सहवाग, जूही चावला, अनुपम खेर… का सवाल, सद्‌गुरु का जवाब

सहवाग, जूही चावला, अनुपम खेर... का सवाल, सद्‌गुरु का जवाब
सहवाग, जूही चावला, अनुपम खेर... का सवाल, सद्‌गुरु का जवाब

योग और उससे जुड़े कुछ पहलुओं पर कुछ मशहूर  शख्सियतों ने सद्‌गुरु से समय समय पर सवाल पूछे हैं। क्या हैं वो सवाल और क्या हैं उनके जवाब:

शेखर कपूर

शेखर कपूर (फिल्म निर्माता): हर कोई सिर्फ योग के शारीरिक पहलुओं के बारे में बात क्यों करता है?

सद्‌गुरु: योग का एक पहलू यह सुनिश्चित करना है कि आपका शरीर आपके लिए बाधा न बने। शरीर विवशताओं से भरा हुआ है। यह बहुत बुरा बंधन हो सकता है। या फिर आपकी कल्पना से परे किसी असाधारण रूप से सुंदर चीज के लिए सोपान बन सकता है। अगर आप खुद एक समस्या हैं, तो आप दुनिया में दूसरी समस्याओं को कैसे सुलझा सकते हैं? शारीरिक योग शरीर, मन, भावनाओं और ऊर्जा को तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि वे बाधा न बनें। मगर योग के दूसरे आयाम और पहलू भी हैं और उसे सिर्फ कसरत तक सीमित कर देना एक अपराध होगा!

वीरेंद्र सहवाग

वीरेंद्र सहवाग (क्रिकेट खिलाड़ी): बल्लेबाजी करते हुए, कभी-कभार मेरा मन कहता है, ‘बस गेंद को मारो!’ मैं इन विचारों पर काबू कैसे करूं?

सद्‌गुरु: मानव मन में अनुभूति, याद्दाश्त और कल्पना एक साथ चलते रहते हैं। आपके मन में खेल से जुड़ी एक याददाश्त है। साथ ही आपके मन में कल्पना भी है कि जीतने के बाद आप कप को किस तरह पकड़ेंगे। और एक वास्तविकता होती है उस गेंद की जो आपकी ओर आ रही है। याद्दाश्त उस बात की होती है, जो बीत चुकी है, कल्पना वह है जो होना अभी बाकी है। इन दोनों के साथ आप ख्याली पुलाव पका सकते हैं। केवल वास्तविकता ही है, जिसे आप संभाल सकते हैं। लोग इन चीजों को अलग-अलग नहीं रख पाते। आपको बस दिमाग की स्पष्टता की जरूरत है। योग इस स्पष्टता को आपके जीवन में ला सकता है

जूही चावला

जूही चावला (अभिनेत्री): योग और मेडिटेशन के बीच क्या अंतर है?

सद्‌गुरु: अंग्रेजी शब्द ‘मेडिटेशन’ का कोई मतलब नहीं है क्योंकि अगर आप बंद आंखों के साथ बैठते हैं, तो आप ‘मेडिटेट’ या ध्यान करते हैं। मगर बंद आंखों के साथ, आप कई चीजें कर सकते हैं – जप, तप, धारण, ध्यान, समाधि, शून्य। या हो सकता है कि आपने बैठकर सोने की कला में महारत हासिल कर ली हो! अगर मेडिटेशन से आपका मतलब ध्यान से है, तो यह योग का एक पहलू है। ‘योग’ एक व्यापक शब्द है, जिसमें बहुत से पहलू शामिल होते हैं। इसका मतलब कोई खास अभ्यास नहीं होता। आप जो चाहे कर रहे हों – सिर्फ जॉगिंग या समुद्र को निहारना – आप अपनी उच्चतर प्रकृति को प्राप्त करने की एक प्रक्रिया के रूप में उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यही योग है।

के वी कामथ

के. वी. कामत (बैंकर): सद्‌गुरु, अहं से छुटकारा कैसे पाएं?

सद्‌गुरु: बहुत से लोग यह तरीका अपनाते हैं: जब वे खुश होते हैं, तो उनका अहं गायब होता है। जब भी वे कुछ बुरा करते हैं, तो उसका इल्जाम अहं पर डाल देते हैं। यह बस अपनी जवाबदेही किसी और के सिर मढ़ने का एक और तरीका है। अगर आप कहते हैं, ‘इस शरीर में मैं और मेरा अहं दोनों रहते हैं,’ तो इसका मतलब है कि आप दो लोग हैं। अगर आपके अंदर दो लोग हैं, तो इसका मतलब है कि या तो आप स्कित्जोफ्रेनिक हैं या प्रेतात्मा से ग्रस्त। आप बस एक व्यक्ति हैं। अगर आप एक व्यक्ति हैं, तो आप समझ सकते हैं कि आप चाहे बहुत अच्छे हैं या बहुत बुरे – यह बस आप हैं। जब आप इस बात को समझ लेते हैं, तो क्या आप बुरा होना चाहेंगे?

अनुपम खेर

अनुपम खेर: सद्‌गुरु, लोग दुखी क्यों होते हैं?

सद्‌गुरु: लोग दुखी इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने जीवन के मूलभूत उपकरणों को अपने हाथ में नहीं लिया है, जो उन्हें मिले हैं। मानव प्रणाली पृथ्वी का सबसे जटिल उपकरण है। अधिकतर लोग उसकी क्षमता के एक फीसदी से भी कम का इस्तेमाल कर पाते हैं। मनुष्य होने का मतलब क्या है, इस पर ध्यान तक नहीं दिया गया है।

योग आपको सृष्टि के स्रोत तक ले जाता है, जो आपके भीतर धड़क रहा है। इसमें एक ऐसी बुद्धि है जो रोटी के टुकड़े को एक जटिल मशीन में बदल सकती है। अगर इस बुद्धि की एक बूंद भी आपके रोजमर्रा के जीवन में प्रवेश कर जाए, तो आपका जीवन चमत्कारी हो जाएगा।


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