ॐ मंत्र का क्या महत्व है?

हिन्दू परंपरा में ॐ शब्द को सबसे पावन माना जाता है। क्या महत्व है इस ध्वनी का? ॐ का जाप हमें किस तरह के अनुभव दिला सकता है? इस विडियो में सद्‌गुरु बता रहे हैं कि ॐ  अपने आप में आध्यात्मिक तो नहीं पर भौतिक का जगत अंतिम चरण है…

सद्‌गुरुसद्‌गुरु: ठीक है। मेरे ख्याल से बुनियादी इनर इंजीनियरिंग प्रोग्राम में हमने ऊं ध्वनि के बारे में बताया है। ऊं ध्वनि भौतिकता का अंतिम कदम है। यह वास्तव में आध्यात्मिक नहीं है, मगर यह आपको भौतिकता के छोर तक ले जाता है। अगर आप किसी जगह की आखिरी सीमा पर पहुंच जाते हैं… देखिए, अगर आप इस पहाड़ पर चढ़े और चोटी के कगार पर पहुंच कर देखें, तो आपको चीजें एक खास तरह से दिखेंगी। आपको कूदने की जरूरत नहीं है, वह आपको पूरी तरह अलग अनुभव देगा। लेकिन यदि आप किसी चोटी या ढाल के कगार पर खड़े होकर चारो ओर देखते हैं…

अगर आप किसी पहाड़ की चोटी के सिरे पर जाकर खड़े होते हैं और वहां से नीचे देखते हैं तो अचानक आप हर चीज से एक तरह की दूरी महसूस करते हैं और वहां एक तरह की शांति होती है। यह महसूस करने से कोई नहीं चूक सकता। क्या आपमें से किसी ने कभी ऐसा किया है?

प्रतिभागी: हां।

सद्‌गुरु: आप जाकर किसी चोटी के सिरे पर खड़े होकर बस आस-पास देखिए, थोड़ा समय वहां बिताइए। अगर आप कोई पर्यटक नहीं हैं, जो हर चीज को अपने सेलफोन से देखते हैं।

यह आपको भौतिकता की कगार पर ले आएगा। आप उसके परे नहीं जाएंगे क्योंकि ऊं में आपको परे ले जाने की शक्ति नहीं है। मगर यह आपको कगार पर ले जाकर चीजों को साफ-साफ दिखा सकता है।
अगर आप अपनी आंखों से देखते हैं और बस चारो ओर नजर डालते हैं, तो दूरी के कारण वहां एक तरह की शांति होती है। जब आप पहाड़ पर चढ़ रहे थे, तो यहां सब कुछ था। आप कगार पर खड़े होते हैं, तो जिस जमीन पर आप खड़े हैं, उससे अगला कदम बहुत दूर ले जा सकता है। यह हमेशा मानव मन और भावना पर एक तरह का असर पैदा करता है। इसी वजह से बहुत से लोग, बहुत से योगी हमेशा पहाड़ की चोटी का सिरा चुनते हैं, जहां चोटी की नोक इस तरह है। आप वहां जाकर बैठें, तो बस उसके आगे कुछ नहीं होता। अगली जमीन 3,000 फीट नीचे होगी। यह आपके विचारों, भावनाओं और आपकी चेतनता पर एक खास असर डालती है क्योंकि आप एक तरह से भौतिकता की कगार पर होते हैं।

ॐ मंत्र भौतिकता के छोर तक ले जाता है

ऊं – या सही मिश्रण में इन तीन ध्वनियों का उच्चारण, आपको वहां ले जाता है। यह आपको उसके परे नहीं ले जाता, मगर भौतिक प्रकृति की कगार तक ले जाता है। जब आप वहां खड़े होते हैं, तो अचानक ये सब लोग बहुत दूर नजर आते हैं। यह अच्छी बात है, मगर यह काफी नहीं है। जब आप ऊं का उच्चारण करते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण चीज यह होती है कि आपका शरीर बहुत सूक्ष्म रूप में एक सीध में आ जाता है। जब आप शारीरिक योग करते हैं, तो कुछ चीजें घटित होती हैं, मगर एक अलग रूप में। मगर जब आप ऊं का उच्चारण करते हैं, तो आपका शरीर एक खास तरह से सीध में, तालमेल में आ जाता है। जहां आप जब चाहें, छोर तक जा सकते हैं। या अगर आप पर्याप्त जागरूक हैं, तो छोर पर रह सकते हैं।

अगर हम चाहें, तो हम सिर्फ ऊं साधना बना सकते हैं। एक दिन, सात दिन। दिन में अठारह घंटे बस ऊं का जाप कीजिए। आप देखेंगे, कि यह आपको ऐसी जगह पर ले जाएगा, जहां आप हर समय इसी तरह रहेंगे। आप जिस चीज को भी देखेंगे, सब कुछ थोड़ा दूर नजर आएगा।

यह बहुत अच्छी बात है, क्योंकि एक दूरी से आप हर चीज को ज्यादा साफ-साफ देख सकते हैं। जब आप उन चीजों से जुड़े होते हैं, तो आप उन्हें उस तरह नहीं देख पाते। आप भी उस दृश्य का एक हिस्सा होते हैं। आप उस दृश्य या माहौल को उसके असली रूप में नहीं देख पाते। जब आप उस दृश्य से थोड़े दूर होते हैं, तो आप उसे बेहतर तरीके से देख पाते हैं। अपने आस-पास की हर चीज, जो जीवन है, उसे एक बेहतर नजरिये से देख पाते हैं।

ॐ मंत्र महत्वपूर्ण है योगियों के लिए

एक योगी के लिए, यह बहुत महत्वपूर्ण होता है कि आप चीजों को उस तरह से देखें, जैसे वे वास्तव में हैं। अपनी भावनाओं और विचारों की धुंध से नहीं, बल्कि आप चीजों को उस रूप में देखते हैं, जैसे वे वाकई हैं। इसके लिए, आपको चोटी की कगार पर बैठना होगा। अगर आप उसमें गहरे जमे हुए हैं, तो आप भी उस नाटक का एक हिस्सा हैं। जब आप नाटक का हिस्सा होते हैं, तो उसे एक आलोचक की नजर से नहीं देख सकते, है न? जब आप दर्शक होते हैं, तो आप वहां बैठकर देख सकते हैं।

ऊं ध्वनि भौतिकता का अंतिम कदम है। यह वास्तव में आध्यात्मिक नहीं है, मगर यह आपको भौतिकता के छोर तक ले जाता है।
आप देख सकते हैं कि उस चीज में क्या सही है, और क्या गलत। मगर जब आप उस नाटक का हिस्सा होते हैं, तो आपको वह नहीं दिखेगा। ऊं आपको वह संभावना देता है। सात दिन से मेरा मतलब है, मुझे नहीं पता कि क्यों – सात दिन क्या बहुत ज्यादा हैं? आपको कभी जरूर ऐसा करना चाहिए कि आपके भीतर कुछ और नहीं, सिर्फ ऊं स्पंदित हो। यह आपको भौतिकता की कगार पर ले आएगा। आप उसके परे नहीं जाएंगे क्योंकि ऊं में आपको परे ले जाने की शक्ति नहीं है। मगर यह आपको कगार पर ले जाकर चीजों को साफ-साफ दिखा सकता है। एक बार जब आप अपनी मौजूदा स्थिति के मुकाबले, कुछ बेहतर वस्तु, साफ तौर पर देख पाते हैं, तो आपको ज्यादा बढ़ावे की जरूरत नहीं पड़ती – आप आगे जा सकते हैं।


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