ध्यान को स्थिर करने के लिए एक सरल साधना

ध्यान को स्थिर करने के लिए एक सरल साधना

सद्‌गुरुजानते हैं एक सरल साधना जिसे रोज़ करके आप धीरे धीरे ध्यान को स्थिर कर सकते हैं। ये प्रक्रिया आपको रोज़ सोने से पहले करनी है।

प्रश्न : सद्‌गुरु, मैं अपनी एकाग्रता को लेकर बहुत परेशान रहता हूं। मेरा ध्यान आसानी से भटक जाता है। मैं अपना ध्यान एक दिशा में कैसे केंद्रित करूं?

सद्‌गुरु : किसी खास दिशा में ध्यान स्थिर रखने के लिए सबसे पहले उन सभी गलत और मिथ्या धारणाओं को खत्म करना होगा, जो हमारे भीतर बनी हुई हैं। इसका मतलब हुआ कि अपने हर विश्वास को उठाकर एक तरफ रख दीजिए। आप कहेंगे कि आपके विश्वास सामाजिक जीवन के लिए उपयोगी हैं। ठीक है।

एक आत्म-ज्ञानी और एक मूर्ख में बस इतना ही अंतर होता है कि ज्ञानी व्यक्ति जानता है कि वह मूर्ख है, जबकि मूर्ख यह नहीं जानता कि वह मूर्ख है।
लोगों के बीच रहने के लिए कुछ लेन-देन करना पड़ता है, उसके लिए आपको कुछ चीजों पर विश्वास करना होता है, यहां तक तो ठीक है। लेकिन इसके अलावा अपनी हर धारणा को कम कीजिए। जब आप अपने विश्वास व धारणाओं को अलग रख देते हैं तो आपको ऐसा लगेगा कि आप भोंदू या निपट मूर्ख हैं। अगर आपको ऐसा लगता है तो बहुत अच्छा है। यह जानना बहुत अच्छा है कि आप एक निपट मूर्ख हैं। एक आत्म-ज्ञानी और एक मूर्ख में बस इतना ही अंतर होता है कि ज्ञानी व्यक्ति जानता है कि वह मूर्ख है, जबकि मूर्ख यह नहीं जानता कि वह मूर्ख है। बस यही एक बड़ा अंतर है और यह जमीन आसमान का अंतर है। लोगों की समस्या सिर्फ इतनी है कि उनको पता ही नहीं होता कि वे किस जाल में फंसे हैं। अगर उन्हें पता होता तो क्या वे उसमें फं से रहना चाहते? वे बिल्कुल वहां नहीं रहना चाहते।

सरल ध्यान प्रक्रिया

सिर्फ इतना कीजिए कि आज रात जब आप सोने जाइए तो उससे पहले आप बिस्तर पर बैठ कर मानसिक तौर पर हर वो चीज उठाकर एक तरफ रख दीजिए, जो आप नहीं हैं। अपने से जुड़ी हर चीज, जैसे अपनी जाति, अपना धर्म, अपनी राष्ट्रीयता, अपना शरीर, अपना मन, अपना विचार, अपनी भावनाएं, अपनी सोच, अपना दर्शन, अपने भगवान, अपना शैतान, यानी हर चीज को खुद से अलग करें और बस सो जाएं।

सिर्फ इतना करने की जरूरत है कि आपको अपना ध्यान ‘जो आपने अब तक इकठ्ठा किया हुआ है’ उससे हटाकर ‘जो आप वास्तव में हैं’ उस पर लगाना है।
यह काम रोज कीजिए, आपको अनुभव हो जाएगा। सिर्फ सोना है, इससे आसान तरीका मैं आपको नहीं दे सकता। बस आप ऐसे ही सो जाएं – जीवन के एक अंश के रूप में बस ऐसे ही सो जाइए, न एक स्त्री के रूप में, न एक पुरुष के रूप में, न इस रूप में न उस रूप में, बस सामान्य रूप से सो जाइए। दरअसल, जब आप सोते हैं तो आप ऐसे ही होते हैं। मैं ये कहना चाहता हूं कि आप जब नींद में प्रवेश करें तब भी आप ऐसे ही रहें। इसके लिए आपको इतना करना है कि जो आपकी स्वाभाविक स्थिति नींद में होने वाली है, वही स्थिति आप सोने से सिर्फ कुछ मिनट पहले तैयार कीजिए। आप देखेंगे कि इसमें कुछ मेहनत लगेगी, लेकिन आप इसे कीजिए। वैसे भी जब आप नींद में होते हैं तो आपके सोने का न कोई चाइनीज तरीका होता है न अंग्रेजी तरीका। आप अंग्रेजी या फ्रेंच में नहीं सोते हैं। जब आप सोते हैं तो ऐसे कि मानो आप कुछ हैं ही नहीं। आप उसी तरह से ‘कुछ हैं ही नहीं’ के अंदाज में नींद के करीब जाइए। जैसा मैंने कहा इस काम में कुछ मेहनत लगेगी, लेकिन इसे आज से ही करना शुरू कर दीजिए, क्योंकि कल के बारे में कौन जानता है?

कल का कुछ नहीं पता

किसे पता है कि कल आप उठेंगे या नहीं? लाखों लोग कल सुबह का सूरज नहीं देखेंगे, क्योंकि उनकी जिंदगी आज ही खत्म हो जाएगी। इसकी क्या गारंटी है कि उन लाखों लोगों में मैं या आप नहीं होंगे? हालांकि हम लोग अपने बारे में ऐसा नहीं सोचते, लेकिन ऐसा होना संभव है।

नींद में जाना – यानी आपको अगले कुछ घंटों के लिए मरना है। बहरहाल, हम अगले जन्म में विश्वास करते हैं। कल की सुबह एक नया जन्म है। है कि नहीं?
हालांकि हम नहीं चाहते कि ऐसा कुछ हो, लेकिन ऐसा हो भी सकता है। लेकिन मौत एक ऐसी चीज है, जो हमेशा दूसरों के साथ घटित होती है। दूसरे लोग मरेंगे, हम और आप कहां मरेंगे? नहीं-नहीं दूसरे लोग मरेंगे। नहीं, मैं और आप मरेंगे। हर दिन आप नींद में ऐसे जाते हैं, जैसे मृत्यु के पास जा रहे हों। नींद में जाना – यानी आपको अगले कुछ घंटों के लिए मरना है। बहरहाल, हम अगले जन्म में विश्वास करते हैं। कल की सुबह एक नया जन्म है। है कि नहीं? आप नींद में बिलकुल मरे हुए इंसान के समान थे। जी हां, जहां तक ‘आप’ की बात है तो ‘आप’ मर चुके थे। आपके अनुभव में यह दुनिया मर चुकी थी। उसके बाद आप सुबह उठे। क्या यह पुनर्जीवन नहीं है। यह एक नया जीवन है।

इकठ्ठा किये हुए सामान को एक तरफ रखें

तो आज की रात भी आप मौत की तरफ जाएंगे। यह मैं कोई भ्रम पैदा करने के लिए नहीं कह रहा हूं। चलिए सब ठीक है, ऐसा कुछ भी नहीं है। आपके शरीर का, मन का, विचारों का, भावनाओं का कोई मतलब नहीं है।

बस आप ऐसे ही सो जाएं – जीवन के एक अंश के रूप में बस ऐसे ही सो जाइए, न एक स्त्री के रूप में, न एक पुरुष के रूप में, न इस रूप में न उस रूप में, बस सामान्य रूप से सो जाइए।
आपने जितनी भी पहचान अपने ऊपर थोपी हुई हैं, उन सबका कोई मतलब नहीं है। आप बिस्तर पर जाने से पहले उन सबको एक तरफ रख दीजिए और फि र इस तरह सोने जाइए कि मानो कुछ है ही नहीं। कुछ विचार आते रहेंगे, उन्हें अनदेखा कर दीजिए, वैसे भी वे आपके नहीं हैं। सिर्फ लेट जाइए। सिर्फ इतना करने की जरूरत है कि आपको अपना ध्यान ‘जो आपने अब तक इकठ्ठा किया हुआ है’ उससे हटाकर ‘जो आप वास्तव में हैं’ उस पर लगाना है। यही आपको सही दिशा देगा। इसके लिए आपको स्वर्ग की ओर देखने की कोई जरूरत नहीं है।

संपादक की टिप्पणी:

*कुछ योग प्रक्रियाएं जो आप कार्यक्रम में भाग ले कर सीख सकते हैं:

21 मिनट की शांभवी या सूर्य क्रिया

*सरल और असरदार ध्यान की प्रक्रियाएं जो आप घर बैठे सीख सकते हैं। ये प्रक्रियाएं निर्देशों सहित उपलब्ध है:

ईशा क्रिया परिचय, ईशा क्रिया ध्यान प्रक्रिया

नाड़ी शुद्धि, योग नमस्कार


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