महाशिवरात्रि की रात – जीवन को उल्लास मय बनाने की प्रेरणा


सद्‌गुरुसद्गुरु आज के स्पॉट में बता रहे हैं कि ऐसा क्या था जिसने इस रात को उनके जीवन को सबसे महत्वपूर्ण रात बना दिया और साथ ही बता रहे हैं अपनी भावी योजना।

मैंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया है, लेकिन अभी तक मैंने ऐसा कोई आयोजन नहीं देखा। महाशिवरात्रि की यह रात कई मायनों में अतुलनीय थी, अब तक की सबसे अनोखी रात थी।

हर योगवीर आने वाले एक साल में कम से कम सौ लोगों को योग के एक सरलतम रूप की शिक्षा व जानकारी देगा। इसका मतलब हुआ कि अगली महाशिवरात्रि से पहले दुनिया में योग के 10 करोड़ नए अभ्यासी होंगे।
इस आयोजन को साकार करने के लिए सभी का एक साथ हमारे साथ जुड़ना सच में अद्भुत था। हमारे प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के चुनावी व्यस्तता और भागदौड़ के बावजूद समय निकाला और दो घंटों के लिए यहां आए। उनके साथ स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप, तमिलनाडु पुलिस, कई सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय लोग कई तरह से हमारे लिए बेहद सहयोगपूर्ण रहे। इतना ही नहीं, वे तमाम कलाकार, जिन्होंने पूरी रात को जीवंत बना दिया, मीडिया, हमारी अपनी ईशा की टीमें, स्वयंसेवी, आश्रमवासी, ब्रह्मचारी सहित हर वो व्यक्ति, जो इस पूरी रात जागता रहा। इस रात को साकार बनाने के लिए मैं उन सबको बधाई देता हूं।

महाशिवरात्रि  – प्रेरणा का स्रोत

इस रात से आपको प्रेरणा मिलनी चाहिए कि आप अपने तन व मन की सीमाओं से परे जाकर सच्चे व पूरे जोशमय ढंग से जी सकें। अपने तन की सीमाओं से परे जाकर काम करने का भी एक तरीका है। अपने मनोवैज्ञानिक ढांचे से बाहर निकल कर काम करने का भी एक तरीका है। इसी तरीके को हम दुनिया के सामने लाना चाहते हैं। आदियोगी इसी को दर्शाते हैं। योग विज्ञान भी इसी के बारे में है।

अपनी भीतरी प्रकृति की कमान खुद संभालने पर ही मनुष्य वाकई मुक्त हो सकते हैं। हम चाहते हैं कि यह अनुभूति और यह संभावना हर इंसान के लिए उपलब्ध हो।
हमारे प्रधानमंत्री, खुद भी एक योग वीर हैं, और योग के पुराने महारथी भी हैं। उन्होंने, महाशिवरात्रि की रात, महा योग यज्ञ की अग्नि को प्रज्जवलित किया। योग विज्ञान को दुनिया के सामने लाने के अपने प्रयास के तौर पर हम लोग दस लाख योग वीर तैयार करना चाहते हैं। हर योगवीर आने वाले एक साल में कम से कम सौ लोगों को योग के एक सरलतम रूप की शिक्षा व जानकारी देगा। इसका मतलब हुआ कि अगली महाशिवरात्रि से पहले दुनिया में योग के 10 करोड़ नए अभ्यासी होंगे।

मैं चाहता हूं कि आपमें से हर व्यक्ति योग वीर बने और आने वाले बारह महीनों में योग सरल साधनों के जरिए कम से कम सौ लोगों को रूपांतरित करे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कितने अस्पताल बनवाते हैं या हमारा मेडिकल साईंस कितनी तरक्की करता है, लेकिन इंसान की सेहत तब तक नहीं सुधरने वाली, जब तक हर व्यक्ति अपनी सेहत की कमान खुद अपने हाथ में न ले ले। हर व्यक्ति अपने कल्याण, अपनी खुशी व अपनी परम मुक्ति के लिए खुद जिम्मेदार है। सरकार, कॉर्पोरेट्स व प्रशासन सिर्फ आपके कल्याण व बेहतरी का बुनियादी ढांचा उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन कल्याण का स्रोत खुद आपके भीतर छिपा है। अपनी भीतरी प्रकृति की कमान खुद संभालने पर ही मनुष्य वाकई मुक्त हो सकते हैं। हम चाहते हैं कि यह अनुभूति और यह संभावना हर इंसान के लिए उपलब्ध हो।

सद्‌गुरु द्वारा लिखी गयी कुछ कविताएं

मुझे अपने दिल पर गर्व था।

ऐसा दिल जो एक चट्टान की तरह मजबूत और स्थिर था।

फिर वे बिना बुलाएआए, और मेरे दिल को धड़का दिया

और कर दिया लहुलुहान।

यह धड़कने लगा हर जीव और पत्थर के लिए।

 

एक सौ बारह चालें, इस नश्वर पिण्‍ड को पस्‍त करने (मात देने) के लिए।

पर मुझे इन चालों में फंसा दिया। चालबाज हैं वो, फंस गया मैं उनकी चाल में।

उस किसी भी चीज के बारे में,

मैं न तो सोच सकाता हूं,

न कुछ कर सकता हूं,

जो मेरा या मेरे लिए है।

 

सभी मीठे स्वरों को सुनने के बाद,

सभी अद्भुत दृश्यों को देखने के बाद,

सभी सुखद संवेदनाओं की अनुभूति के बाद।

मैंने अपना सारा बोध खो दिया,

उनके लिए जो नहीं हैं, पर अनुपम हैं,

उनके समान कोई दूसरा नहीं।

 

ना वे प्रेम हैं, ना ही करुणा।

उनसे सांत्वना व आराम न मांगें।

वे तो पूर्णता के लिए हैं।

 

आईये, उस निराकार के परम आनंद को जानिए।

तृप्ति का आनंद नहीं।

यह खेल है खुद को मिटाने का।

क्या आप एक ऐसे खेल के लिए तैयार हैं

जहां से वापसी नहीं होती।

 

क्या आप खुद को दफनाने के लिए,

अपने भव्‍य दाह संस्कार के लिए वहां रहेंगे।

शमशान के चंडाल – मेरे शिव, की आतिशबाजियां ।

 

क्या आपको उनपर विश्वास नहीं है,

जो निश्‍चल हैं।

उन्होंने मुझे अपनी निश्‍चलता से अंदर खींच लिया।

मुझे लगा कि वे ही मार्ग हैं।

सावधान, वे अंत हैं।

प्रेम व प्रसाद,

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