मेरा राज़

Conversation with the Mystic

मेरा राज़

चलो तुम्हें बताऊँ अपना एक राज़
मेरे पास एक नहीं , दिल हैं दो

एक जो हमेशा रिसता है करुणा से
और दूसरा जो रहे हमेशा आनंद मगन

एक भर उठता है करुणा से कीड़े के लिए
और दूसरा खुश होता है पंछी के लिए

दुख मनाता हूं हारने वाले के लिए
झूम उठता हूं विजयी के लिए

कीड़े-मकोड़े,
पशु- पंछी या इंसान और निःसंदेह
पेड़ -पौधों की मौत पर रोता हूं मैं

आनंदित होता हूं हर जीवन के लिए
आज से अनंत तक

प्रेम व प्रसाद,

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  • http://twitter.com/apurvpramod apurvrao

    Great Poetry…Sadhguru…:)
    I bow down to u….<3

  • अखिलेश

    सद्गुरू की इस कविता में सृष्टि के सभी प्राणियों के प्रति प्रेम और करुणा की नदी उफन कर बहती दिख रही है। सद्गुरू आपको कोटि कोटि नमन।