कृष्ण – तेरे लिए


हे श्याम-वर्णी ग्वाले
युद्ध और प्रेम दोनों में
तुम तो रहे सदा विनोदपूर्ण, विलासपूर्ण

कहते हो तुम कि नहीं पड़ता कोई फर्क
चाहे तुम करो किसी से प्रेम या वध
तुम तो रहे सदा विनोदपूर्ण, विलासपूर्ण

मत रखो खुद को किसी धोखे में
और देखने से चूक जाओ
उनके विवेक और तेज की विशालता
उनके प्रेम और युद्ध का प्रपंच।

हे श्याम-वर्णी, ना तुम से पहले
ना तुम्हारे बाद हुआ कोई ऐसा
जो प्रेम में और युद्ध में भी
बना रहे सदा विनोदपूर्ण और विलासपूर्ण। 

आगे जारी …

प्रेम व प्रसाद,


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