आखिर झूठ बोलने में हर्ज क्या है ?

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सद्‌गुरुहम झूठ बोलते समय अक्सर अपने लिए कुछ कारण ढूंढ लेते हैं, या अगर हमें कुछ अच्छा करना हो तो हमें झूठ बोलना गलत भी नहीं लगता। तो क्या अच्छे काम के लिए झूठ बोलना अच्छा है?

सद्‌गुरु: पिछले कुछ सालों से मैं एक चीज गौर कर रहा हूं कि ईशा योग केंद्र आने के उत्साह में कुछ लोग दुर्भाग्य से झूठ बोल कर आ रहे हैं। वे अपने घरवालों से या बाॅस से झूठ बोल कर यहां आ रहे हैं।
अगर आप झूठ को अपने जीवन का एक हिस्सा बना लेते हैं तो रिश्ते को खूबसूरत व सद्भावपूर्ण रख पाना मुश्किल होता है। किसी भी रिश्ते के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि उसमें से झूठ को बाहर कर दिया जाए।
यानी आश्रम में आने के लिए वे झूठ का सहारा ले रहे हैं। यह रोजमर्रा के जीवन में लोगों द्वारा बोले जाने वाले तमाम झूठों में से एक उदाहरण है, जो वे अपने घरवालों, जीवनसाथी या बाॅस से या अपने आसपास के लोगों से बोलते रहते हैं। अगर आप झूठ को अपने जीवन का एक हिस्सा बना लेते हैं तो रिश्ते को खूबसूरत व सद्भावपूर्ण रख पाना मुश्किल होता है। किसी भी रिश्ते के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि उसमें से झूठ को बाहर कर दिया जाए। केवल तभी आप एक खूबसूरत रिश्ता रख सकते हैं। यहां तक कि अगर आप एक बार भी झूठ बोलते हैं तो फिर सामने वाला आपकी बोली हुई हर बात को शक की नजर से देखेगा। लोग अकसर झूठ इसलिए बोलते हैं, क्योंकि उनमें सच बोलने से पैदा होने वाली अप्रिय स्थिति का सामना करने का साहस नहीं होता। इस अप्रिय स्थिति का सामना कीजिए।
अगर कुछ सोच विचार के बाद आप कुछ करने के बारे में तय करते हैं और आपके आस-पास के लोग इसका विरोध कर रहे हैं तो आप दृढ़ता से कहें कि आप यह करने जा रहे हैं।  
अगर आप एक बार भी झूठ बोलते हैं तो फिर सामने वाला आपकी बोली हुई हर बात को शक की नजर से देखेगा।
अगर आप सच बोलेंगे तो हो सकता है कि आपस में कुछ कटुता या टकराव हो, लेकिन फिर भी आपके रिश्ते में एक लिहाज व सम्मान रहेगा। लेकिन जब आप अप्रिय प्रतिक्रियाओं या टकराव से बचने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं तो यह रिश्तों को बर्बाद कर देता है। क्योंकि तब सामने वाले को पता ही नहीं चल पाता कि आप जो कह रहे हैं, वो सच है या झूठ। सामने वाले के भीतर आपकी बातों को लेकर एक अंतहीन संघर्ष शुरू हो जाता है, और वही संघर्ष फिर आपके रिश्तों में आ जा़ता है।   इसलिए सच बता दीजिए। जो चीज आपके लिए मायने रखती है, उसके लिए खड़ा होना महत्वपूर्ण है। खासकर बात जब योग की आती है तो यह और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह चीज आप अपने कल्याण के लिए कर रहे हैं। खुद के लिए खड़े होना आपके लिए, आपके रिश्तों के लिए और योग के लिए भी अच्छा है। हो सकता है कि शुरू में लोग आपसे नाराज रहें, लेकिन कुछ समय बाद सब ठीक हो जाएगा। कम से कम वे यह तो समझेंगे कि वे आप पर भरोसा कर सकते हैं।
भरोसा एक बेहद ही नाजुक चीज है। अगर कोई व्यक्ति आप पर सौ फीसदी भरोसा करता है तो एक तरह से वह खुद को आपके प्रति कमजोर बना रहा है। वे आपको अपने नजदीक आने की इजाजत देता है।  
लोग अकसर झूठ इसलिए बोलते हैं, क्योंकि उनमें सच बोलने से पैदा होने वाली अप्रिय स्थिति का सामना करने का साहस नहीं होता। इस अप्रिय स्थिति का सामना कीजिए।
इसीलिए अगर आप किसी भी रूप में उसका भरोसा तोड़ते हैं तो यह उसको चोट पहुंचता है। दूसरे तरह से कहें तो आप दुनिया में कितने प्रभावशाली हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि आपने लोगों का कितना भरोसा जीता है। भले ही आप कितने ही बुद्धिमान, क्षमतावान और जानकार हों, लेकिन अगर आपने अपने आस-पास के लोगों का विश्वास नहीं जीता तो वे आपको दुनिया में कुछ भी अच्छा या रचनात्मक नहीं करने देंगे। लोगों का भरोसा जीतने का सबसे आसान तरीका है कि स्पष्टवादी या सीधे-सपाट इंसान बनें। आपने जो कुछ भी किया, भले ही वो सही था या गलत, अक्लमंदी भरा था या मूर्खतापूर्ण, लेकिन आप स्पष्टवादी बनें। शुरू में यह असहज हो सकता है। लेकिन कुछ समय बाद जब लोग देखते हैं कि आप जो भी करते हैं, आप उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं तो लोगों का भरोसा जागना शुरू होता है। अगर आप दस लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब हो गए तो एक तरह से आपके पास दस लोगों की ताकत है। इसी तरह से अगर आप दस लाख लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब हो गए तो आपके पास दस लाख लोगों की शक्ति होगी।
हम सब को दूसरों का भरोसा जीतने और उसे कायम रखने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। भरोसे को तोड़ना आसान है, लेकिन उसे जीतना उतना आसान नहीं है।
आप दुनिया में कितने प्रभावशाली हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि आपने लोगों का कितना भरोसा जीता है।
जब भी भरोसा टूटता या बिगड़ता है तो सबसे पहले आपने जो भी किया है, उसकी जिम्मेदारी लीजिए, न कि उसे छिपाने की कोशिश कीजिए या बहाने ढूंढिए। अगर आप अपने किए की जिम्मेदारी लेते हैं तो आप खुद को और अपने आस-पास के लोगों को यह जताने की कोशिश करते हैं कि आप भविष्य में कैसे होंगे। ऐसे में आपके सामने उस भरोसे के फिर से बनने का एक मौका रहता है। लेकिन अगर आप बार-बार लोगों का विश्वास तोड़ते हैं तो कोई भी आपके साथ नहीं रहना चाहेगा। दूसरों के साथ केवल अच्छा रिश्ता बनाए रखने के लिए ही भरोसा कायम रखना जरूरी नहीं है। अगर लोगों का आपमें भरोसा होगा, केवल तभी आप इस दुनिया में कुछ रचनात्मक कर पाएंगे। सच्चा इंसान बनना और लोगों का भरोसा जीतना कोई नैतिकता का सवाल नहीं है। यह जीवन जीने का सबसे समझदारी भरा और प्रभावशाली तरीका है।


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