ईशा के लिए वसंत काल

London-Sathsang

सप्ताह के अंत में आयोजित भाव स्पंदन के शानदार कार्यक्रम के बाद अब मैं अमेरिका से निकलने की तैयारी में हूं। आठ हफ्तों का यह प्रवास मेरा अमेरिका के सबसे लंबे प्रवासों में से एक रहा है। साथ ही, यह मेरी अब तक की सबसे सफलतम यात्राओं में से भी एक है। पिछले कुछ हफ्तों में जहां हमने कुछ बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाए, वहीं कई अहम व प्रभावशाली कार्यक्रमों को भी अंजाम दिया। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है कि आने वाले कुछ हफ्तों में ‘ईशा इनर इंजीनियरिंग ऑन लाइन’ की शुरुआत होने वाली हैं। हाल ही में ईशा पर अमेरिका में छपी और प्रकाशित होने वाली किताब भी आई है जो खास तौर पर अमेरिकावासियों की जरूरतों के हिसाब से तैयार की गई है। यह किताब अपनी जगह बनाने की कोशिशों में जुटी है। इसके अलावा, ईशा इंस्टीट्यूट ऑफ इनर सांइसेज में पहली ईशा इंजीनियरिंग रिट्रीट की योजना भी बनी है।

साथ ही कुछ और चीजों में भी प्रगति जारी है। ईशा इंस्टीट्यूट ऑफ इनर सांइसेज को टेनेसी राज्य के पर्यटन नक्शे में जगह मिली है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में टेनेसी अपने आप में एक जबरदस्त पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है। इसके अलावा, टेनेसी रिटायर्ड लोगों की पसंदीदा जगह के तौर पर भी अपनी पहचान बनाता जा रहा है। आदि योग स्थल का काम पूरी गति के साथ जारी है, जो साल 2014 के वंसत तक पूरा हो जाएगा। इसके अलावा, ईशा रिजुवनेशन का काम भी पाइप लाइन में है। इसके अलावा, हमारे मच्छर-रोधी  फॉर्म्यूले को भी जो सौ फीसदी प्राकृतिक है, बिजनेस मॉडल के तौर पर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मान्यता मिल गई है। देखा जाए तो पिछले आठ हफ्ते ईशा के लिए कई तरह से काफी उत्पादक माने जाएंगे।

अभी अभी अटलांटा एयरपोर्ट पहुंचा हूं, जहां से मुझे लंदन की फ्लाइट पकड़नी है। यहां आकर पता चला कि लंदन की फ्लाइट सात घंटे लेट है। अच्छा होता ये सात घंटे अटलांटा एयरपोर्ट पर बिताने की जगह ईशा केंद्र में बिता पाता। अब यहां से मेरी फ्लाइट सुबह साढ़े तीन बजे उडान भरगी।

लंदन में एक खुशनुमा और रोशन मौसम ने मेरा जबरदस्त स्वागत किया। यहां मुझे गोल्फ खेलने का मौका मिला। वेंटवर्थ कोर्स में गोल्फ खेलना अपने आप में एक शानदार अहसास है। यहां के आठ मील में फैले हरे-भरे मैदान में गोल्फ खेलने के दौरान मेरे पैरों  को खुलने का एक अच्छा मौका मिल गया। इसके अलावा, यहां कुछ बेहद अंतरंग और निजी मुलाकात व बैठकें हुईं। सत्संग भी हुआ, जिसमें तकरीबन 600 लोग आए। यहां सत्संग में आए लोगों की प्रतिक्रिया और उनका व्यवहार अमेरिका के लोगों से कितना अलग व आश्चर्यजनक था। आने वाले महीनों में लंदन और यूरोप में ‘ईशा इंजीनियरिंग ऑनलाइन’ का काम शुरू होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मैंने ब्रसेल्स और आंटरेप में एक के बाद एक कई बैठकों में भाग लिया। पिछले कुछ सालों से मैं यहां कई चीजों पर काम कर रहा हूं। ये सभी चीजें अपना आकार लेने में जुटी हैं और आने वाले कुछ महीनों में ये साकार हो उठेंगी, तब वाकई वह समय ईशा के वंसतकाल का होगा।

अब मैं लंदन की तरफ वापस जा रहा हूं। वहां से दो दिन के लिए बेंगलुरू जाउंगा। कई शहरों व घटनाओं मे नौ हफ्ते से ज्यादा वक्त बिताने के बाद ईशा योग केंद्र, कोयंबटूर पहुंचूंगा।

काश! मैं बिना हवाई जहाज या कहूं तो बिना एयरपोर्ट के उड़ पाता। बिन लादेन के बाद एयरपोर्ट अब कतई सुकून भरी जगह नहीं रह गए हैं। अब मॉनसून की फुहारों का बेसब्री से इंतजार है। पेश हैं चंद पक्तियां।

बरसात

एक काला घना बादल
ऐसा लगता है अब रो देगा
उसे रो लेने दो

बोझ उतारकर हलका हो लेने दो
जब आंसू वह बहाएगा
पृथ्वी पर हर जीवन नाचेगा और गाएगा

उसकी हर बूंद है पावन
जिसमें है अपार अनंत जीवन

प्रेम व प्रसाद,

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