नाग पंचमी : सांप दुश्मन नहीं, पूजनीय हैं

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सांप जिन्हें हम खतरनाक समझते हैं, प्राणहारक समझते हैं, उनकी हम पूजा भी करते हैं। आखिर यह विरोधाभास क्यों ?

सद्‌गुरु बताते हैं कि सांपों का आध्यात्मिकता से बहुत गहरा संबंध रहा है। इसका एक सहज सा कारण यह है कि उनमें उन आयामों को भी समझने की क्षमता होती है जो दूसरे प्राणी नहीं समझ पाते। मजे की बात यह कि उनके कान नहीं होते, लेकिन चूंकि उनका पूरा शरीर धरती के सीधे संपर्क में होता है इसलिए उनमें महसूस करने की अद्भुत क्षमता होती है। इसीलिए उन्हें शिव ने भी अपने गले में स्थान दिया है।

सांपों की इस क्षमता को हमारी संस्कृति में बहुत पहले समझा गया और उन्हें पूरा सम्मान दिया गया। उसी सम्मान को व्यक्त करने का एक तरीका है- यह नागपूजा। इस नाग पंचमी पर आपके लिए प्रस्तुत है नाग स्त्रोतम :

 

 

नाग स्त्रोतम

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अनन्त नागेन्द्राय, आदिशेष नागेन्द्राय

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वासुकी नागेन्द्राय, कारकोटक नागेन्द्राय

 

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तक्षक नागेन्द्राय, पर्वताक्ष नागेन्द्राय

नाग नाग नागेन्द्राय, नाग नाग नागेन्द्राय

मानस नागेन्द्राय, पद्मनाभ नागेन्द्राय

 

नाग नाग नागेन्द्राय, नाग नाग नागेन्द्राय

अस्तिक नागेन्द्राय, उलूपी नागेन्द्राय

नाग नाग नागेन्द्राय, नाग नाग नागेन्द्राय

कुन्डलिनी नागेन्द्राय, कुन्डलिनी नागेन्द्राय

 

नाग नाग नागेन्द्राय, नाग नाग नागेन्द्राय

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