सुंदरता की परिभाषा क्या है?

सुंदरता की परिभाषा क्या है?

यक्ष और महाशिवरात्रि 2016 के अवसर पर ईशा योग केंद्र में ठहरने के दौरान मशहूर फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी ने सुंदरता, डिजाइन, फैशन और योग पर चर्चा के लिए सद्‌गुरु से मुलाकात की। उनके बीच हुई चर्चा का पहला अंश सुंदरता से जुड़ा है, आइये जानते हैं कि वे सुंदरता को कैसे परिभाषित करते हैं…

सुंदरता सहजता है

संचालक: आपके लिए सुंदरता क्या है?

सब्ससाची मुखर्जी: सुंदरता के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, मगर मैंने हमेशा यह महसूस किया है कि सुंदरता वास्तव में खुद को स्वीकार करने और आपकी सहजता से उभरती है। जिस पल आप खुद को लेकर सहज होते हैं, आप सुंदर महसूस करते हैं। स्टाइल वह है जब एक पांच फुट एक इंच की महिला किसी पार्टी में हील न पहनकर फ्लैट सैंडल पहने। मेरे ख्याल से जब आप खुद को स्वीकार करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास दूसरे लोगों को आपकी ओर आकृष्ट करता है। शायद असली सुंदरता यही है।

संचालक: और एक पुरुष के लिए सुंदरता क्या है?

सब्यसाची: मेरे ख्याल से वह भी सहजता और आराम है। देखिए, आज की दुनिया में हम सब के साथ क्या होता है। मैं आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। मैं योग नहीं करता और काम के दबाव के कारण शरीर के साथ भी बहुत नाइंसाफी करता हूं। मैं ध्यानलिंग में बैठा हुआ था, जब तक कि घंटी नहीं बजी। एक लंबे समय के बाद मैंने खुद के साथ पंद्रह मिनट बिताए थे। मेरे ख्याल से हममें से ज्यादातर लोग सुंदर इसलिए नहीं महसूस करते क्योंकि हम खुद की नहीं सुनते। यही वजह है कि हम हमेशा अच्छा महसूस करने के लिए कपड़ों, ब्रांड, फैशन को सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल करते हैं। हम यह तक नहीं जानते कि हम पर उनका कोई असर भी पड़ रहा है या नहीं। इसके उल्टा, समय के साथ वह हमसे हमारा आत्मविश्वास छीन लेता है। इसलिए मेरे ख्याल से चाहे पुरुष हो या स्त्री, सुंदरता सहजता से शुरू होती है।

ब्रह्माण्ड की हर चीज़ में सुंदरता है

संचालक: सद्‌गुरु, आपके अनुसार सुंदरता क्या है?

सद्‌गुरु: अगर कोई सुंदरता का पारखी हो, तो उसके लिए हर ऐसी चीज – चाहे वह मशीन हो, चींटी, कोई कीट, मनुष्य, कपड़े या इमारतें – जिसमें भी कम से कम संघर्ष हो सुंदर है। मैं बचपन से ही हर तरह के जीव पर काफी ध्यान देता था, इसमें बहुत समय बिताता था। मैंने पाया कि रंग, ज्यामिति और कार्यकलाप की विविधता में एक नन्हे से कीड़े की बनावट भी बहुत शानदार होती है। आप किसी भी जीव को देखें, तो आप पाएंगे कि प्रकृति और क्रमिक विकास ने कितनी सुंदरता से उसका रूप संवारा है। न सिर्फ सूर्योदय या सूर्यास्त जैसी कोई बड़ी चीज, बल्कि छोटे से छोटे जीवों की बनावट भी बहुत सुंदर होती है।

अगर आप अंदाजा लगाते हैं कि कोई कीट अपने आकार और ऊर्जा की तुलना में कितना क्रियाकलाप करता है, तो यह साफ हो जाता है कि वह ज्यामितीय दृष्टि से संपूर्ण है और न्यूनतम संघर्ष और टकराव के साथ काम कर रहा है। अच्छी बनावट वाली हर चीज मुझे रोमांचित करती है – चाहे वह मशीन हो, इमारत हो, या कोई कीड़ा, पशु या मनुष्य। जहां तक इंसानों की बात है, तो जब वे आनंदित और उत्साहित होते हैं, तो हर किसी का चेहरा सुंदर लगता है। शरीर को सुंदर रखने में थोड़ी मेहनत लगती है। बहुत से लोग धरती के आकार के हो रहे हैं। जब मैं बड़ा हो रहा था, तो लगभग हम सभी लोग दुबले-पतले थे क्योंकि हम शारीरिक रूप से काफी सक्रिय होते थे। आजकल स्कूली बच्चे काफी हद तक मोटे हैं।

सुंदरता की तकनीकी परिभाषा

इसका मतलब यह नहीं है कि गोल-मटोल व्यक्ति सुंदर नहीं है। आप हर चीज में सुंदरता देख सकते हैं। लेकिन जब हम तकनीकी रूप से सुंदरता की बात करते हैं, तो मेरे ख्याल से इसका मतलब ज्यामितिय रूप से सटीक होना है। जब कोई प्रणाली कम से कम संघर्ष के साथ काम करती है, तो उसके काम करने का तरीका सुंदर होता है। यह बात हर चीज पर लागू होती है। उदाहरण के लिए ध्यानलिंग का गुंबद ज्यामितिय सटीकता के कारण खड़ा है, उसमें लगी सामग्री की मजबूती के कारण नहीं। यही चीज आश्रम की दूसरी इमारतों के साथ भी है, आदियोगी आलयम गोलाई में मुड़े हुए बीम के साथ बनाया गया है। हम हमेशा हर इमारत को ज्यामितिय दृष्टि से सटीक बनाना चाहते हैं ताकि हमें कम सामग्री की जरूरत पड़े।

विकास की प्रक्रिया में हमेशा ज्यामिति पर ध्यान दिया गया है। धरती अपनी धुरी पर इसलिए है क्योंकि उसने एक तरह की ज्यामितिय संपूर्णता पा ली है। अगर वह जरा भी अपनी कक्षा से बाहर चली जाए, तो फिर वापस नहीं आ सकती। पूरा ब्रह्मांड ज्यामितिय रूप से संपूर्ण है। जब मैं किसी पेड़, बादल, पुरुष, स्त्री, या किसी भी चीज की ओर देखता हूं, तो मुझे सबसे पहले ज्यामिति दिखती है, बाकी सब कुछ गौण होता है। अस्तित्व का कोई भी रूप, जो किसी तरह का ज्यामितिय तालमेल नहीं प्राप्त कर पाता, वह अधिक दिन नहीं टिकेगा, चाहे वह कुछ भी हो। पूरी योगिक प्रणाली का मकसद आपके शरीर को ब्रह्मांडीय ज्यामिति के तालमेल में लाना है, ताकि अगर आप दो दिन तक यहां बैठे रहें, तो भी कोई समस्या न हो क्योंकि आप शरीर की ज्यामिति को समझ चुके हैं।

संचालक: यह दिलचस्प है कि आप दोनों ने अपने उत्तरों में सौंदर्य को एक अलग श्रेणी के रूप में नहीं देखा। बहुत सारे लोग मानते हैं कि उपयोगी चीज और सुंदर चीज किसी न किसी रूप में अलग हैं। निश्चित रूप से जब सब्यसाची, आप सहजता की बात करते हैं, तो आप उपयोगिता को सुंदरता के रूप में देखते हैं। और सद्गुरु, आप ज्यादा मूलभूत रूप में उपयोगिता की ही बात करते हैं। क्या अकुशलता, अयोग्यता सुंदर हो सकती है? मैं किसी फूल जैसी चीज के बारे में सोच रही हूं, जिसकी उपयोगिता पौधे को छोड़कर किसी और के लिए नहीं है। मगर देखने वाले के लिए वह असाधारण रूप से सुंदर है – क्योंकि उसमें तालमेल और ज्यामिति है। क्या आप यही कह रहे हैं?

सद्गुरु: फूल इतनी नाजुक चीज है, मगर जब तक उसका मकसद पूरा नहीं होता, वह तब तक खिला रहता है। वह इतना नाजुक और कमजोर होता है, कि ज्यामितिय तालमेल के बिना बने रहना उसके लिए संभव नहीं होता। वास्तव में प्रकृति में सब कुछ ज्यामितिय तालमेल में है, क्योंकि प्राकृतिक शक्तियां ज्यामितिय रूप से सटीक होती हैं।

 


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