अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस: कुछ नहीं तो गप्‍पें मारें

21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए की जा रही तैयारी के बारे में बताते हुए सद्‌गुरु इस बार के स्पॉट में बता रहे हैं, कि यह अवसर आपके लिए एक अद्भुत सुख पाने का है – किसी के जीवन को बदलने का सुख, अपने सींचे पौधे पर फूल खिलते देखने का सुख। कैसे पाएं यह सुख आइए जानते हैं:

पंद्रह हजार साल पहले आदि योगी ने मानव-तंत्र की कार्य-प्रणाली का, व्यापक ब्रह्मांड का और इन दोनों के बीच के रिश्ते की खोज की। उन्होंने ऐसे तमाम साधनों के बारे में बताया, जिन्हें इंसान दोनों पहलुओं की खोज करने में इस्तेमाल कर सकता है। उनकी परिकल्पना थी कि पूरी मानवता इन साधनों का इस्तेमाल करेगी और एक समय ऐसा आया, जब दुनिया के एक बड़े हिस्से ने बड़े पैमाने पर ऐसा किया।

यह बड़ा महत्वूपर्ण है कि आप जहां भी रहते हैं, वहीं योग की गपशप करना शुरू कर दें। गपशप की शक्ति को कम करके मत आंकिए। ये किसी भी अखबार या टीवी से कहीं ज्यादा शक्तिशाली हैं।
लेकिन जैसे-जैसे वक्त बदला और इंसान की समझ का रुझान सजगता और जागरूकता से रूढ़ियों, मान्यताओं और अनदेखे देवी-देवताओं की ओर हुआ, योग धीरे-धीरे खत्म होने लगा। एक बार फिर से वह वक्त आ रहा है जब मानव की बुद्धि अपने चरम पर है। अगर आप एक हजार साल पहले के दौर को मुड़कर देखें, तो पाएंगे कि एक गांव में बस एक अक्लमंद आदमी होता था, जो हर किसी के लिए सोचता था। बाकी लोग उसके निर्देशों का बस पालन करते थे। लेकिन आज बहुत सारे लोगों ने अपने बारे में सोचना शुरू कर दिया है। वे सही सोच रहे हैं या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता – वे सोच तो रहे ही हैं।

खुशहाली को ऊपर की ओर (यह मानते हुए कि भगवान ऊपर हैं) तलाशने के चक्कर में मानव-जाती पूरी तरह से कल्पना और भ्रम में खो गई है, और हिंसा, नफरत जैसी तमाम ऐसी बुराइयां जिनके बारे में कुछ कहा भी नहीं जा सकता, अंतहीन तरीके से बढ़ती चली जा रही हैं। ज्यादातर लोगों ने ऊपर देखने की बजाय बाहर की ओर देखना शुरू कर दिया। एक बार जैसे ही हमने बाहर की ओर देखना शुरू किया, इस धरती के सभी जीवित प्राणियों और खुद इस धरती के साथ मानव ने बेहूदा चीज़ें की। अगर इंसानी सुख और भलाई की बात करनी है तो एक ही रास्ता है और वह है भीतर की ओर देखना, क्योंकि सुख और दुख आपको अपने भीतर से ही महसूस होते हैं, खुशी और कष्ट आपके भीतर ही होते हैं, वेदना और उल्लास आपको अपने भीतर से ही महसूस होते हैं, अंधकार और प्रकाश दोनों आपके भीतर ही हैं। अगर आप भीतर की ओर नहीं मुड़ते, तो इस धरती पर अपने अनुभव को ठीक करना संभव नहीं है। योग का मतलब बस यही है, न ऊपर देखो, न बाहर देखो, बस भीतर देखो। भीतर देखना ही एकमात्र सही तरीका है।

आज के समय में जब मानव की बुद्धि एक खास ऊंचाई तक पहुंच गई है, यह बहुत अच्छा है कि हमारे प्रधानमंत्री ने योग को दुनिया भर में एक आधिकारिक प्रक्रिया बना दिया है। 177 देशों की सहमति से यह प्रस्ताव पारित हुआ कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस बात का बड़ा महत्व है कि अलग-अलग देशों के शीर्ष नेता इसके बारे में बात कर रहे हैं। इससे पहले कि हम कुछ करें, हमें भी इसके बारे में गपशप  करने की जरूरत है। यह बड़ा महत्वूपर्ण है कि आप जहां भी रहते हैं, वहीं योग की गपशप करना शुरू कर दें। गपशप की शक्ति को कम करके मत आंकिए। ये किसी भी अखबार या टीवी से कहीं ज्यादा शक्तिशाली हैं। आप सोशल मीडिया के जरिये भी ऐसी गपशप कर सकते हैं। यह बड़ी अच्छी बात है क्योंकि लोग ऐसी गपशप पर आधिकारिक खबरों से कहीं ज्यादा विश्वास करते हैं!

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर तमाम लोगों और संगठनों की ओर से बहुत सारे प्रयास किए जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत सरकार बड़े स्तर पर इसका आयोजन कर रही है और खुद प्रधानमंत्री इन आयोजनों को सफल बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। यहां हम भी ईशा में इसके लिए जोरदार कोशिशों में लगे हैं। आज समय आ गया है कि हम सहज और सरल तरीके जिन्हें उप-योग कहते हैं और जो हर किसी के लिए उपलब्ध है। इससे पूरी दुनिया के लोग योग का स्वाद ले सकते हैं। इन तरीकों से वे योगी तो नहीं बन पाएंगे, लेकिन कम से कम उन्हें योग का स्वाद तो पता चलेगा। अगर आज उन्होंने योग का स्वाद ले लिया तो इस बात की पूरी संभावना होगी कि आने वाले समय में अगर उनके सामने विकट स्थिति आई तो वे योगी बन जाना चाहेंगे, नहीं तो जीवन की कठोर परिस्थतियां आने पर वे शराबी बन सकते हैं। जब जीवन में कठिन परिस्थतियां आती हैं तो बहुत से लोग अवसाद में चले जाते हैं और शराब व नशीली दवाएं लेने लगते हैं। लेकिन अगर अभी आप उन्हें योग का स्वाद चखा दें, तो जीवन का कठिन दौर आने पर वे निश्चित रूप से योग को ही चुनेंगे।

उस दिन योग शिक्षक बनकर आप भी अपने आसपास के लोगों को रूपांतरण के साधन मुहैया करा सकते हैं और अपने सामने उन्हें खिलते हुए देखकर संतुष्टि और आनंद महसूस कर सकते हैं। हमने एक योग प्रोटोकॉल बनाया है जो बहुत सरल है। इसे किसी भी उम्र का कोई भी शख्स आसानी से कर सकता है।

अगर आप भीतर की ओर नहीं मुड़ते, तो इस धरती पर अपने अनुभव को ठीक करना संभव नहीं है। योग का मतलब बस यही है, न ऊपर देखो, न बाहर देखो, बस भीतर देखो।
यह एक डीवीडी के जरिये समझाया जाता है। शिक्षकों को बस एक माहौल बनाना है और उसमें बताये गये सुधारों को समझाना है। इस विशेष दिन के लिए करीब 35,600 शिक्षक तैयार किए जा रहे हैं। दुनिया भर में एक लाख से ज्यादा जगहों पर उप योग के इन सामान्य तरीकों को बताया जा रहा है। यह एक ऐसा अदभुत आयोजन है जो हमारे संगठन करने की क्षमता के लिए एक बड़ी चुनौती है। उस विशेष दिन के लिए हमने एक डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया है। हमें उम्मीद है कि इस पर पांच से दस करोड़ लोग आएंगे। मैं चाहता हूं कि खुद का रूपांतरण करने के साधन के रूप में आप उप-योग के इस प्रसार का उपयोग करें। यह लोगों के लिए कोई उपदेश नहीं है, यह रूपांतरण का एक तरीका है। साथ ही मैं यह भी चाहता हूं कि अपने आसपास के लोगों के जीवन को बदलने का आनंद भी आप महसूस करें। मैं चाहता हूं कि अपने छोटे से प्रयास की वजह से दूसरों के चेहरों पर आने वाली खुशी को देखकर आप भीतर से आनंदित हों। लोग हमारे कार्यक्रमों में मुरझाए चेहरों के साथ आते हैं और जब वापस लौटते हैं तो उनका चेहरा खिला हुआ होता है। अगर आपने अपने बगीचे में किसी पौधे की देखभाल की है तो आपको पता होगा कि उस पौधे पर पहला फूल आने पर कैसा आनंद महसूस होता है। मैं चाहता हूं कि आपके भीतर इतनी शक्ति, अवसर और जिम्मेदारी हो कि आप यह सब संभव कर सकें। यही मेरी इच्छा है और आशीर्वाद भी। अपने और अपने आसपास के सभी लोगों के साथ ऐसा होने दें।

प्रेम व प्रसाद,

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