महाशिवरात्रि की वह अनोखी रात


यक्ष 2014 – सात दिनों तक चलने वाले बेहतरीन नृत्य और संगीत के कार्यक्रम, महाशिवरात्रि के दिन अपने चरम पर था और महाशिवरात्रि की आनंद और उत्सव भरी रात के साथ इसका समापन हुआ। इस समारोह में पूरी दुनिया से लोगों की सहभागिता अभूतपूर्व रही। इसके लिए कार्यक्रम के सीधे प्रसारण और वेबकास्ट करने वालों को धन्यवाद।

 

 

जो लोग महाशिवरात्रि के मौके पर यहां मौजूद थे, उनके लिए तो वह रात कब गुजर गई, पता ही नहीं चला। आनंद का उन्माद और बेहतरीन संगीत से सराबोर उस अति विशेष रात में ध्यान की असीम दिव्य अनुकंपा को भी सबने महसूस किया। यह साल इसलिए भी खास था कि ईशा में महाशिवरात्रि के आयोजन का यह 20वां साल था। इन बीस सालों में यह आयोजन कहां से शुरू होकर किस स्तर पर पहुंच गया है। पहला आयोजन ‘कैवल्य कुटीर’ में भक्ति संगीत से शुरू हुआ जिसमें ‘चेन्नै की अम्मा’ ने अपने दिल की भावनाएं उड़ेल दी थी और अब यह अपने आप में एक अनूठा कार्यक्रम हो गया है।

हालांकि जिसने मानवता को मुक्ति का यंत्र दिया, उसके लिए कोई भी आयोजन महान और भव्य नहीं हो सकता। यह आयोजन तो मेरी एक छोटी सी कोशिश भर है, कि दुनिया को उनका योगदान समझा सकूं जो उन्होंने मानव चेतना के उत्थान के लिए किया है। अगर उनकी कहानी सही तरीके से लोगों को बताई जा सके तो वह हर किसी की मुक्ति का एक महान जरिया बन सकती है और इससे पूरी दुनिया का रूपांतरण हो सकता है।
इस दिशा में किए जा रहे हमारे विशेष प्रयासों में आप भी हाथ बंटाइए।

प्रेम व प्रसाद,

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