तीर्थ यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?


सद्‌गुरुअपने कैलाश यात्रा के दौरान अपने अनुभवों को साझा करते हुए सद्‌गुरु आज के स्पाॅट में बता रहे हैं कि तीर्थ यात्रा का महत्व हमारे लिए क्या है…

कैलाश एक लत की तरह है

जो लोग मेरे साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे हैं, उनमें से बहुत से लोगों ने कभी सपने में भी किसी तीर्थ यात्रा पर जाने के बारे में नहीं सोचा होगा। यहां तक कि मैंने भी कभी नहीं सोचा था कि मुझे कभी तीर्थ यात्रा पर जाने की जरुरत होगी। लेकिन मैं तेरहवीं बार इस यात्रा पर जा रहा हूं। हर बार मैं जब ऐसी यात्रा से लौटता हूं तो मैं सोचता हूं, ‘बस अब बहुत हुआ, अब और पहाड़ों की यात्रा नहीं होगी।’ लेकिन दो महीने बीतते-बीतते हम फिर अगली यात्रा की योजना बनाने में जुट जाते हैं। मैं कई शक्तिशाली व ऊर्जा वाली जगहों पर गया हूं। कई असाधारण प्राणियों से मिला हूं, ऐसी जगहों पर गया हूं, जो ऊर्जा से स्पंदित होती हैं। लेकिन मुझे अभी तक एक भी ऐसी जगह नहीं मिली, जो कैलाश की तरह स्पंदित होती है और यही वजह है जो मुझे बार-बार यहां खींचती है। एक तरह से कैलाश एक लत है।

तीर्थ यात्रा करने का सही तरीका

हम इसे तीर्थ यात्रा क्यों कहते हैं? इसे एक पर्यटन या ट्रेकिंग क्यों नहीं कहते? अगर आप एक टूरिस्ट हैं तो आप बस पहाड़ों व उसके रास्तों को थोड़ा घिस देंगे।

अगर ऐसा करना बहुत मुश्किल है तो कम से कम इतनी कोशिश कीजिए कि आप अपने आप को जो भी समझते हैं, उससे थोड़ा कम करने की कोशिश कीजिए। 
अगर आप एक तीर्थयात्री हैं तो आप इस बाहरी यात्रा का इस्तेमाल अपनी भीतरी यात्रा के लिए कर सकते हैं। क्या आप पहाड़ी रास्तों को अपने भीतर संजोना चाहते हैं या फिर कुछ और अपने भीतर उतारना चाहते हैं? यह फैसला आपको लेना होगा। एक तीर्थ यात्रा का मतलब खुद को कम करना है। अगर आप खुद को ‘कुछ भी नहीं’ कर देने में सक्षम हैं तो आप इस दुनिया में जीवन के एक अंश के रूप में रह सकते हैं और सिर्फ सांसें लेते रहेंगे। अगर ऐसा करना बहुत मुश्किल है तो कम से कम इतनी कोशिश कीजिए कि आप अपने आप को जो भी समझते हैं, उससे थोड़ा कम करने की कोशिश कीजिए। एक तीर्थयात्री होने का यही तरीका है।

अपनी सीमाओं तो तोड़ने के लिए है तीर्थ यात्रा

सवाल है कि आप इसे घर पर क्यों नहीं कर सकते? आप कर सकते हैं, लेकिन आपने किया नहीं। इसीलिए हम यहां हैं।

अगर आपको उड़ना है तो इसके लिए आपको आसमान को नहीं संभालना होगा। आपको केवल उस पहलू को संभालना होगा, जो आपको नीचे की ओर खींच रही है।
अगर आपका खुद को बदलना मुश्किल है तो फिर अपने भीतर की ओर मुड़ने में सहायता करने के लिए यात्रा एक अच्छा उपाय है। यह आपकी सीमाओं को खत्म करता है। आप जिसे जीवन कहते हैं, उसके हर पहलू को लेकर एक सीमा है। यहां तक कि आपका शरीर भी अपने आप में एक तरह की सीमा ही है, इसी तरह से आपके मन, भावना और ऊर्जा की भी अपनी सीमा है। अगर कोई सीमा है और आप उसे तोड़ देते हैं तो आप असीम को पा लेते हैं। कैलाश यात्रा इसी आयाम को लेकर है, यहां आकर आपको उस असीम को आत्मसात करने का मौका मिलता है। आप खुद को असीम कैसे बना सकते हैं? चूंकि आजादी को लेकर लोगों की सोच अकसर यह होती है कि हवा में एक पक्षी की तरह उड़ा जा सके। मैं इस उदाहरण का इस्तेमाल करना चाहूंगा। अगर आपको उड़ना है तो इसके लिए आपको आसमान को नहीं संभालना होगा। आपको केवल उस पहलू को संभालना होगा, जो आपको नीचे की ओर खींच रही है। इसका मतलब हुआ कि आपको अपने गुरुत्वाकर्षण को संभालना होगा। इसी तरह से आपको अगर आजादी चाहिए तो आपको उस डोर को संभानला होगा, जो आपको बांधती है। जो चीज आपको नीचे की ओर खींचती या बांधकर रखती है, उसे संभालने का नजीता ही आजादी है। अगर आप समस्याओं को हैंडल करेंगे तो उनका समाधान भी निकलेगा। लेकिन चूंकि लोगों को यह बात समझ में नहीं आती तो वे खुद को दिए जा रहे हर समाधान को एक समस्या में बदल देते हैं।

तीर्थ यात्रा को समस्या मत बनाएं

अरबों लोगों के लिए कैलाश यात्रा एक स्वप्न की तरह है, कम से कम दुनिया के इस हिस्से में तो ऐसा ही है। 

 मैं चाहता हूं कि आप भी जीवन में परिस्थितियों का अनुभव उसी तरह से करें, जैसे मैं करता हूं। मैं किसी भी चीज को समस्या के तौर पर नहीं देखता।
आप एक तीर्थ यात्रा को एक समस्या मत बनाइए। भले ही कुछ भी हो, लेकिन आप इसे किसी समस्या की तरह मत देखिए, जो भी हो रहा है वह एक स्थिति है। समस्या तो बस एक बिल्ला है, जो आप किसी चीज पर चिपका देते हैं। जीवन घटित हो रहा है, असली चीज यही है। आप या तो यहां मौजूद हर चीज का इस्तेमाल जीवन के अपने अनुभवों को बढ़ाने में कर सकते हैं या फिर आप खुद को गांठों में बांध कर रख सकते हैं। किसी चीज को ‘समस्या’ का नाम देने से आप अपने जीवन के अनुभव को समृद्ध नहीं कर सकते। मैं चाहता हूं कि आप भी जीवन में परिस्थितियों का अनुभव उसी तरह से करें, जैसे मैं करता हूं। मैं किसी भी चीज को समस्या के तौर पर नहीं देखता। मैं सिर्फ इसका ध्यान रखता हूं कि कैसे खुद सहित हर चीज को बेहतर बनाया जाए। इस तरह से जीने से आपका जीवन ही तीर्थ यात्रा हो उठेगा।

प्रेम व प्रसाद,

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