हठ योग प्रशिक्षकों का पहला प्रशिक्षण

Adiyogi-Alayam

आदियोगी आलयम के बनकर तैयार हो जाने के बाद अब हम गंभीरतापूर्वक हठ योग स्कूल के बारे में सोच रहे हैं। मै योगासनों के प्रति गहन जुड़ाव और लगाव के साथ बड़ा हुआ हूं और इनसे मुझे जबरदस्त लाभ भी हुआ है। आजकल भले ही मैं आसनों को ज्यादा समय नहीं दे पा रहा हूं, लेकिन पिछले 24 सालों से मैंने जिस तरह से इन आसनों को नियमित तौर पर किया है, उसी ने आज भी मुझे उसने इतना भला चंगा बनाया हुआ है। दरअसल, अगर आप इस तरह की साधना कर अपने शरीर को तैयार करते हैं तो वह कभी आपको मायूस नहीं करेगा। तब आप हर तरह के शारीरिक कष्ट या दवाब को बडे़ आसानी से सहन कर पाएंगे, क्योंकि हठ योग के बाद आपके शरीर की संरचना ऐसी हो जाती है कि वह शारीरिक कष्टों या थकावट को बड़ी आसानी से सह लेता है। हो सकता है कि शारीरीक कष्ट या दवाब से आपकी मांसपेशियां थक गई हों, लेकिन बिना किसी आराम या नींद के आपकी दैहिक प्रणाली थोड़े समय में ही वापस अपनी स्थिति में आ जाती है, क्योंकि आपकी ऊर्जा किसी एक जगह पर सुरक्षित रखी होती है। इस क्रिया के कई पहलू है, हां उसमें हठ योग भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।

अगर हठ योग सही तौर पर और सही वातावरण में नम्रता के साथ समग्र रूप से सिखाया जाए तो यह एक शानदार क्रिया है। आज अगर हठ योग में कुछ भोंडापन या विकृति आई है तो इसकी वजह है कि कुछ लोग लोगों ने इसे सर्कस की तरह सिखाना शुरू कर दिया है। वे लोग शायद अपने आप को दूसरों से बेहतर बनाने के लिए इसे और बढ़ा-चढ़ाकर कर रहे हैं। यह ज्यादा दिन पहले की बात नहीं है, मैं दक्षिण कैलिफोर्निया में था, तभी मुझे खयाल आया कि एक बाजी गोल्फ की हो जाए। गोल्फ के मैदान में मेरे साथ खेलने के लिए क्लब वालों ने दो नौजवानों को भी भेज दिया। वैसे आम तौर पर मैं गोल्फ के मैदान में होता हूं तो अध्यात्म की बातें करने से बचता हूं, क्योंकि मैं जानता हूं कि इन बातों के लिए वह उपयुक्त जगह नहीं है। अध्यात्म की बातें करने के लिए एक विशिष्ट वातावरण की जरूरत होती है। इस स्थिति से बचने के लिए मैंने अपनी टोपी को और नीचे की तरफ खींच लिया ताकि मुझे कोई पहचान नहीं पाए और मैंने अपना व्यवहार अमित्रापूर्ण बना लिया। जो दो लोग मेरे साथ खेल रहे थे, वे जानने की चेष्टा कर रहे थे कि मैं कौन हूं और क्या करता हूं? आखिरकार मेरे एक साथी ने उन्हें बताया कि मै योग सिखाता हूं। यह सुनते ही उनमें से एक ने जो सबसे पहला सवाल मुझसे किया वो था कि क्या मैं उन्हें सिक्स पैक बनाना सिखा सकता हूं। उसे लग रहा था कि योग पेट को सपाट करने का साधन है।

योग आपके शरीर को तराशने और उसका प्रदर्शन करने की क्रिया नहीं है। दरअसल, योग शरीर को एक शानदार पात्र और विस्मयकारी यंत्र बनाने की प्रक्रिया है, जिसके जरिए आप दैवीय कृपा हासिल कर सकें। हठ योग तो असाधारण क्रिया है। लेकिन आज कई शारीरिक चिकित्सक और शरीर विशेषज्ञ हठ योग पर किताबें लिख रहे हैं और लोगों को विश्वास दिलवा रहे हैं कि हठ योग एक शारीरिक कसरत करने की क्रिया है। मैं इसे जटिल बनाने का प्रयास नहीं कर रहा हूं। मेरी इच्छा है कि योग विश्व के हर इंसान तक पहुंचना चाहिए, जो कि उसे पहुंचना ही है। लेकिन अगर कोई योग सिखाना ही चाहता है तो उसे पूरे समर्पण के साथ यह काम करना होगा। उन्हें इसके लिए जो अनिवार्य समय लगता है उसे लगाने की चाह भी होनी चाहिए, नहीं तो जल्दबाजी में योग सिखाने से कोई फायदा नही। इतना ही नहीं, कुछ महानुभाव तो इतने हल्के और उथले किस्म के हैं जो इसमें बदलाव भी करना चाहते हैं। हजारों साल की तपस्या से जो लोग इसमें तैयार हुए हैं और जो इस शारीरीक प्रणाली को अच्छी तरह से जानते हैं, उन्होंने इसे बनाया है। इसमें बाहरी तौर पर जो दिखाई देता है, उससे कई गुना ज्यादा है शक्तिशाली है हठ योग। दरअसल, जो नौसीखिए एक का दूसरे से संबध नहीं जानते, वह इसमें बदलाव करने की बात करते हैं। आजकल तो जलीय योग और स्काइडाइविंग योग (आकाश में विमान से कलाइयां मारना) तक की बातें होती हैं। यह पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना हरकत है।

अमेरिका में मेरे पास कम से कम वहां के जाने-माने आठ से दस योग प्रशिक्षक इस लिए आए थे कि उनकी अपनी शारीरिक प्रणाली में गंभीर किस्म के असंतुलन थे। दरअसल वे जो सबसे बड़ी गलती रहे थे, वह थी कि योग करते समय संगीत बजाना। मुझे लगता है कि आम तौर पर यह गलती सभी करते हैं। दूसरी गलती यह कि प्रशिक्षक आसन की विभिन्न मुद्राएं करके दिखाते समय बातें भी करते हैं। जब आप आसन करते हैं तो आप को किसी तरह का कोई उच्चारण नहीं करना चाहिए। आप को आसन करते समय कुछ अनिवार्य चीजें करनी होती हैं। अगर कोई प्रशिक्षक किसी आसन की मुद्रा होते हुए संबोधन कर रहा है तो उसे तकलीफ होना निश्चित है। इसलिए कुछ आठ से दस प्रशिक्षक गंभीर असंतुलन के साथ हमारे पास आए, जिन्हें वापस ठीक करने में हमने मदद की। उनमें से शायद चार ने तो प्रशिक्षण का काम ही छोड़ दिया, क्योंकि उनकी समझ में आ चुका था कि वे क्या बेवकूफी कर रहे थे। लेकिन बाकियों के लिए योग प्रशिक्षण जीविका का साधन है इस कारण उन्होंने उसे जारी रखा।

योग एक ऐसी सूक्ष्म तकनीक है, जो आपकी अंतरीक ऊर्जा को कुशलता पूर्वक अपने जीवन का ध्येय पूरा करने के लिए उसकी नैसर्गिक सीमा को लांघने में मदद करती है। इसे जीवंत रूप में ही सिखाया जा सकता है। अगर ऐसा होना है तो इसके लिए प्रशिक्षक की सहभागिता अनिवार्य है, जो आज की दौर में इस दुनिया में दिखाई नहीं देती। हम पुरातन लगते हैं क्योंकि हम उस तरह के समर्पण की बात करते हैं। हम चाहते हैं कि मनुष्य अपनी यात्रा शरीर से शुरू करे, लेकिन आंतरिक स्वरूप की ओर बढे़। हमें इंसानो को धीरे-धीरे एक नई संभावनाओं की ओर बढ़ाना है।

हमारा लक्ष्य है कि हम आदियोगी आलयम को विश्व परिवर्तन के काम की शुरुवात माने। यहां हम योग सिखाने की कक्षाएं नहीं चला रहे हैं, हम यहां योग प्रशिक्षकों को शिक्षित कर रहे हैं, खासकर पश्चिम के लोगों को। हमारा लक्ष्य है कि अगर कुछ सालों मे हमने यहां से कुछ हजार योग प्रशिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया तो वे सर्वप्रथम योग के बारे में विश्व में व्याप्त धारणाओं को बदलेंगे, फिर योग के उद्देश्य, ध्येय, हेतु और विश्व में योग प्रदान करने के ढ़ंग को। हम उन ‘कक्ष‘ योग प्रशिक्षकों को फिर से प्रशिक्षित करेंगे, ताकि उनकी योग क्रिया में नए आयाम जुड़ सकें। हम यही सब करना चाहते हैं। मैं हठ योग के विलुप्त हो रहे आयामों को वापस लाना चाहता हूं। यह जीवन जीने का एक बेहद शक्तिशाली तरीका है। यह शक्ति किसी और पर हावी होने के लिए नही, बल्कि जीवन का मार्ग खोजने के लिए है। और जीवन का मार्ग खोजने के लिए आपको साधन चाहिए। आपके पास कुल मिलाकर एक शरीर है, जिसे आप चाहें तो अनुभव के शिखर पर ले जाएं या एक हाड़ मांस का गोला बनाए रखें। अब आप तय करें कि इसे आपको एक विशाल संभावना बनाना है या एक विवशताओं का टोकरा।

प्रेम व प्रसाद,
हठ योग प्रशिक्षकों का पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर 3 जुलाई 2012 को शुरू होने जा रहा है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ स्वयं सद्गुरु छात्रों को दीक्षित कर के करेंगे।
 

 


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