तंत्र-विद्या : कितनी बुरी कितनी भली

Ostara_Altar_by_ReanDeanna

सद्गुरुतंत्र-विद्या जिसे अंग्रेजी में ऑकल्ट कहते हैं, को लेकर कई तरह के विचार लोगों के मन में आते हैं। कुछ तो इसे सीखने के लिए व्यग्र रहते हैं तो कुछ लोग इसे बहुत बुरा समझते हैं। तो आखिर माजरा क्या है ? क्या यह बुरा है या फिर फायदेमंद ? आइए जानते हैं सद्‌गुरु से

तंत्र-विद्या (ऑकल्ट) एक टेक्नोलॉजी है, लेकिन एक अलग स्तर की। इसको आध्यात्मिक मार्ग से हमेशा दूर रखा गया है। जब कभी आध्यात्मिक मार्ग पर चल रहे किसी साधक ने इस विद्या की ओर जरा-सा भी रुझान दिखाया, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए गए ताकि वो दोबारा ऐसा न करे।

‘ऑकल्ट’ यानी तंत्र-विद्या का एक हिस्सा है। अंग्रेजी शब्द ‘ऑकल्ट’ का कोई बिलकुल स्पष्ट और निश्चित अर्थ नहीं है। दरअसल ऑकल्ट का मतलब सिर्फ एक खास काबिलियत है, लेकिन चूंकि कुछ लोगों ने इस काबिलियत का गैरजिम्मेदारी से और गलत इस्तेमाल किया, इसलिए ‘ऑकल्ट’ शब्द का मतलब कुछ बुरा, कुछ नकरात्मक समझा जाने लगा।

तंत्र-विद्या (ऑकल्ट) एक टेक्नोलॉजी है, लेकिन एक अलग स्तर की। इसको आध्यात्मिक मार्ग से हमेशा दूर रखा गया है। जब कभी आध्यात्मिक मार्ग पर चल रहे किसी साधक ने इस विद्या की ओर जरा-सा भी रुझान दिखाया, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए गए ताकि वो दोबारा ऐसा न करे

तंत्र-विद्या को आम बोलचाल की भाषा में जादू-टोना समझ सकते हैं। यह विद्या महज एक टेक्नोलॉजी है। आज आप भारत में अपना मोबाइल फोन उठा कर जब चाहें अमेरिका में किसी से बात कर सकते हैं। तंत्र-विद्या भी कुछ ऐसा ही है – अंतर बस यही है कि इसमें आप सेलफोन के बिना ही अमेरिका में किसी से बात कर सकते हैं। यह थोड़ी ज्यादा उन्नत टेक्नोलॉजी है। वक्त के साथ जब आधुनिक टेक्नोलॉजी का और विकास होगा, तब उसके साथ भी ऐसा ही होगा। अभी ही मेरे पास एक ब्लू -टूथ मेकेनिज्म है, जिसमें किसी का नाम बोलने भर से मेरा फोन उसका नंबर डायल करने लगता है। एक दिन ऐसा आएगा, जब इसकी भी जरूरत नहीं रह जाएगी। बस, शरीर में एक छोटा-सा इम्प्लांट लगाने से सारा काम हो जाएगा।

तंत्र-विद्या भी इसी तरह एक टेक्नोलॉजी है, लेकिन एक अलग स्तर की, पर है भौतिक ही। यह सब करने के लिए आप अपने शरीर, मन और ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी चाहे जो हो, आप अपने शरीर, मन और ऊर्जा का ही इस्तेमाल करते हैं। आम तौर पर आप अपनी जरूरतों के लिए दूसरे पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन एक सेलफोन या किसी टेक्नोलॉजी के उत्पादन के लिए जिन बुनियादी पदार्थों का उपयोग होता है, वे शरीर, मन और ऊर्जा ही होते हैं

शुरू-शुरू में फोन तैयार करने के लिए आपको बहुत तरह के सामान की जरूरत होती थी। अब हम लगातार इस सामान की मात्रा घटाने की कोशिश कर रहे हैं। एक दिन ऐसा आएगा, जब हमें किसी भी सामान की जरूरत नहीं पड़ेगी – यही होगी तंत्र-विद्या। आधुनिक विज्ञान और तंत्र-विद्या कहीं न कहीं जाकर जरूर मिलेंगे, अगर इनको ठीक से समझा जाए, समझ में थोड़ा सा बदलाव लाया जाए।

भौतिक का अनेक प्रकार से उपयोग किया जा सकता है। मिसाल के तौर पर अगर आप इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को देखें, तो जो चीज चट्टान जितने बड़े आकार से शुरू हुई थी, वह अब एक बहुत ही छोटे-से चिप तक पहुंच चुकी है। जितनी बातों को लिखने के लिए पूरा पहाड़ भी छोटा पड़ जाए, आज उतनी बात एक बहुत ही छोटे-से चिप में समा जाती है। भौतिक वस्तु अब सूक्ष्म होती जा रही है। जब हम भौतिकता के सबसे सूक्ष्म आयाम का उपयोग करते हैं, तो उसी को तन्त्र-विद्या कहते हैं।

शुरू-शुरू में फोन तैयार करने के लिए आपको बहुत तरह के सामान की जरूरत होती थी। अब हम लगातार इस सामान की मात्रा घटाने की कोशिश कर रहे हैं। एक दिन ऐसा आएगा, जब हमें किसी भी सामान की जरूरत नहीं पड़ेगी – यही होगी तंत्रविद्या।

दुनिया के कई हिस्सों में तंत्र-विद्या को आध्यात्मिक प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जो कि ठीक नहीं है। जब हम आध्यात्मिकता की बात करते हैं, तो हमारा मतलब भौतिकता से परे जाने का होता है। आध्यात्मिकता तो आपके भीतर एक ऐसी अनुभूति लाने के लिए है जो भौतिक नहीं है। पर तंत्र-विद्या है तो भौतिक ही, चाहे हम भौतिकता के सूक्ष्मतम आयामों का ही उपयोग क्यों न करें।

जैसे-जैसे आधुनिक टेक्नोलॉजी सूक्ष्म से सूक्ष्मतर होती जाएगी, तंत्र-विद्या की जरूरत कम होती जाएगी। मान लीजिए हजार साल पहले मैं कोयंबटूर में होता और आप दिल्ली में, और मैं आपको एक संदेश देना चाहता तो या तो आपको इतनी दूर से यात्रा करके, चलते हुए मेरे पास कोयंबटूर आना पड़ता या मुझे चलते हुए आपके पास दिल्ली जाना पड़ता। दोनों ही बातें अव्यावहारिक होतीं, इसलिए मैं थोड़ा समय खर्च कर के तंत्र-विद्या में महारत हासिल कर लेता, ताकि मैं अपना संदेश आप तक आसानी से पहुंचा सकूं। लेकिन अब मुझे ऐसा करने की जरूरत नहीं, क्योंकि मेरे पास एक सेलफोन है। मैं अभी भी इस विद्या का इस्तेमाल कर सकता हूं, लेकिन आपको इसे ग्रहण करने लायक बनाने में, ताकि आप यह संदेश बिलकुल साफ -साफ ग्रहण कर सकें और उस पर संदेह न करें, बेकार में बहुत सारा वक्त लग जाएगा। यह सब करने के बजाय मैं आपको सीधे फोन कर सकता हूं। तो यह विद्या दिन-ब-दिन बेतुकी होती जा रही है, क्योंकि आधुनिक टेक्नोलॉजी बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है।

चूंकि लोगों ने ऐसे बुरे तांत्रिकों के बारे में सुन रखा है, जिन्होंने लोगों की जिंदगी बरबाद करने की कोशिश की या जिन्होंने लोगों को बीमार बनाया और मार डाला, इसलिए जब आप तंत्र-विद्या या जादू-टोने का नाम लेते हैं, तो वे समझते हैं कि यह हमेशा बुरा होता है। सामाजिक दृष्टि से संभव है आपने ऐसे ही लोगों को देखा हो। मगर तंत्र-विद्या बहुत ऊंची श्रेणी की भी होती है। शिव एक तांत्रिक हैं। जादू-टोना एक अच्छी और लाभकारी शक्ति हो सकता है। यह अच्छा है या बुरा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसका उपयोग कौन और किस मकसद से कर रहा है।

तंत्र-विद्या योग का सबसे निम्न रूप है, लेकिन लोग सबसे पहले यही करना चाहते हैं। वे कुछ ऐसा देखना या करना चाहते हैं, जो दूसरे नहीं कर सकते। योग के शब्दों में इसका मतलब है कि उन्होंने खुद को मूलाधार से व्यक्त किया है। इस विद्या को इतना बुरा माना जाता है कि इसके पास फटकने से भी मना किया जाता है। बदकिस्मती से इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर इसी तरह से किया गया है। लेकिन कोई भी विज्ञान या टेक्नोलॉजी बुरी नहीं होती। अगर हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल लोगों की जान लेने और उनको तकलीफ देने के लिए करते हैं, तो कुछ समय बाद लगेगा कि टेक्नोलॉजी बुरी चीज है। तंत्र-विद्या के साथ यही हुआ है। बहुत ज्यादा लोगों ने अपने निजी फायदे के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया। इसलिए आम तौर पर इसको आध्यात्मिक मार्ग से दूर ही रखा जाता है।


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