स्वर्ण युग की दहलीज पर खड़े हैं हमलोग

आज के स्पॉट में सद्‌गुरु एक स्वर्णिम काल के आगमन की आहट हमें सुना रहे हैं और आह्वान कर रहे हैं सबसे कि उठिए और योगदान दीजिए इस महापरिवर्तन के संधिकाल में। लेकिन कैसे?

सद्‌गुरुसद्‌गुरु : पिछले कुछ महीनों में मेरी यात्राएं भयानक तादाद में हुईं हैं। मैं उम्मीद कर रहा था कि जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ेगी, मेरी यात्राओं की तादाद कम होगी, मेरे कपड़े सफर के बैग से हट कर अलमारियों में रहने लगेंगे, लेकिन मैं फिर से सूटकेस की तरफ लौट गया हूं। पिछले डेढ़ से दो महीनों तक हम एक संक्रांति के दौर से गुजरे हैं और अप्रैल के अंत – मई के शुरू तक मैं अपने जीवन के पांच सौर चक्र पूरे कर चुका हूं।

आने वाले बारह साल आध्यात्मिकता की दृष्टि से दुनिया के लिए स्वर्ण युग होंगे। कई मायनों में यह दौर महान संभावनाओं से भरा होगा। जब हम टॉप गियर मे पहुंचेंगे तो हमारी गति काफी तेज होगी। आने वाला समय ईशा के लिए, आपके लिए और आध्यात्मिक अभियान के लिए एक अच्छा समय होगा। हालांकि इसका एक मतलब यह भी है कि हमें काफी काम करना होगा। जहां तक गतिविधियों और सक्रियता की बात है तो मैं इसमें पूरा जोर लगाउंगा, लेकिन आप तो जानते ही हैं कि मेरे पास जो भी होता है, उसे मैं बांटने और साझा करने में विश्वास करता हूं। तो अभी चुंकि मेरे पास सिर्फ काम ही काम है, तो उसमें से आपको भी हिस्सा मिलेगा। महत्वपूर्ण है कि हम जो भी करें, वो अच्छी तरह से करें, ताकि उसका अधिकतम प्रभाव पड़ सके।

आज मानवता चैराहे पर खड़ी है। फिलहाल मानव जाति जिस स्थिति में है, उसमें कुछ बुनियादी बदलाव हो रहा है। जिन चीजों ने मानवता को उम्मीद दी थी, वे लड़खड़ा रही हैं और दूर जा रही हैं। अगर आप हर उस चीज पर विश्वास करते, जो आपको बताई गई हैं तो फिर आप आध्यात्मिक प्रकिया की ओर नहीं बढना चाहते। तब आप सोच सकते हैं कि आप सारी सृष्टि, ईश्वर, स्वर्ग व नर्क सबके बारे में जानते हैं। और बिना कुछ जाने आपकी जिंदगी यूं ही गुजर जाएगी।

आने वाले बारह साल आध्यात्मिकता की दृष्टि से दुनिया के लिए स्वर्ण युग होंगे। कई मायनों में यह दौर महान संभावनाओं से भरा होगा। जब हम टॉप गियर मे पहुंचेंगे तो हमारी गति काफी तेज होगी।
ज्यादातर लोगों को आज तक कभी भी किसी चीज ने गहराई से नहीं छुआ है। उन्होंने कभी भी किसी पेड़ को आँसू भरी निगाहों से नहीं देखा। उन्होंने कभी भी किसी तितली को गौर से नहीं देखा और न ही उसे उड़ते देख कभी सिहरन महसूस की। उन्होंने कभी भी उगते हुए सूरज की रोशनी को जमीन की घास तक पहुँचने से पहले नहीं देखा। वे लोग सही मायने में जीवंत हुए बिना जीवन जीते रहे हैं।

आने वाले सालों में आध्यात्मिक और सामाजिक तौर बड़ी चीजें घटित होंगी। आने वाले समय में दुनिया में बहुत बदलाव होगा और साथ-साथ मुझे लेकर भी बड़ा बदलाव होगा। उसके लिए तैयार रहें। यह एक अच्छा समय आने जा रहा है, लेकिन सभी अच्छी चीजों की तरह यह भी तमाम गतिविधियों से भरा होगा। कई अलग समूह भी इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन हमें इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। अमेरिका की शीर्ष विश्वविद्यालयों (यूनिवर्सिटीज) मसलन स्टैनफोर्ड, हावर्ड, येल, व्हार्टन बिजनेस स्कूल के साथ-साथ कई आइवीवाई लीग स्कूल भी पहली बार आध्यात्मिक प्रक्रिया के लिए अपने दरवाजे खोल रहे हैं। समय की कमी के चलते हमें चयन करना पड़ रहा है। लेकिन मेरा इरादा सभी युवाओं तक पहुंचने का है। हालांकि विश्वविद्यालय मेरे लिए कोई खास मायने नहीं रखते, क्योंकि मैं इस ब्रम्हाण्ड में रहता हूं। लेकिन ये विश्वविद्यालय इस राह के आखिरी किले थे। अब अकादमी ने भी रहस्यवाद और आध्यात्मिकता को अपने जीवन के एक हिस्से के तौर स्वीकार करना शुरू कर दिया है।

दुनिया के लिए यह अच्छी बात है कि यहां स्थापित तमाम क्षेत्र मसलन कॉर्पोरेट जगत, शिक्षा जगत और यहां तक कि राजनैतिक क्षेत्र भी अब खुद को आध्यात्मिक प्रक्रिया के लिए खोल रहे हैं। हाल ही में हमने आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों के लिए कार्यक्रम किए। अगले कुछ दिनों में हम राजस्थान सरकार के लिए कार्यक्रम करने जा रहे हैं, जिसमें मुख्यमंत्री से लेकर, सारे मंत्री और अफसर तक सब शामिल होंगे। यह अतीत के तमाम संतो और ऋषियों का आशीर्वाद है, जो हमेशा से चाहते थे कि आध्यात्मिक प्रक्रिया और राजनैतिक प्रक्रिया के बीच आपसी रिश्ता हो। भारत जैसे विविधता भरे देश को चलाना कोई आसान काम नहीं है। कोई शक नहीं कि कुछ राजनीतिज्ञों ने भयानक काम किए हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ शानदार चीजें भी हुई हैं। 1947 से लेकर आज तक देश में अद्भुत बदलाव हुआ है। निस्संदेह हम लोग और अच्छा कर सकते थे, फिर भी हमने कोई बहुत खराब भी नहीं किया है। आने वाले पांच से दस साल भारत के लिए स्वर्ण युग होने जा रहे हैं।

आध्यात्मिक प्रक्रिया के विस्तार के लिए आर्थिक विकास का होना जरूरी है, क्योंकि तभी लोग महसूस कर पाएंगे कि अच्छा खाने, भरपूर शॉपिंग के बावजूद जीवन में खालीपन है। आप किसी भूखे से यह नहीं कह सकते। क्योंकि भूखे से आध्यात्मिकता की बात करना उसके साथ क्रूरता होगी। पहले आपको उसका पेट भरना होगा और फिर भरे पेट उसे यह महसूस कराना होगा कि अभी भी जीवन में कुछ खालीपन है। इसलिए लोगों के जीवन में आध्यात्मिकता प्रक्रिया लाने के लिए आर्थिक विकास एक महत्वपूर्ण पहलू होता है। इसी तरह आर्थिक विकास से मानव कल्याण को पाने के लिए आध्यात्मिक प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण कारक है।

पूरी दुनिया में आध्यात्मिकता का वसंत आना चाहिए। यानी आध्यात्मिक वसंत एक विश्वव्यापी घटना होनी चाहिए। मानवता के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि कोई गुरु एक अरब लोगों से एक साथ बात कर सके।
अगर आर्थिक विकास होने के बावजूद लोग बेहतर महसूस नहीं कर रहे या खुश नहीं हैं तो यह भी अपने आप में एक क्रूरता है। हालाँकि यह दुनिया की एक बड़ी सच्चाई है। लगभग 40 फीसदी यूरोपीय लोग मनोरोगी हैं। तमिलनाडु का हर दसवां  व्यक्ति मधुमेह का रोगी है और यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा हाथ में जरा भी पैसा आते ही शराब के नशे में डूबने लगता है। इसे तो कहीं से भी कल्याण नहीं कहा जा सकता।

जब तक आर्थिक कल्याण को आध्यात्मिक कल्याण का सहारा नहीं मिलता, तब तक इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं होगा। इस संदर्भ में भारत खुशकिस्मत है, क्योंकि आने वाले बारह सालों में यहां बड़े पैमाने पर आर्थिक कल्याण और आध्यात्मिक कल्याण साथ-साथ होगा। लेकिन बात जब अध्यात्मिक बेहतरी की आती है तो हमें इसे समूची मानवता के कल्याण के संदर्भ में सोचना होगा। मैं चाहता हूं कि आपको जिसकी परवाह है, उसके लिए कुछ बनाने या निमार्ण करने की खुशी को आप समझें। कुछ युवा लोग, जो योग टीचर या पूर्णकालिक स्वयंसेवी बनने के लिए सहर्ष तैयार हुए, वे अब अपनी जिदंगी आप तक पहुँचने, आपके शहरों तक आकर आपके लिए कार्यकम आयोजित करने में लगा रहे हैं। अब समय आ गया है कि आप भी उठ खड़े हों और इसमें शामिल हों, क्योंकि कोई भी आध्यात्मिक आंदोलन तभी सफल होता है, जब यह विश्व में आध्यात्मिकता के लिए एक चलन शुरू करता है। जहां तक आपकी अपनी मुक्ति का सवाल है तो उसके लिए परेशान मत होइए, उसका पूरा खयाल रखा जाएगा, यह हमारे लिए कोई बड़ा काम या मुद्दा है ही नहीं। लेकिन क्या यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम एक ऐसी दुनिया में रहें, जिसमें हम कहीं भी चले जाएं, हमें एक आध्यात्मिक सुगंध का अहसास होता रहे।

पूरी दुनिया में आध्यात्मिकता का वसंत आना चाहिए। यानी आध्यात्मिक वसंत एक विश्वव्यापी घटना होनी चाहिए। मानवता के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि कोई गुरु एक अरब लोगों से एक साथ बात कर सके। कृष्ण अपने आप में शानदार व्यक्तित्व थे, उन्होंने जो कुछ कहा, बेहद सौम्यता के साथ कहा, जिसे कुछ लोगों ने सुना। गौतम बुद्ध कहीं ज्यादा केन्द्रित थे। हो सकता है कि उन्होंने अपनी बात अपेक्षाकृत जोर से कही हो और उसे कहीं ज्यादा लोगों ने सुना हो। आज हम तकनीकी रूप से इतने सक्षम हो चुके हैं कि अगर हम पर्याप्त व्यवस्था कर लें तो हम एक जगह बैठ कर सात अरब लोगों से एक साथ संवाद स्थापित कर सकते हैं। इससे पहले यह कभी संभव नहीं था। जब दुनिया में हर तरह का कचरा या बेकार की चीजें इतनी आसानी से सब तक पहुंचाई जा रही हैं तो अब सही समय आ गया है कि पूरी दुनिया तक आध्यात्मिकता भी पहुंचाई जाए।

इस मुकाम पर हमारे साथ जितने भी लोग हैं, उनमें से दो तिहाई लोगों ने कभी हमारे साथ किसी कार्यकम में हिस्सा नहीं लिया है, फिर भी वे किसी न किसी रूप में भागीदारी कर रहे हैं। ये सारे लोग यूट्यूब, फेसबुक, किताबों, टेलीविजन कार्यक्रमों के जरिए हमसे जुड़े हैं और इस तरफ प्रेरित हो रहे हैं। इसका एक उदाहरण हाल ही में उज्जैन में दिखा।

आज हम तकनीकी रूप से इतने सक्षम हो चुके हैं कि अगर हम पर्याप्त व्यवस्था कर लें तो हम एक जगह बैठ कर सात अरब लोगों से एक साथ संवाद स्थापित कर सकते हैं। इससे पहले यह कभी संभव नहीं था।
वहां मैं कुंभ मेले में भाग लेने गया था। वहां प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सशस्त्र पुलिसमैन लगे थे। उनमें से कइयों के चेहरे पर मुझे देखते ही चमक आ गई और मुझे देखकर वे ‘शिव-शिव’ चिल्लाने लगे। उनके स्वरों में वैसी ही गूंज थी, जो शिवरात्रि के मौके पर होती है। वे सब शिवरात्रि के दौरान होने वाले सीधे प्रसारण से हमसे जुड़े थे। वे हमारे साथ एक हो चुके थे।

बात सिर्फ इतनी है कि तकनीक के चमत्कार का इस्तेमाल सही मकसद के लिए होना चाहिए, मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए। मानव कल्याण तभी संभव है, जब आध्यात्मिक प्रक्रिया, आर्थिक प्रक्रिया व राजनैतिक प्रक्रिया एक साथ कदम मिला कर आगे बढ़ें। मैं चाहता हूं कि आप सब लोग इस महत्वूपर्ण समय के लिए उठ खड़े हों। कई चीजें योजनाओं में हैं। आने वाले सालों में आप इन्हें कई रूपों में साकार होते देख सकेंगे। मैं पहले भी यह कह चुका हूं कि जैसे-जैसे हम इस दिशा में गियर बदल रहे हैं और अपनी गति बढ़ा रहे हैं, उसमें आप खुद को दृढ़तापूर्वक संभाले रहें, अन्यथा आप छिटक कर दूर गिर सकते हैं या पीछे छूट सकते हैं। मैंने कई अपने काफी प्रिय लोगों को खुद से अलग होते हुए और मेरे अपने जीवन से दूर जाते हुए देखा है। मेरे लिए सबसे जरूरी चीज है कि जब बदलाव का क्षण आए तो आप अलग न हों। तो मैं आप सब लोगों से कह रहा हूमं कि हम फिलहाल गियर बदल रहे हैं। जो लोग भी इस समय सो रहे हैं, वे गिर न पड़ें। आइए हम मिलकर इसे साकार करें – आपके लिए और इस दुनिया के लिए।

प्रेम व प्रसाद,

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