खूबसूरत सिंगापुर

Sadhguru in Singapore

आश्रम में बेहद भागदौड़ भरे दो दिन बिताने के बाद अब मैं सिंगापुर की चार दिन की यात्रा पर जा रहा हूं। दुनिया के इस हिस्से में इनर इंजीनियरिंग ऑन लाइन कायक्रम का यह पहला प्रयास है। इस दो दिन के कार्यक्रम में 500 से ज्यादा प्रतिभागी हैं। सिंगापुर के हमारे स्वयंसेवक अपनी सांसें थामे इस आयोजन की शुरुआत का इंतजार कर रहे थे। मेरे सिंगापुर पहुंचने पर उनके चेहरे पर आनंद और उमंग दिखाई दे रहा थी। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों की तादाद तो काफी थी, लेकिन इस आयोजन की खास बात यह थी कि इन लोगों में 10 से 12 लोग चीनी थे, जिन्हें अंग्रेजी का एक शब्द पल्ले नहीं पड़ता था। ये सारे लोग अनुवादकों के साथ आए थे और उन्होंने हमारे स्थनीय शिक्षकों की मदद से प्रारंभिक दौर की तैयारी कर ली और अनुवादकों की सहायता से ही दीक्षा प्रक्रिया भी पूरा किया। ये सब पिछले एक साल से नेट के जरिए ईशा कार्यक्रमों का अनुसरण कर रहे थे। उनकी सीखने की चाहत, इसमें हिस्सा लेने की लगन और अनुभव की उल्लास सही मायने में दिल को छू लेने वाली थी। उनका मेरे साथ जो सवांद हुआ, वह उनके लिए ‘शब्दों से परे’ की चीज थी।

मैंने सोमवार और मंगलवार का दिन थोड़ा आराम करने और गोल्फ के लिए रखा था। सिंगापुर में 24 गोल्फ कोर्सेस हैं, जिसमें से द आइलैंड क्लब सबसे खूबसूरत है। बारिश की बौछारों और ठंडी हवाओं ने यहां के मौसम को सुहाना बना दिया- ऐसा मौसम गोल्फ के लिए वाकई स्वर्ग है।

सिंगापुर अपने आप में एक असाधारण देश है। एक ऐसा देश, जिसके अपने कोई खास संसाधन नहीं, लेकीन चुस्त और अनुशासित प्रबंधन ने इसे महान देश बना दिया। यह वो जगह है, जहां व्यापार बहुत मजेदार है। महज 700 स्क्वेयर किलोमीटर से कुछ अधिक का क्षेत्रफल, 45 लाख की आबादी और ट्रिलीयन डॉलर की अर्थव्यवस्था, जहां प्रति व्यक्ति की आय 60 हजार सिंगापुर डॉलर से भी ज्यादा है। यह कामयाबी की एक ऐसी कहानी है, जिसका कोई सानी नहीं है। देश जहां हर कोई पर्यावरण के लिए सजग है और जहां पर्यावरण को बचाने के लिए कडे़ कानून बनाए गए हैं। भारत को इस छोटे से देश से कई चीजें सीखनी चाहिए।

यहां हमने भैरवी की प्रतिष्ठा भी की। दरअसल, यहां के कुछ लोगों पर देवी की विशेष अनुकंपा रही है। लगता है, आने वाले सालों में इस द्वीप पर देवी छा जाएंगी। एक पाकिस्तानी श्रद्धालु के घर पर आयोजित हुए रात्रिभोज में कई दिलचस्प लोग जुड़ गए।

कोयंबटूर से यहां तक की हवाई यात्रा सिर्फ साढे चार घंटे की है। अद्भुत लोग और भव्य गोल्फ कोर्सेस, ऐसे में यह टापू थोड़ी सी राहत लेने के लिए जबरदस्त जगह है। लेकिन मुझे हर जगह फैले अपने तमिल प्रशंसकों का स्नेह मिलता है, जो मुझे पहचानते ही घेरने लगते हैं और बिना रुके धड़ाघड़ फोटो खींचने लगते हैं। मैं फिलहाल चेन्नई की फ्लाइट में हूं, फ्लाइट चलने से पहले इसमें सवार आधे से ज्यादा यात्री मेरे साथ मेरे फोटो खिंचवाना चाहते हैं। मेरे साथ तमिलियों का यह विशेष प्रेम अद्भुत और दिल को छू लेने वाला है।

प्रेम व प्रसाद,

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