पूरी तरह नियंत्रण होने का मतलब है कि आप अपनी ऊर्जा को सक्रिय कर सकते हैं। अगर आप सिर्फ चुपचाप यहां बैठें रहें, तो शरीर खुद काम करेगा, आपको जाकर कोई काम करने की जरूरत नहीं है।

अगर कृपा स्वयं आप तक पहुंचना चाहे, तो आपके पास एक उपयुक्त शरीर का होना जरूरी है। अगर आपके पास उपयुक्त शरीर नहीं है और कृपा आपके ऊपर खूब बरसे, तो आप उसे झेल नहीं पाएंगे। बहुत से लोग बड़े-बड़े अनुभव पाना चाहते हैं, लेकिन वे अपने शरीर को उस रूप में ढालने को तैयार नहीं जो उन अनुभवों को संभाल पाने में समर्थ हो। योग में, आप किसी अनुभव के पीछे नहीं भागते, आप सिर्फ तैयारी करते हैं। अगर आप केवल कहने के लिए नहीं, सचमुच आध्यात्मिक प्रक्रिया में गंभीर हैं, तो आपको अपने अंगों पर कुछ नियंत्रण होना चाहिए।

'अंगमर्दन', ईशा योग केंद्र में 21 दिन का आवासीय हठ योग कार्यक्रम में सिखाया जाता है। यह कार्यक्रम एक अवसर है पांच प्राचीन और प्रभावशाली अभ्यास - उपयोग, अंगमर्दन, सूर्यक्रिया, योगासन और भूतशुद्धि सीखने का।

दिनांक: 4 से 25 मई 2014

अधिक जानकारी के लिए देखें और इस कार्यक्रम में पंजीकरण के लिए hatayoga21day@ishayoga.org पर ई-मेल करें।