जीवन के दृश्‍य

20140811_CHI_0513-e

इस हफ्ते के स्पॉट में सद्‌गुरु, एक नई कविता हमसे साझा कर रहे हैं। इस कविता में वे प्रयत्न करने, और तुच्छ विचारों और भावनाओं से ऊपर उठ कर, एक नई जगह तक पहुँचने के बारे में बता रहे हैं। एक ऐसी जगह जहां से चीज़ें साफ़ दिखने लगें।

जीवन के दृश्‍य

यदि तुम करते हो कोशिश

ऊपर उठने की

उन क्षुद्र गड्ढों से, जो बने हैं-

विचारों व भावनाओं से

यदि तुम करते हो कोशिश

ऊपर उठने की

उन क्षुद्र गड्ढों से, जो बने हैं-

पूर्व-धारणाओं से, क्रोध के भीत्तियों से,

भय की खाइयों व घृणा के नाबदानों से,

कुंठा, निराशा व अवसाद के मृत्यु-जालों से।

यदि करते हो तुम कोशिश-

पहुंच जाओगे तुम एक ऐसी ऊंचाई पर

जहां भोग पाओगे तुम सुख

देखने का – उस अनंत विस्तार को

जहां खिले होंगे पुष्प प्रेम के,

 हर्ष, आनंद व परमानन्द के।

खोलो अपने मन के पट

उस जीवन के लिए
जिसमें है एक दृश्‍य 

प्रेम व प्रसाद,

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