गीत

Sadhguru -Poem

गीत


 एक खाली बांस
अपने भीतर बहती बयार को
बदल देता है मधुर गीत में।

अपने अहम का लबादा ओढे़ मूर्ख
बैठा होगा मूक और नि:शब्द
जब खिलखिला और गुनगुना रही होगी
कायनात सारी

अगर सुननी है जीवन के
मधुर गीत का गूंजन
तो रीतना होगा
खुद से ही खुद को

भर उठोगे इस दिव्य गीत की
मिठास, माधुर्य और खुशबू से तुम
जब कर लोगे खुद को
गुरु की इच्छा में लवलीन

प्रेम व प्रसाद,

संबन्धित पोस्ट


Type in below box in English and press Convert