अपने घर लाएं ये शक्तिशाली यंत्र

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भारतीय संस्कृति में हमेशा से मंदिरों का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। आमतौर पर मंदिरों को भक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है, लेकिन ये ऊर्जा के स्थान भी हैं, आइये जानते हैं कैसे…

‘मैंने पूरे भारत का भ्रमण किया है और मैंने एक भी ऐसा इंसान नहीं देखा जो भिखारी हो या चोर हो। मैंने उस देश में बहुत धन-दौलत, बहुत ऊंचे नैतिक मूल्य, बहुत सामर्थ्य वाले लोग देखे हैं।’

ये शब्द हैं लॉर्ड मैकाले के, जो उन्होंने भारत का अनुभव करने के बाद ब्रिटिश पार्लियामेंट में कहा था। सदियों से हमारी संस्कृति हमारी ताकत रही है। आज हम खुद को एक ऐसे समय में पा रहे हैं , जब हम लगातार उस ताकत से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि हम अपने भीतर झांक कर यह देखने की कोशिश करें कि हम आज क्या हैं और अतीत में हम क्या रहे हैं।

भारत एक पुरातन संस्कृति है जिसने अनगिनत ज्ञानी जनों, साधु-संतों को पैदा किया है और परवरिश दी है। सभ्यताओं को इस तरीके से विकसित किया गया था कि हर पुरुष, स्त्री और बच्चे की तात्कालिक और चरम खुशहाली सुनिश्चित हो पाए। मंदिर इन शुरुआती समाजों के केंद्र में स्थित थे। हर शहर में सबसे पहले मंदिर बनाए जाते थे और फिर उसके चारो ओर घर बनाए जाते थे।

ये मंदिर सिर्फ धार्मिक भावनाओं के प्रतीक नहीं थे, बल्कि ऊर्जा के शक्तिशाली स्थान थे। इन स्थानों के भीतर जीवन असीम उल्लास की एक अभिव्यक्ति थी। इसकी वजह यह थी कि लोगों ने हमेशा पाया था कि इन स्थानों से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य, कामयाबी और आध्यात्मिक खुशहाली लेकर आती थी। इसलिए एक ऊर्जावान स्थान में रहना एक जरूरत मानी जाती थी, जिसे लोग बाकी हर चीज से बढ़कर मानते थे। 

सभ्यताओं को इस तरीके से विकसित किया गया था कि हर पुरुष, स्त्री और बच्चे की तात्कालिक और चरम खुशहाली सुनिश्चित हो पाए। मंदिर इन शुरुआती समाजों के केंद्र में स्थित थे। हर शहर में सबसे पहले मंदिर बनाए जाते थे और फिर उसके चारो ओर घर बनाए जाते थे।

लेकिन समय के साथ लोग इन स्थानों के महत्व को भूल गए हैं और आज मानव जाति बहुत हद तक इन लाभों से वंचित है। हर इंसान अपने भीतर संपूर्ण विकास करने के लिए एक प्राण प्रतिष्ठित स्थान में रहने का अधिकारी है और उसे रहना चाहिए।

कल्पना कीजिए अपने घर की चारदीवारी के भीतर ऐसे माहौल की जो इन स्थानों के बराबर हो। एक ममतामयी, करुणामयी ऊर्जा की कल्पना कीजिए जिसकी गोद में आप अपनी पूर्ण क्षमता तक विकसित हो सकें। प्राचीन संस्कृति में ओत-प्रोत अधिक ऊंचे ज्ञान की कल्पना कीजिए जो आपको जीवन में सहजता से आगे बढ़ने में मदद करता है।

आपकी कल्पना को साकार करने का, घर में ऐसा स्थान बनाने का, एक साधन, एक तरीका है। यंत्र बहुत शक्तिशाली रूप होते हैं जिन्हें अनूठे ढंग से हर व्यक्ति के अनुसार ढाला जाता है जो आपके घर और कार्यस्थल में सही ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। संस्कृत में यंत्र का मतलब है मशीन। ये यंत्र भौतिक तथा आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाली मशीनें हैं।

रस-वैद्य के सदियों पुराने कीमियागर संबंधी विज्ञान के द्वारा ठोस किए गए पारे से बनाए गए, तांबे के आवरण और ग्रेनाइट आधार वाले ये यंत्र भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं जो बनारस या काशी के वैभवपूर्ण दिनों की याद दिलाते हैं। इन यंत्रों को जीवनपर्यंत या उससे भी आगे तक काम करने के लिए तैयार किया जाता है।

प्राचीन, शक्तिशाली भारतीय संस्कृति का एक हिस्सा अपने घर ले कर जाएं। इसे न सिर्फ खुद को बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को विरासत में दिया जाने वाला उपहार बनाएं। भारतीय संस्कृति का उपहार।

 सद्‌गुरु इन यंत्रों की प्रतिष्ठा करते हैं। आप अपना लिंग भैरवी या लिंग भैरवी अविघ्न यंत्र ईशा योगा केंद्र में 2 अगस्त 2016 को अमावस्या की रात में आयोजित एक विशेष समारोह में सद्‌गुरु से पा सकते हैं।

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यंत्र के बारे में अधिक जानकारी पाने और इसे प्राप्त करने के लिए कृपया हमसे संपर्क करें:

 +91 94890 45136

yantra@lingabhairavi.org


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