याद्दाश्त बढ़ाने के सरल उपाय

याद्दाश्त बढ़ाने के सरल उपाय

सद्‌गुरुईशा योग केंद्र हठ योग शिक्षक ट्रेनिंग के दौरान एक प्रतिभागी ने सद्‌गुरु से कक्षा के नोट्स याद करने के बारे में सवाल पूछा। सद्‌गुरु उसे जवाब में कुछ सरल उपाय बता रहे हैं।

प्रश्न : सद्‌गुरु, मुझे चीजों को याद रखने में काफी दिक्कतें आती हैं। बोली जा रही बातों को ग्रहण करना मेरे लिए बड़ा मुश्किल काम होता है। क्या आप इस बारे में कुछ बता सकते हैं?

याद्दाश्त की नहीं, ये स्पष्टता की कमी है

सद्‌गुरु : आप हर चीज जो खाते, पीते, सूंघते, चखते या छूते हैं, वो सब आपके भीतर रिकॉर्ड होता है। उसके रिकॉर्ड होने में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। मानलीजिए कि मैं आपको गाली दे दूं तो आप पूरी जिंदगी उसे याद रखेंगे।

यहां याद्दाश्त सुधारने की कोई जरूरत नहीं है, आप जो भी अनुभव करते हैं, वह सब दर्ज होता जाता है। आपकी समस्या सिर्फ इतनी है कि आप सही सूचना अपने भीतर से नहीं निकाल पाते हैं।
आपकी याद्दाश्त जबरदस्त तेज है। लेकिन आपको बस अपशब्द याद रहते हैं। आपकी समस्या सिर्फ इतनी सी है कि आपको अपनी मेमोरी में जमा किसी चीज की जब जरूरत होती है, तब वह उस वक्त आपको याद नहीं आती। उस समय आप अपनी याद्दाश्त में से वह नहीं चुन पाते, जो आप चाहते हैं। यह मामला सिर्फ स्पष्टता का है, याद्दाश्त का नहीं। अगर हम कहते हैं कि फोन की मेमोरी कम है, तो उसका मतलब है कि उसमें रिकॉर्ड करने की क्षमता कम है। लेकिन अगर हम 2 का बटन दबाएं और उसकी जगह वह 5 दिखाए, तो समस्या खराब मेमोरी की नहीं, बल्कि की बोर्ड की होगी। आपकी समस्या भी खराब की बोर्ड की है। यहां याद्दाश्त सुधारने की कोई जरूरत नहीं है, आप जो भी अनुभव करते हैं, वह सब दर्ज होता जाता है। आपकी समस्या सिर्फ इतनी है कि आप सही सूचना अपने भीतर से नहीं निकाल पाते हैं।

योगासनों जैसी स्पष्टता, जीवन के हर क्षेत्र में लाएं

हमें स्पष्टता पर काम करना होगा। लेकिन आखिर वो कौन सी चीज है, जो दिमाग को स्पष्टता देती है?

जैसी सर्तकता आप योगासन करते समय दिखाते हैं, वैसी ही आप अपने जीवन के हर क्षेत्र में दिखाएं। धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपके मन में स्पष्टता आने लगेगी।
 इसके लिए आप एक आसान सा काम कर सकते हैं कि आप जो भी करें, उसमें एक खास तरह की सटीकता (किसी चीज को ठीक-ठीक करना) और स्पष्टता लाएं। हठ योग इसी सटीकता का नाम है- आपके पांव कैसे रखे होने चाहिए, आपके हाथ कहां होने चाहिए, आपको अपना सिर कैसे रखना चाहिए, आपको कैसे चलना है, आप जो चीज अपने साथ लाए हैं, उन्हें कैसे रखना है। अगर आपकी गतिविधियों में स्पष्टता होगी तो आपके मन में भी स्पष्टता होगी। आपको इस स्पष्टता का अभ्यास अपने जीवन के हर क्षेत्र में करना चाहिए। आपका कमरा कैसा होना चाहिए, आपको बिस्तर पर कैसे जाना चाहिए जैसी हर चीज में। जैसी सर्तकता आप योगासन करते समय दिखाते हैं, वैसी ही आप अपने जीवन के हर क्षेत्र में दिखाएं। धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपके मन में स्पष्टता आने लगेगी। आपका मन हर चीज को लेकर सतर्क होने लगेगा।

एक सरल अभ्यास

इसी पल से आप एक छोटा सा अभ्यास शुरू कर सकते हैं, जिसमें आपको बस इतना करना है कि जब भी आप खड़े हों, या बैठें, या चलें या आप जो भी करें, उसे सटीकता के साथ और ध्यान से करें।

जो सटीकता व स्पष्टता आप अपने शरीर में लाने की कोशिश कर रहे हैं, उसे ही अपने मन या विचारों में लाने की कोशिश कीजिए। मन को शरीर की नकल करने दीजिए।
आपके आस-पास जो भी हो रहा है, उसे सचेतन रूप से अपने भीतर दर्ज करें। उदाहरण के लिए आपके बगल में एक पात्र, एक दरवाजा व चार पिलर्स हैं। कितने लंबे? लगभग बारह फीट के लगते हैं। इसी अभ्यास को हर चीज के साथ करने की कोशिश कीजिए। यहां से वहां तक के बीच कितने कदम की दूरी है? उन्हें गिनिए नहीं, बस चलना शुरू कीजिए व गौर कीजिए। ठीक है लगता है कि तीन, फिर अगले तीन, फिर अगले तीन। कुछ दिनों बाद चार, पांच या बारह का अंतराल कीजिए- बिना सोचे, धीरे-धीरे आप जान जाएंगे कि आप कब बारह कदम चले। यही योग है। यह स्थिति कुछ समय बाद अपने आप होगी। जो सटीकता व स्पष्टता आप अपने शरीर में लाने की कोशिश कर रहे हैं, उसे ही अपने मन या विचारों में लाने की कोशिश कीजिए। मन को शरीर की नकल करने दीजिए। आप देखेंगे कि स्पष्टता अपने आप आएगी।


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