आदियोगी आलयम – योग साधना की भव्‍य भूमि

आदियोगी आलयम – योग साधना की भव्‍य भूमि

कोयंबटूर के नजदीक वेलियंगिरि पर्वतों की तराई में स्थित ईशा योग केंद्र में 24-25 दिसंबर सन् 2011 को सद्‌गुरु ने आदियोगी आलयम् की प्राण-प्रतिष्ठा की। यह आलयम् मानव–चेतना के स्तर को ऊपर उठाने का काम करेगा। 82,000 वर्गफुट स्थान में निर्मित बनावट और रूपरेखा की दृष्टि से अनूठा आदियोगी आलयम मानवता को एक अनमोल भेंट है। यह ‘आध्यात्मिकता की एक बूंद’ हर किसी तक पहुँचाने की सद्‌गुरु के सपने को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।

“योग” शब्द को ले कर अनेक गलत धारणाएं लोगों के मन में हैं। ज्यादातर लोगों को लगता है कि योग का मतलब कुछ कठिन शारीरिक आसन करना है। योग का अर्थ शरीर को तोड़-मरोड़ लेना, सांस रोक लेना या सिर के बल खड़े हो जाना नहीं है। योग व्यायाम का कोई रूप नहीं है, यह एक पूरी टेक्नॉलॉजी है। योग आपको समझाता है कि आप स्वयं को अधिकतम ऊँचाई तक कैसे पहुंचा सकते हैं। योग का शाब्दिक अर्थ है “एक हो जाना”। हर चीज के साथ मिल कर एक हो जाना ही योग है। लेकिन सब-कुछ भला एक कैसे हो सकता है?

केवल योगी एक ऐसा व्यक्ति है जो तर्कों या श्रद्धा और विश्वास से काम नहीं चलाता, वह वास्तविकता को जानता चाहता है।

आज आधुनिक विज्ञान बता रहा है कि संपूर्ण अस्तित्व केवल एक ही ऊर्जा है जो लाखों-करोड़ों रूपों में अभिव्यक्त होती है। विश्व के सभी धर्म जाने कब से यह कहते आ रहे हैं कि ईश्वर सब जगह है। आप चाहे यह कहें कि ईश्वर सब जगह है या यह कि सारा कुछ केवल एक ही ऊर्जा का रूप है, एक ही सच को कहने के दो अलग तरीके हैं। वैज्ञानिकों ने इस सत्य का अनुभव नहीं किया है; बल्कि वे गणित के जरिए इस नतीजे पर पहुंचे हैं। किसी धार्मिक व्यक्ति ने भी इस यथार्थ को अनुभव नहीं किया है, मगर उसको विश्वास है कि सब-कुछ ईश्वर ही है। केवल योगी एक ऐसा व्यक्ति है जो तर्कों या श्रद्धा और विश्वास से काम नहीं चलाता, वह वास्तविकता को जानता चाहता है।

वेलियंगिरि पर्वतों की तराई में स्थित आदियोगी आलयम् 

योग विद्या ने जीवन के कई आयामों की खोज की पर आज की दुनिया ने केवल शारीरिक पक्ष को ही योग मान लिया है। आधुनिक संसार की संपूर्ण यात्रा आत्मा से शरीर तक आने की है। इसे हीं हम उलटना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि मनुष्य अपनी यात्रा शरीर से शुरू करें और अपनी भीतरी प्रकृति की ओर जाये। आजकल ज्यादातर लोग अपने शरीर पर ही सबसे अधिक ध्यान दे रहे हैं। जो लोग ऐसा करते हैं वे आगे चल कर कभी-न-कभी भयंकर कष्टों को झेलते हैं, क्योंकि वे अपने शरीर में चाहे जितना समय और ऊर्जा लगा दें समय के साथ इस शरीर का क्षय होना ही है।

हमने आदियोग आलयम का निर्माण इसीलिए किया है कि प्राचीन योग को उसके शुद्धतम रूप में वापस लाया जा सके। आज दुनिया में किये जा रहे स्टूडियो योग या किताबी योग या दूसरे प्रकार के योग की बात हम नहीं कर रहे हैं, बल्कि उस प्राचीन योग विद्या की बात कर रहे हैं जो एक बहुत शक्तिशाली विज्ञान है। लेकिन ऊर्जा की असाधारण समझ के बिना योग की शिक्षा नहीं दी जा सकती। यदि आप खुद को ऊर्जा का एक पात्र बनाए बिना योग की शिक्षा देते हैं तो वह योग नहीं है। वह सिर्फ एक दिखावा है, एक तमाशा है। सारी दुनिया में आजकल यही तमाशा चल रहा है।

 इसी तरह से योग में एक प्राचीन विज्ञान है और यही असली विज्ञान है।

आज हमारे पास आई-फोन और दूसरे उपकरण इसलिए हैं कि वैज्ञानिक विकास के पहले पचास वर्षों में वैज्ञानिकों ने भौतिक शास्त्र के बुनियादी सिद्धातों पर काम किया। केवल भौतिक शास्त्र ही विज्ञान है, बाकी सब उसकी शाखाएं हैं। लेकिन आजकल बुनियादी भौतिक शास्त्र का अध्ययन करने वाले लोग ही कितने रह गये हैं। आप देखेंगे कि तीस साल बाद अगर मौलिक भौतिक शास्त्र का अध्ययन करने वाले लोग ज्यादा नहीं बचे तो विज्ञान में से कुछ नया नहीं निकलेगा, क्योंकि तब मौलिक वैज्ञानिक का ज्ञान ही नहीं रहेगा।

इसी तरह से योग में एक प्राचीन विज्ञान है और यही असली विज्ञान है। लेकिन आजकल इस मौलिक योग विज्ञान की तरफ किसी का ध्यान नहीं  है। लोग सिर्फ इससे लाभ पाने की कोशिश में लगे हैं। यह ऐसा ही है जैसे यदि  एक गाय को कोई पाले तो उसका दूध दुह सकता है। लेकिन कुछ समय बाद लोग केवल थन से मतलब रखेंगे गाय से नहीं। फिर उनके पास गाय नहीं होगी, केवल प्लास्टिक का थन होगा और वे उसको दुहते जायेंगे। कुछ समय बाद दूध आना बंद हो जायेगा। धीरे-धीरे हमारा ध्यान ऐसा ही हो चुका है – हम भूल चुके हैं कि दूध आखिर देता कौन है।

इसलिए आदियोगी आलयम का निमार्ण योग विज्ञान के लिए किया गया है। आप केवल यहां हॉल  में बैठे-बैठे, यहां हो रही गतिविधियों के साथ अपना तालमेल बिठा सकें तो भी आप सारे योग-सूत्र जान जायेंगे। यदि आप अपने शरीर की प्रकृति को ध्यान से समझना शुरू कर दें तो यह स्थान आपको इतनी तेजी से और इतने आगे तक ले जायेगा जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी। किसी भी तरह की ध्यान-प्रक्रिया जो किसी खास खोज से जुड़ी हो, असाधारण तरीके से पूरी हो जायेगी। यदि आप एक कदम आगे बढ़ा कर खोज करेंगे तो यह स्थान आपको एक और कदम आगे ले जायेगा। यह ऐसा ही है मानो सौ रुपये कमा लेने पर आपको सौ रुपये का बोनस मिल जाये। अच्छा सौदा है न?

संपादक की टिप्पणी:

20 फरवरी से 23 फरवरी तक ईशा योग केंद्र में सद्‌गुरु योगेश्वर लिंग की प्रतिष्ठा करने वाले हैं। इन्हीं दिनों यक्ष महोत्सव भी आयोजित होगा, और इसका सीधा प्रसारण आप यहां देख सकते हैं।

महाशिवरात्रि की रात होने वाले आयोजनों का सीधा प्रसारण आप यहां देख सकते हैं।

महाशिवरात्रि की रात के लिए खुद को तैयार करने के लिए आप एक सरल साधना कर सकते हैं। सात दिनों की साधना 18 फरवरी से शुरू हो रही है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी के लिए यहां जाएं


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