उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ईशा के सशक्त प्रयास

Isha-Education-09

मुझे भारत लौटे तीन हफ्ते हो चुके हैं और इस दौरान तीन दिन के तीन इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। एक कार्यक्रम का आयोजन हैदराबाद में हुआ, जो एक खास तरह के लोगों के लिए था, जबकि दो अन्य कार्यक्रम काफी विशाल आयोजन थे, जिनमें दस हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। पॉन्डिचेरी कार्यक्रम में 10,068 लोगों ने भाग लिया, जबकि नागरकोइल में 10,500 से ज्यादा लोग थे। आध्यात्मिक जागरण की तलाश में इतने सारे लोगों को जुटते देखना अपने आप में एक बेहद रोमांचकारी अनुभव था। वास्तव में, अंत में हमें प्रतिभागियों का नामाकंन रोकना पड़ा, क्योंकि हमारे पास सिर्फ दस हजार लोगों के लिए ही व्यवस्था थी। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने जिस तरह अनुशासन और समपर्ण दिखाया, उसका वर्णन कर पाना बेहद मुश्किल है। छोटे शहरों या कस्बों में इस तरह की असाधारण घटनाएं खासा बदलाव करने वाली साबित होती हैं, जहां तीन दिनों तक इलाके की तकरीबन 3 से 5 फीसदी आबादी किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेती है। छोटे शहरों में इतनी बड़ी संख्या में साधकों और स्वयंसेवियों का जुटना आत्मबोध की दिशा में सही मायने में एक मौन क्रांति है।

यही वो चीज है, जिसके लिए हम पिछले तीन दशक से काम कर रहे हैं। बहरहाल ईशा को शुरू हुए पूरे 30 साल हो गए और आज गुरु पूर्णिमा है।

इसी 2 जुलाई को ईशा ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त प्रयास की धमाकेदार शुरुआत की। दरअसल, हमने महेंद्रा इंस्टीट्यूटशन के साथ कार्य करने हेतु लंबे समय के लिए भागीदारी की है, ताकि हम तकनीकी शिक्षा को विश्व स्तर पर ला सकें । महेंद्रा यहां अपनी भूमि पर उभरा है और पिछले तीन दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्‍होंने अपने परिसर में शिक्षा के लिए बुनियादी सुविधाएं और स्वस्थ संस्कृति को विकसित करने का अच्छा काम किया है।

कई औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया, क्योंकि ईशा का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य उद्योग जगत के साथ लंबे समय के लिए भागीदारी का भी रहा है। हालांकि ऐसे शिक्षण संस्थानों से जुड़ने के पीछे मकसद सिर्फ रोजगारों की भर्ती नहीं है, बल्कि उद्योग जगत को श्रेष्ठ इंजीनिअर और पेशेवरों को विकसित करने में मदद करना है। साथ ही, उद्योग जगत की शिक्षा क्षेत्र में हासिल किए गए कौशल और अनुभव को काम में लाना भी है।

आज के पवित्र दिवस पर, आदियोगी ने अपनी कृपा व अनुकंपा से मनुष्य के जीवन को एक श्रेष्ठ संभावना में बदल डाला, आप भी साधना की शक्ति और ईश्वरीय अनुकंपा के आनंद को जानें ।

प्रेम व प्रसाद,

 


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