योगेश्वर लिंग : 5 चक्र और 16 आयाम


सद्‌गुरुकिसी ईश्वरीय रूप को लेकर हमारे मन में शुरु से एक सोच चली आ रही है कि वह प्रेम की मूर्ति होते हैं। लेकिन अगर कोई योगी हृदयहीन हो तो क्या इसका मतलब है उसमें दूसरों के दर्द को समझने की काबीलियत नहीं है? सद्‌गुरु बता रहे हैं कि इस लिंग में और कौन-कौन सी अनूठी विशेषताएं हैं और उनसे कैसे जुड़ें। वह कहते हैं, ‘योगेश्वर लिंग एक योगी के अनुशासन और उल्लासमय परमानंद का एक मिश्रण है।’ साथ ही,  प्राण-प्रतिष्ठा की तस्वीरों के स्लाइडशो का आनंद लें।

किसी रूप की ज्यामिति उसकी सुंदरता तय करती है

जब अस्तित्व का एक निराकार आयाम कोई आकार लेता है, तो खास रूप कैसे काम करेगा – यह उसकी ज्यामिति तय करती है। सरल शब्दों में कहें तो जिस रूप या आयाम में ज्यामितिय सटीकता और भारी जटिलता होती है, उसे इंसानी अनुभव में अनिवार्य रूप से दैवी या चैतन्य माना जाता है।

योगेश्वर लिंग एक सक्रिय ऊर्जा रूप है और कोई भी सक्रिय या जीवंत चीज किसी न किसी रूप में गतिमान होती है। इस लिंग को इस तरह तैयार किया गया है कि यह हजारों सालों तक चलेगा।
जिस रूप में एक खास ज्यामितिय सटीकता के साथ एक सरलता होती है, उसे बस सुंदर माना जाता है। जिस चीज की ज्यामिति बेमेल होती है – चाहे वह ध्वनि हो, या आकार, गंध, स्वाद या स्पर्श – उसे भद्दा माना जाता है। अगर आप कोई ऐसी चीज बनाना चाहते हैं, जिसे दैवीय देखा और महसूस किया जाए, तो उसमें जटिलता और ज्यामितिय सटीकता की जरूरत है। ज्यामिति रूप से सटीक होने पर कोई भौतिक आकार सहजता से काम करता है, क्योंकि उसमें कम से कम रगड़ होगी। इससे वह उन कामों को अधिक सक्षमता से कर पाएगा जिन्हें करने के लिए उसे बनाया गया है। उसी से यह भी तय होता है कि वह कितने दिन चलेगा। यह सिर्फ मशीनों पर ही नहीं, बल्कि लिंग पर भी लागू होता है। योगेश्वर लिंग एक सक्रिय ऊर्जा रूप है और कोई भी सक्रिय या जीवंत चीज किसी न किसी रूप में गतिमान होती है। इस लिंग को इस तरह तैयार किया गया है कि यह हजारों सालों तक चलेगा।

योगेश्वर लिंग का ऊर्जा शरीर

योगेश्वर लिंग में पांच चक्र हैं – मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, विशुद्धि और आज्ञा। हरेक में सोलह आयाम हैं। इसमें अनाहत चक्र नहीं है – यह एक हृदयहीन योगी हैं।

ध्यानलिंग में पूरा हृदय है, मगर वह एक योगी का हृदय है। वह इतनी स्थिरता से धड़कता है कि किसी का उस पर ध्यान नहीं जाता। अगर आप सूक्ष्म और स्थिर भाव में होते हैं, तो लोगों को लगता है कि आप प्रेम में नहीं हैं, वे आपसे अस्थिर होने की उम्मीद करते हैं।
इसकी एक वजह यह है कि इस लिंग को मुख्य रूप से साधना के लिए तैयार किया गया है, पूजा के लिए नहीं। लोग निश्चित रूप से उनकी पूजा करेंगे, यह असली उद्देश्य नहीं है। हर कोई लिंग भैरवी से प्रेम करता है, क्योंकि उनका अनाहत चक्र आधा होने के बावजूद बहुत मजबूत है, उनके पास आधा हृदय है। ध्यानलिंग में पूरा हृदय है, मगर वह एक योगी का हृदय है। वह इतनी स्थिरता से धड़कता है कि किसी का उस पर ध्यान नहीं जाता। अगर आप सूक्ष्म और स्थिर भाव में होते हैं, तो लोगों को लगता है कि आप प्रेम में नहीं हैं, वे आपसे अस्थिर होने की उम्मीद करते हैं। मैंने योगेश्वर लिंग से हृदय निकालने का फैसला किया क्योंकि अनाहत साधना अधिकतर लोगों के लिए बहुत भ्रामक होती है। इस योगी में सिर्फ तीव्रता और समावेश है – प्रेम संबंध नहीं। अगर आपने पहले ही किसी चीज को अपना एक हिस्सा बना लिया है, तो उससे प्रेम करना आपके लिए जरूरी नहीं है।

योगेश्वर लिंग से जुड़ने के तरीके

योगेश्वर लिंग से जुड़ने के दो तरीके हैं – योगरतोवा, भोगरतोवा। आप या तो अनुशासन से इसे पा सकते हैं या बेफिक्री से। अधिकतर लोग कहते हैं कि वे अनुशासन की बजाय बेफिक्री और परमानंद में रहना अधिक पसंद करते हैं।

अगर आप इस तरह सीमाओं को पार करना चाहते हैं कि आपके जीवन में एक बड़ा फर्क आए, तो आपको अपने प्रारब्ध के कुछ पहलुओं को नष्ट करना होगा। वरना, आध्यात्मिक प्रक्रिया छिलके के साथ अखरोट खाने जैसी होगी, यानी वह एक आनंददायक अनुभव नहीं होगा।
कुछ शर्तों से बंधी हुई बेफिक्री गृहस्थ जीवन के लिए तो ठीक है, लेकिन अगर आप दिव्य को जानना चाहते हैं, तो यह काफी नहीं है। अपने अस्तित्व की सीमाओं से परे जाने के लिए आपको उन्मुक्तता के एक अलग स्तर की जरूरत होती है। योगेश्वर लिंग अनुशासन और उल्लासमय परमानंद का एक मिश्रण है। वह सुनिश्चित करेंगे कि आप अपने प्रारब्ध या कर्म की छाप के अनुसार उनसे जुड़ें। आप अपने प्रारब्ध कर्म को, कम से कम एक सीमा तक नष्ट किए बिना, सीमाओं को तोड़ कर योग को नहीं महसूस कर सकते। अगर आप किसी कीमती जायदाद की तरह अपने प्रारब्ध से चिपके रहे, तो आपके लिए अपनी सीमाओं को तोड़ने का कोई तरीका नहीं है। आपके अस्तित्व की चक्रीय प्रकृति लगातार खुद को दोहराती रहेगी। अगर आप इस तरह सीमाओं को पार करना चाहते हैं कि आपके जीवन में एक बड़ा फर्क आए, तो आपको अपने प्रारब्ध के कुछ पहलुओं को नष्ट करना होगा। वरना, आध्यात्मिक प्रक्रिया छिलके के साथ अखरोट खाने जैसी होगी, यानी वह एक आनंददायक अनुभव नहीं होगा। सबसे पहले आपको छिलका तोड़ना होगा, तभी अखरोट मीठा लगेगा।

भावनाओं के बिना सभी को अपना हिस्सा बनाना

योगेश्वर लिंग को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह तीव्र बनने और सबको समाहित करने में सक्षम बना सके, जिससे आप आगे एकत्व या योग की अवस्था की ओर बढ़ सकते हैं।

अगर आप सही तरह से योगेश्वर लिंग से जुड़ते हैं, तो वह आपके अंदर भावनाओं के बगैर सिर्फ समावेश लाता है। एक हृदयहीन योगी निर्दयी नहीं होता, बल्कि पवित्र होता है। उसके अंदर न तो सकारात्मक भावनाएं होती हैं, न नकारात्मक।
ज्यादातर इंसानों के लिए जीवन के सबसे मधुर पल प्रेम के होते हैं, जब वे भावनात्मक तौर पर किसी के साथ तालमेल में थे। दुर्भाग्यवश ज्यादातर लोगों ने बस इसी का स्वाद चखा है। समावेश की तीव्रता में भावनाओं का होना जरूरी नहीं है, यह जीवन की एक बुनियादी घटना है। प्रेम संबंध चाहे कितना भी खूबसूरत लगे, वह समावेश का सिर्फ जरा सा स्वाद दे पाता है। यह जीवन के गहन अनुभव के अभाव को दर्शाता है।

अगर आप सही तरह से योगेश्वर लिंग से जुड़ते हैं, तो वह आपके अंदर भावनाओं के बगैर सिर्फ समावेश लाता है। एक हृदयहीन योगी निर्दयी नहीं होता, बल्कि पवित्र होता है। उसके अंदर न तो सकारात्मक भावनाएं होती हैं, न नकारात्मक। वह सिर्फ योग, समावेश और मेल को जानता है। अगर आपके अंदर सकारात्मक भावनाएं हैं, तो नकारात्मक के भी होने की संभावना है। अगर आपके अंदर सकारात्मक विचार हैं, तो नकारात्मक विचारों के भी होने की संभावना है। अस्तित्व की प्रकृति यही है, हर चीज का उलटा जरूर होता है। लगातार सकारात्मक भावनाएं बनाए रखने के लिए बहुत मैनेजमेंट की जरूरत होती है। योगेश्वर जैसी हस्ती के साथ हम ऐसी गैरजरूरी मुश्किलों को दूर रखना चाहते थे।

सिर्फ कुछ ही चक्रेश्वर योगी हुए हैं

आदियोगी के बाद से इतने युगों में सिर्फ कुछ दर्जन योगी ऐसे हुए, जिनमें सभी सातों चक्र और उनके सभी आयाम सक्रिय थे। सभी चक्रों और उनके आयामों पर संपूर्ण अधिकार वाले ऐसे योगियों को चक्रेश्वर कहा गया।

मधुर भावनाएं अच्छी होती हैं, मगर वे आपको ऊपर नहीं उठातीं। ऊपर उठने के लिए हृदय की मदद लेना कठिन है। सबसे पहले, आपको अपने आप को विसर्जित करना पड़ता है, जिसमें ज्यादातर इंसान सक्षम नहीं होते।
एक मशहूर योगी मत्स्येंद्रनाथ थे, दूसरे श्री ब्रह्मा। पिछले दस से पंद्रह हजार सालों में सिर्फ कुछ चक्रेश्वर ही हुए हैं, यह मानव जाति के लिए कोई अच्छी बात नहीं है। अगर आपके पास सिर्फ हमदर्दी रखने वाला हृदय हो, तो बहुत से लोग उससे आकृष्ट होते हैं और आपको महान संत समझने लगते हैं। इसीलिए ‘प्रेम दुनिया का सार है’ या ‘ईश्वर प्रेम है’ जैसी शिक्षाएं दुनिया में इतनी लोकप्रिय हुईं हैं।

आप जिसे ईश्वर कहते हैं, सिर्फ भावुकता से भरे प्रेम से परे भी उसके और आयाम हैं। अगर आप सिर्फ प्रेम की तलाश में हैं, तो कुत्ता सबसे अच्छा साथी है। सिर्फ कुत्ता ही हर समय आपसे प्रेम का दिखावा कर सकता है। इंसानी अस्तित्व में कहीं अधिक जटिलता है। सिर्फ एक मूर्खतापूर्ण दिमाग ही सोच सकता है कि भावुक प्रेम ही दैवीयता है। किसी के प्रति मधुर भावनाएं रखना मानवीय नजरिया है। मधुर भावनाएं अच्छी होती हैं, मगर वे आपको ऊपर नहीं उठातीं। ऊपर उठने के लिए हृदय की मदद लेना कठिन है। सबसे पहले, आपको अपने आप को विसर्जित करना पड़ता है, जिसमें ज्यादातर इंसान सक्षम नहीं होते।

योगेश्वर लिंग – प्रेम नहीं, समावेश की साधना

यह हृदयहीन योगी इतना समावेशी है कि उसे भावनाओं की जरूरत नहीं है। जब आप हर चीज को अपना एक हिस्सा बना लेते हैं, तो किसी के प्रेम में पड़ने की जरूरत कहां रह जाती है? जब आप दीवार की तरह खड़े होते हैं, तभी एक दिन आपको गिरना पड़ता है।

योगेश्वर लिंग के मूलाधार, स्वाधिष्ठान और मणिपूर चक्र आपको सेहत, खुशहाली और परमानंद की गहन भावना प्रदान करेंगे। एक आनंदित इंसान को समावेशी बनाना आसान है।
यह कहना मुझे अलोकप्रिय बना सकता है, मगर हम आपको प्रेम से बचाना चाहते हैं ताकि आप समावेशी बनना सीख सकें। प्रेम के लिए आपको दो की जरूरत होती है। समावेश का अर्थ है कि यहां सिर्फ एक ही है। जब शिव को अपनी प्रेयसी मिली, तो उन्होंने उसे अपना कर अपना एक हिस्सा, अपना आधा हिस्सा बना लिया। लोग हृदयहीन होने का मतलब संवेदनाहीन होना समझ लेते हैं क्योंकि उन्होंने कभी समावेश की भावना के साथ जीने को, जीवन जीने का तरीका नहीं समझा। दो लोग प्रेम में होते हैं, अगर वह दोनों के लिए सुविधाजनक हो। अगर वह सुविधाजनक नहीं होता, तो वे अलग हो जाते हैं।

यह योगी हमसे अधिक समय तक जीवित रहेंगे और इस पीढ़ी के कुछ लाख लोगों और आने वाली पीढ़ियों के कई लाख लोगों को लाभ पहुंचा सकते हैं। आने वाले समय में मानव बुद्धि बाकी हर चीज से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। इससे अच्छी और बुरी दोनों चीजें होंगी। अब समय है कि हम अपनी बुद्धि और ऊर्जा का इस्तेमाल समावेश की कोशिश में करें। योगेश्वर लिंग के मूलाधार, स्वाधिष्ठान और मणिपूर चक्र आपको सेहत, खुशहाली और परमानंद की गहन भावना प्रदान करेंगे। एक आनंदित इंसान को समावेशी बनाना आसान है। मेरे ख्याल से आपको सेहतमंद होने, आनंदित होने और परमानंद में जीने का अधिकार है। यह जीवन एक अद्भुत प्रक्रिया है जिसे आपने नहीं बनाया। इसे अच्छी तरह रखना और चरम तक ले जाना आपके ऊपर है। योगेश्वर लिंग इंद्रियों से परे आयामों की अनुभवजन्य खोज में आपकी मदद करता है।

आइए, आदियोगी की कृपा का अनुभव करें और अपने जीवन को विकसित होने दें।

प्रेम व प्रसाद,

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