बच्चे को किस उम्र में योग सिखाना चाहिए?

बच्चे को किस उम्र में योग सिखाना चाहिए

सद्‌गुरु एक साधक ने सद्‌गुरु से प्रश्न पूछा कि वह अपने बच्चे को किस उम्र से योग सीखने के लिए प्रेरित करे? सद्‌गुरु बता रहे हैं योग सीखने की सही उम्र के बारे में, और साथ ही उन योग के अभ्यासों के बारे में जो बच्चे के लिए फायदेमंद या हानिकारक हो सकते हैं…

बच्चे को किस उम्र में योग सिखाना चाहिए?

प्रश्न : सद्‌गुरु, मेरी बेटी अभी नौ साल की है। क्या इसी उम्र में उसका परिचय योग से करा देना चाहिए, ताकि वह जितनी जल्दी हो सके, इस मार्ग पर चलने के लिए खुद को तैयार कर सके?

सद्‌गुरु : योग जीवन से दूर ले जाने वाली चीज नहीं है। यह आपको जीवन के प्रति आकर्षित करता है। तो मुझे बताइए, शुरुआत करने का समय क्या है? साठ साल की उम्र या जितनी जल्दी संभव हो?

सात साल की उम्र आम तौर एक अच्छी उम्र मानी जाती है, मगर आपने नौ तक इंतजार किया है। अब शुरुआत करने का समय है क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि बच्चे के सामने कई चीजें रखी जाएं जिनके बारे में वे समझदारी से चुनाव कर सके।

योग जीवन से दूर ले जाने वाली चीज नहीं है। यह आपको जीवन के प्रति आकर्षित करता है। तो मुझे बताइए, शुरुआत करने का समय क्या है? साठ साल की उम्र या जितनी जल्दी संभव हो?
अगर आप उनके सामने ये विकल्प नहीं रखेंगे, तो उन्हें यह विश्वास हो जाएगा कि दुनिया में बस वही चीजें है, जो उन्हें दिखती हैं। उन्हें लगेगा कि चुनाव सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक और पिज्जा के बीच करना है, और कुछ भी नहीं है यहां।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि जीवन की शुरुआत से ही बच्चे के सामने सही चीजें आएं, जो अंदर से काम करने वाली हों, क्योंकि हम अपने आस-पास की दुनिया में जो व्यवस्था करते हैं, उन्हें एक खास सीमा तक ही संभाला जा सकता है। जब तक आपकी खुशहाली बाहरी हालातों के अधीन और उसकी गुलाम होगी, तब तक आप संयोग से ही खुशहाल होंगे क्योंकि बाहरी हालातों पर किसी का भी सौ फीसदी काबू नहीं होता। जिस तरह आबादी बढ़ रही है, हम नहीं जानते कि अगली पीढ़ी किस तरह की बाहरी व्यवस्थाएं कर पाएगी। 2050 तक हमारी आबादी 9.6 अरब हो जाने की उम्मीद है। मैं उस समय तक नहीं रहना चाहता, मगर आपकी बेटी उस समय मौजूद होगी, उसे गुजर बसर के लिए किसी खास हुनर की जरूरत होगी। जीवन बिल्कुल भी आसान नहीं होगा।

जब तक आपकी खुशहाली बाहरी हालातों के अधीन और उसकी गुलाम होगी, तब तक आप संयोग से ही खुशहाल होंगे क्योंकि बाहरी हालातों पर किसी का भी सौ फीसदी काबू नहीं होता।
इतनी ही जगह में 35 फीसदी ज्यादा लोग होंगे, उस स्थिति की कल्पना कीजिए और उस अनुभव को महसूस करने की कोशिश कीजिए। अगर आपको वाकई बहुत पास-पास बैठना है, तो कम से कम आपको योग आना चाहिए ताकि आप किसी भी तरह खुद को मोड़ सकें और किसी भी मुद्रा में आरामदेह रह सकें। मुद्राओं को लेकर आपके पास ज्यादा विकल्प नहीं होंगे।

मैं आशा करता हूं कि योग हमारी शिक्षा प्रणाली का एक हिस्सा बन जाए। इस वर्ष ईशा की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस गतिविधियों के एक भाग के रूप में हमने ऐसी कोशिशें शुरू कीं हैं जिनसे आसान मगर शक्तिशाली योग क्रियाओं को भारत के 25,000 स्कूलों के 3 करोड़ बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।

बच्चों को किस तरह का योग सीखना चाहिए?

प्रश्न : क्या बच्चों के लिए कोई खास योग है?

सद्‌गुरु : योग के कुछ सरल प्रकार हैं, जिन्हें बच्चे छह-सात साल की उम्र के बाद कर सकते हैं। मगर यह बहुत महत्वपूर्ण है कि कुछ खास अभ्यास उन्हें नहीं सिखाए जाएं। मैं देखता हूं कि कुछ जगहों पर बच्चों को पद्मासन सिखाया जाता है।

योग सिखाने वाले को पता होना चाहिए कि बच्चे के लिए क्या उपयुक्त है। योग हर शख्स की जरूरतों और स्थितियों के अनुसार सिखाया जाता है।
ऐसा नहीं होना चाहिए। जिस समय हड्डियां बढ़ रही होती हैं और मुलायम होती हैं, उस समय अस्थिपंजर पर जोर डालने वाली मुद्राओं में बैठने से उनकी हड्डियां मुड़ सकती हैं।

योग सिखाने वाले को पता होना चाहिए कि बच्चे के लिए क्या उपयुक्त है। योग हर शख्स की जरूरतों और स्थितियों के अनुसार सिखाया जाता है। वयस्कों को सिखाई जाने वाली हर चीज बच्चों को नहीं सिखाई जानी चाहिए। वयस्कों में भी गृहस्थों को हम एक तरह का योग सिखाते हैं और एक संन्यासी बिल्कुल अलग तरह का योग सीखता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप हर किसी को एक जैसी चीजें न सिखाएं।

सबसे आसान तरीका है नाद योग

प्रश्न: हम बच्चों को योग के बारे में कैसे बताएं। हम छोटी उम्र से ही योग के लिए आकर्षण कैसे पैदा कर सकते हैं?

सद्‌गुरु : एक योग होता है जिसे ‘नाद योग’ कहते हैं, जिसमें ध्वनियों पर अधिकार करना सिखाया जाता है। बच्चे के लिए शुरुआत करने का सबसे सरल और सुंदर तरीका नाद योग है।

एक योग होता है जिसे ‘नाद योग’ कहते हैं, जिसमें ध्वनियों पर अधिकार करना सिखाया जाता है। बच्चे के लिए शुरुआत करने का सबसे सरल और सुंदर तरीका नाद योग है।
यह उनकी खुशहाली और शरीर व मन के पूरे विकास में मदद करेगा। योग नमस्कार जैसी क्रियाएं भी हैं, जिन्हें छह-सात साल की उम्र में भी सीखा जा सकता है। उप-योग तकनीकें बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए बराबर लाभदायक हैं। जब उन्हें इन क्रियाओं के फायदे पता चलेंगे, जब उन्हें लगेगा कि इससे वे काबिलियत में अपने साथियों से आगे निकल सकते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से योग के अगले चरणों को सिखना चाहेंगे। बड़े होने के साथ, उनका योग भी विकसित होना चाहिए।

संपादक की टिप्पणी:

*कुछ योग प्रक्रियाएं जो आप कार्यक्रम में भाग ले कर सीख सकते हैं:

21 मिनट की शांभवी या सूर्य क्रिया

*सरल और असरदार ध्यान की प्रक्रियाएं जो आप घर बैठे सीख सकते हैं। ये प्रक्रियाएं निर्देशों सहित उपलब्ध है:

ईशा क्रिया परिचय, ईशा क्रिया ध्यान प्रक्रिया

नाड़ी शुद्धि, योग नमस्कार


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1 Comment

  • Anmol says:

    Hey, there is error in the code your html is showing up on the page, probably simple syntax error, please correct and if i may volunteer to help, please let me know.

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