सद्‌गुरु, कैसे निकलूं आपसे भी आगे?


सवालः सद्‌गुरु, जब मैंने इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम में भाग लिया था, तभी से मेरे मन में एक सवाल घूम रहा है। मैंने इनर इंजीनियरिंग, भाव-स्पंदन, सम्यमा और सम्यमा साधना करने वाले लोगों को और यहां तक कि ब्रम्हचारियों को भी देखा है। लेकिन आप जैसा कैसे बना जा सकता है? अगर संभव हो तो आप से आगे कैसे निकला जा सकता है?

सद्‌गुरु:

तो अभी तक आपने इनर इंजीनियरिंग करने वाले, भाव-स्पंदन और सम्यमा करने वाले व ब्रम्हचारियों जैसे तमाम लोगों को देखा और सभी को नकार दिया। मैं चाहता हूं कि आप अगले इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम में जाएं और वहां जाकर वलंटियरिंग( स्वयंसेवा ) करें। आप वहां जाकर देखें कि उस कार्यक्रम के आखिरी दिन लोग किस अवस्था में होते हैं और उसके बाद अगले एक महीने तक आप उसी अवस्था में खुद को बनाए रखें। इसके बाद आप भाव-स्पंदन कार्यक्रम में जाएं। वहां भी देंखे कि उसकी समाप्ति पर लोग किस अवस्था में होते हैं, फिर उन्हीं की तरह आप अगले एक महीने तक रहें। इसी तरह सम्यमा भी आजमाएं। तब आप समझ जाएंगे कि मैं आपसे क्या कहने की कोशिश कर रहा हूं और रूपांतरण के सही मायने क्या हैं? दरअसल, रूपांतरण कोई महत्वांकाक्षा या अरमान नहीं है। यह विकास की एक प्रक्रिया है। अगर आप उचित काम करेंगे तो आपका विकास होगा। यह विकास इसलिए नहीं होगा कि आपने कुछ बनने के बारे में सोचा या चाहा। इसके लिए आपको इस प्राणी को विकास करने की आजादी देनी होगी। अगर यह विकास करता है तो यह यह एक खास संभावना के रूप में विकसित होगा।

अगर आप रूपांतरण चाहते हैं, तो अभी तक आपने अनुभव की जिस भी गहराई को जाना है, खुद को वहीं पर टिका कर रखें।

अगर आप रूपांतरण चाहते हैं, तो अभी तक आपने आपने अनुभव की जिस भी गहराई को जाना है, खुद को वहीं पर टिका कर रखें। इसके लिए आप अपने भीतर ऐसा वातावरण तैयार कीजिए कि आप उसी स्तर पर जिंदगी जी सकें। नहीं तो ऐसा होगा कि आपने एक कल्पित कार्यक्रम में हिस्सा लिया, वहां जाकर कुछ अजीबोगरीब चीजें की, और फिर घर जाकर उसी पुराने ढर्रे पर जिंदगी जीने लगे। यह ठीक नहीं है, इस तरह कोई फायदा नहीं होगा। मान लीजिए आपका सबसे गहरा अनुभव वह है जो आपने भाव-स्पंदन कार्यकम के दौरान महसूस किया था, तो देखिए कि अगले एक महीने तक आप उसी बिंदु पर कैसे टिके रह सकते हैं। उसके बाद आप अगले स्तर के अनुभव को पाने की चाहत कीजिए। अगर किसी ऊंचाई को पाने के बाद आप फिर से नीचे आ जाते हैं और उसके बाद फिर से उसे ही पाने की आकांक्षा रखते हैं तो इसका कोई मतलब नहीं है। अगर कोई एक कदम आगे बढ़ाए और फिर एक कदम पीछे तो इसका मतलब है कि उस इंसान का कहीं भी जाने का इरादा नहीं है।

अपने अनुभव की गहराई में टिकने का बुनियादी सिद्धांत ही तो कार्यक्रम में सिखाया जाता है। आप उसे अपने जीवन में उतारें फिर अगले स्तर की चाहत करें, तब आपकी चाहत हकीकत बन जाएगी, नहीं तो यह कोरा स्वप्न है। अगर आप अपने मकसद को लेकर वाकई गंभीर हैं, आप सचमुच किसी ऊंचाई तक जाना चाहते हैं तो आपको ऐसे ही कदम-दर-कदम, चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना होगा। जो व्यक्ति जीरो पर खड़ा हुआ है, अगर वह लाखों की केवल बातें करता है तो इससे कुछ हासिल नहीं होने वाला। सिर्फ बातों से कुछ नहीं होने वाला, इसके लिए उसे एक-एक पायदान ऊपर चढ़ना होगा।

प्रेम व प्रसाद,

 


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